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बेमौसम बरसात के चलते 4000 करोड़ का धान खराब

Agencies
Updated: February 25, 2014, 9:59 AM IST
बेमौसम बरसात के चलते 4000 करोड़ का धान खराब
राज्‍य में बेमौसम बरसात और धान संग्रहण केन्द्रों की लापरवाही ने सूबे में तकरीबन 4000 करोड़ रुपये के धान को खराब कर दिया है। न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान खरीद के तहत खरीदे गए लगभग 80 लाख मीट्रिक टन धान पर बारिश का संकट अभी भी बरकरार है।

राज्‍य में बेमौसम बरसात और धान संग्रहण केन्द्रों की लापरवाही ने सूबे में तकरीबन 4000 करोड़ रुपये के धान को खराब कर दिया है। न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान खरीद के तहत खरीदे गए लगभग 80 लाख मीट्रिक टन धान पर बारिश का संकट अभी भी बरकरार है।

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  • Last Updated: February 25, 2014, 9:59 AM IST
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राज्‍य में बेमौसम बरसात और धान संग्रहण केन्द्रों की लापरवाही ने सूबे में तकरीबन 4000 करोड़ रुपये के धान को खराब कर दिया है। न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान खरीद के तहत खरीदे गए लगभग 80 लाख मीट्रिक टन धान पर बारिश का संकट अभी भी बरकरार है।

रायपुर सहित सूबे के कई जिलों में रविवार रात तेज बारिश से कई संग्रहण केन्द्रों के धान भीग गए हैं। सूबे के कई जिलों में शुक्रवार रात से अभी तक रुक-रुक कर हो रही बारिश से लाखों टन धान के बोरे भीग गए हैं।

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल और नेता प्रतिपक्ष टी.एस. सिंहदेव का साफ आरोप हैं कि 22 लाख टन धान को घपले घोटालों और अनियमितताओं पर पर्दा डालने के लिए खुले में छोड़कर भीगने दिया गया। दूसरी तरफ सूबे के खाद्य आपूर्ति मंत्री पुन्नूलाल मोहिले ने इसे प्राकृतिक आपदा बताते हुए विपक्ष के आरोपों को खीझ मात्र बताया है।

छत्तीसगढ़ में अब तक की सबसे बड़ी खरीद का धान प्रदेश के करीब डेढ़ हजार उपार्जन केंद्रों और खरीद केंद्रों में खुले में रखा गया है। इसी बीच बीते शुक्रवार शाम से मौसम में हुए बदलाव के कारण कई स्थानों पर तेज बारिश हुई और अभी भी बेमौसम बारिश के बादल मंडरा रहे हैं।

रविवार की रात तो जमकर बारिश हुई जिससे प्रदेश के कई जिलों में खुले में रखा धान भींगकर खराब हो गया। अनुमान है कि अरबों रुपये के धान पर बारिश का पानी फिर गया है। उल्लेखनीय है कि पिछले साल खरीदे गए धान में से करीब पौने दो सौ करोड़ का धान खराब हो गया था।

महासमुंद जिले के तुमाडबरी संग्रहण केंद्र के प्रभारी एसआर साहू ने बताया कि शनिवार की सुबह अचानक हुई बारिश से ऊपर-ऊपर के धान बोरे भीग गए हैं। ऐसे में कैप कवर ढंकने से धान के अंकुरित होने का खतरा है। इसलिए मौसम खुलने का इंतजार कर रहे हैं। जैसे ही मौसम साफ होगा, कैप कवर ढंककर धान को सुरक्षित करेंगे।

उल्लेखनीय है कि इस वर्ष सबसे अधिक सात लाख 38 हजार 40 मीट्रिक टन धान की आवक जांजगीर-चाम्पा जिले में दर्ज की गई है। लंबे समय तक नंबर वन रहने वाला महासमुंद जिला छह लाख 97 हजार 999 मीट्रिक टन आवक के साथ दूसरे नंबर पर खिसक गया है। रायपुर पांच लाख 49 हजार 450 मीट्रिक टन धान की खरीदी के साथ तीसरे स्थान पर आ गया है।सूबे के रायपुर जिले के कई स्थानों पर पिछले 24 घंटे के दौरान जमकर बारिश हुई है। विभिन्न स्थानों के धान उपार्जन और संग्रहण केंद्रों में खुले में रखा धान भींगा है। नया रायपुर क्षेत्र के बरोंदा में स्थित उपार्जन केंद्र में हजारों बोरा धान खुले में रखा हुआ है। यह धान धूप में सूखने से वजन में कमी आ रही है और अब बारिश में भींगने से धान के खराब होने की आशंका बढ़ गई है।

कहां पर भीगा कितना धान

रायपुर 12,332 लाख क्विंटल

जांजगीर 20,6 15 लाख क्विंटल

महासमुंद 12, 227 लाख क्विंटल

राजनांदगांव 11,312 लाख क्विंटल

बस्तर 5806 लाख क्विंटल

धमतरी 8409 लाख क्विंटल

कवर्धा 7920 लाख क्विंटल

कांकेर 11,114 लाख क्विंटल

सरगुजा 3002 लाख क्विंटल

रायगढ़ 12131 लाख क्विंटल

बिलासपुर 130 18 लाख क्विंटल

 

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First published: February 25, 2014, 9:59 AM IST
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