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दुर्लभ रक्त समूह बॉम्बे ब्लड देकर सतीश ने बचाई महिला की जान

सतीश ने रेयर ब्लड ग्रुप बॉम्बे 
ब्लड देकर एक महिला की जान बचाई.
सतीश ने रेयर ब्लड ग्रुप बॉम्बे ब्लड देकर एक महिला की जान बचाई.

रायगढ़ निवासी सतीश सिंह ठाकुर ने एक महिला की जान बचाकर इंसानियत की एक मिसाल पेश की है. सतीश ने रेयर बॉम्बे ब्लड ग्रुप देकर महिला को नया जीवन दिया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: June 13, 2017, 12:06 PM IST
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रायगढ़ निवासी सतीश सिंह ठाकुर ने एक महिला की जान बचाकर इंसानियत की एक मिसाल पेश की है. सतीश ने रेयर बॉम्बे ब्लड ग्रुप देकर महिला को नया जीवन दिया है.

सतीश इससे पहले भी कई लोगों की जिंदगी बचा चुके हैं. सतीश पेशे से ठेका मजदूर हैं और अभी तक सतीश क्लब के माध्यम से 12 लोगों को जीवनदान दे चुके हैं. उनका कहना है की जब तक वे स्वस्थ्य रहेंगे तब तक उनकी मुहिम जारी रहेगी.

बता दें की 24 अक्टूबर 2006 को बिलासपुर निवासी 6 वर्षीय अरविंद बघेल को बंगलूर के नारायण हृदयालय हॉस्पिटल में सतीश सिंह और जमशेदपुर निवासी अमिताभ कुमार सिंह और बंगलूर निवासी एस बी श्रीधर ने तीन यूनिट ब्लड डोनेट कर मासूम की बचाने में अहम भूमिका निभाई थी.



बॉम्बे रक्त समूह रक्त का एक दुर्लभ रक्त समूह है. इस रक्त समूह की खोज सबसे पहले मुंबई में 1942 में डा.वाई एम भेंडे द्वारा की गई थी. बॉम्बे में इसकी कोज होने पर इसका नाम बॉम्बे रक्त समूह पड़ा. इस रक्त समूह को hh और OH रक्त समूह भी कहते है, इस रक्त समूह में h प्रतिजन खुद को अभिव्यक्त नही कर पाता जो की O रक्त समूह में होता है.
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