Assembly Banner 2021

भू-माफियाओं का दबदबा, बेच दी कोटवारों को दी गई सेवा भूमि

एसपी बी. एन. मीणा

एसपी बी. एन. मीणा

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में कोटवारों को दी गई सेवा भूमि को 34 बड़े रसूखदार भू-माफियाओं ने ना सिर्फ गलत तरीके से कब्जा कर लिया, बल्कि उसे औद्योगिक प्रयोजन और बिल्डर्स को बेच भी दिया.

  • Share this:
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में कोटवारों को दी गई सेवा भूमि को 34 बड़े रसूखदार भू-माफियाओं ने ना सिर्फ गलत तरीके से कब्जा कर लिया, बल्कि उसे औद्योगिक प्रयोजन के लिए बिल्डर्स को बेच भी दिया.

इस संबंध में राजस्व न्यायालय ने प्रकरणों की सुनवाई की और एफआईआर दर्ज कराने के आदेश जारी किए हैं. लेकिन एक साल से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी आरोपियों पर शिकंजा नहीं कसा जा सका है. इसके पीछे रसूख का होना भी बताय जा रहा है.

गांवों में सेवा देने वाले कोटवारों को सरकार सेवा भूमि प्रदान करती है. यह भूमि स्थानांतरित होती है. लेकिन इस बीच भू-माफियाओं ने कुछ राजस्व विभाग के अधिकारियों और दलालों के माध्यम से कोटवारों की भूमि को हथिया लिया.



सामाजिक कार्यकर्ता राजेश त्रिपाठी ने कहा कि मामले की शिकायत बिलासपुर राजस्व मण्डल न्यायालय में हुई जहां 34 मामलों की जांच की गई. सभी मामलों में खरीद-बिक्री में खामियां पाई गई.
लिहाजा, राजस्व मंडल ने जिला प्रशासन को एफआईआर दर्ज कराने के आदेश भी दिए. लेकिन मामले में अब तक जांच लंबित है.

राजस्व मंडल ने जिले के 34 मामलों की सूची जिला प्रशासन को जांच कर एफआईआर दर्ज करने को भेजी थी, जिसमें कोटवारों की 125 एकड़ से ज्यादा सेवाभूमि को नियम के विरुद्ध जाकर खरीद बिक्री की गई.

वहीं एसपी बी. एन. मीणा ने बताया कि मामले में कई बिल्डरों द्वारा नियमों के विरुद्ध जाकर जमीनों को ट्रांसफर कराया गया था. उन्होंने बताया कि जनवरी 2016 में राजस्व मंडल के अध्यक्ष डी. एस. मिश्रा ने मामले को धारा 51 के तहत स्वयमेव संज्ञान में लिया था.

इसके बाद रायगढ़ और पुसौर ब्लॉक के 34 ऐसे मामलों की सूची तैयार की थी, जिसमें कोटवारों की जमीन को गलत तरीके से खरीद-बिक्री की गई थी. हालांकि मंडल ने ये भी कहा था कि सेवा भूमि पर किसी का स्वामित्व नहीं होता है. बल्कि इसे कोटवारों के जीवन यापन के लिए दिया गया है.

इसके लिए जिला पुलिस अधीक्षक को पत्र भी भेजा गया था, लेकिन एक साल बाद भी इस मामले में जांच आगे नहीं बढ़ सकी है.

जिले के रसूखदारों में आलोक सिटी माल के संचालक आलोक रतेरिया, बालाजी बिल्डकान, पवन चौहान, कैलाश अग्रवाल, ललित अग्रवाल, एटी गोल्ड प्राइवेट लिमिटेड, वेंकटेश कृषि केंद्र, गणपति बिल्डकान,  विष्णु डेवलपर्स, समेत 34 लोगों के नाम शामिल हैं.

जांच में लेटलतीफी को लेकर अब सामाजिक संगठन सवाल उठा रहे हैं. लोगों का कहना है कि रसूखदारों के नाम होने की वजह से जानबूझकर जांच में लेटलतीफी की जा रही है. मामले में धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जमीन को कोटवारों को वापस की जानी चाहिए.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज