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धमाकों के बीच जी रहे ग्रामीण, अब पकड़ी आंदोलन की राह

विधायक लाल जीत सिंह राठिया 
फोटो-ईटीवी
विधायक लाल जीत सिंह राठिया फोटो-ईटीवी

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में एस.ई.सी.एल.छाल के लात ओपन खदान की जमीन का अधिग्रहण 2007 में किया गया था. गांव वाले आज भी ब्लास्टिंग के बीच जीने को विवश हैं.

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छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में एस.ई.सी.एल.छाल के लात ओपन खदान की जमीन का अधिग्रहण 2007 में किया गया था.  गांव वाले आज भी ब्लास्टिंग के बीच जीने को विवश हैं. गौरतलब है कि कोयला खदान में कोयला निकाल के लिए धमाके किए जाते हैं.

पुनर्वास के काम को  एस.ई.सी.एल. ने अब तक नहीं किए पूरे 

ग्रामीणों का आरोप है कि पुनर्वास के तहत किए जाने वाले काम एस.ई.सी.एल. ने अब तक पूरे नहीं किए. इसके कारण बुधवार से ग्रामीणों ने एस.ई.सी.एल के खिलाफ अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू किया.



खदान के काम को रोका, गाड़ियों को रोक सड़क जाम किया
ग्रामीणों ने खदान के काम सहित ट्रांसपोर्ट की गाड़ियों को रोक कर सड़क जाम किया. इस काम में क्षेत्रीय विधायक लाल जीत सिंह राठिया भी साथ दिखे. कुछ ऐसे भी ग्रामीण दिखे जो सालों से ब्लास्टिंग के बीच जीने को मजबूर हैं.

ग्रामीणों को अधिकारियों पर जरा भी  नहीं है भरोसा

किसानो का कहना है कि उनकी जमीन छीने जाने के बाद वे लोग सड़क पर आ गए हैं. उन्हें एस.ई.सी.एल.के आला अधिकारियों पर जरा भी विश्वास नहीं है. कई बार किसानों को पुलिसिया दमन भी झेलना पड़ा और दवाब डालकर गांव से हटाने का प्रयास किया गया.  ब्लास्टिंग से कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है. समय रहते खदान के बीच में बसे ग्रामीणों को सुरक्षित जगह पर बसाने की जरुरत है.
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