क्लीनिकल पोस्टिंग से गायब रहने वाले MBBS के 29 स्टूडेंट्स हुए ब्लैकलिस्ट

Mamta Lanjewar | News18 Chhattisgarh
Updated: September 12, 2019, 11:48 AM IST
क्लीनिकल पोस्टिंग से गायब रहने वाले MBBS के 29 स्टूडेंट्स हुए ब्लैकलिस्ट
सभी बच्चों को क्लास में बैठकने पर भी रोक लगा दी गई है. (सांकेतिक तस्वीर)

सभी छात्र पं. जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के 5वें सेमेस्टर के हैं. कॉलेज प्रबंधन ने क्लीनिकल पोस्टिंग में नहीं पहुंचने को अनुशासनहीनता के तौर पर लिया है.

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रायपुर.  छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) की राजधानी रायपुर (Raipur) के  पं. जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज (Pt. Jawahar Lal Nehru Memorial Medical College, Raipur) ने रूल्स तोड़ने (Broke Rules) वाले छात्रों पर एक बड़ी कार्रवाई की है. जानकारी के मुताबिक, कॉलेज प्रबंधन ने एमबीबीएस (MBBS) के 29 छात्रों को ब्लैकलिस्ट (Blacklist) कर दिया है. स्टूडेंट्स पर आरोप है कि सभी क्लीनिकल पोस्टिंग (Clinical posting) से गायब थे. ब्लैकलिस्ट होने वाले छात्रों पर एक और मुसीबत आ गई है. अब ये छात्र अगले साल फरवरी-मार्च में होने वाली आयुष विवि (Ayush University of Chattisgarh)  की मुख्य परीक्षा में नहीं दे पाएंगे. बताते हैं कि ये सभी छात्र पं. जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के 5वें सेमेस्टर के हैं.  कॉलेज प्रबंधन ने क्लीनिकल पोस्टिंग में नहीं पहुंचने को अनुशासनहीनता (Indiscipline) के तौर पर लिया है. इस वजह से छात्रों पर कार्रवाई की गई है. इस पूरे लिस्ट में 17 छात्राएं भी शामिल हैं. सभी बच्चों को क्लास (Class) में बैठकने पर भी रोक लगा दी गई है.

इस वजह से हुई कार्रवाई

जानकारी के मुताबिक, छात्रों की पोस्टिंग 17 जुलाई से 13 अगस्त तक मेडिसिन विभाग (Medicine Department) में लगाई गई थी. लेकिन, छात्रों ने विभाग में एटेंडेंस नहीं दी. इस संबंध में 28 अगस्त को मेडिसिन विभाग के एचओडी का पत्र डीन ऑफिस में पहुंचा. फिर जाकर छात्रों की लापरवाही का पता चला. गायब रहने वाले छात्रों की सूची नोटिस बोर्ड पर लगा दी. साथ ही नोटिस में अन्य छात्रों को चेतावनी भी दी गई है. संबंधित विभागों में लगाई गई क्लास और क्लीनिकल पोस्टिंग में अनिवार्य रूप से उपस्थिति रहने की हिदायत भी दी. कॉलेज प्रबंधन ने साफ कर दिया कि ऐसा न करने पर छात्रों को ब्लैकलिस्ट कर परीक्षा के लिए अपात्र घोषित कर दिया जाएगा.

क्यों होती है पोस्टिंग

एमबीबीएस छात्रों की अलग-अलग विभागों में एक महीने की पोस्टिंग की जाती है. इस दौरान छात्र मरीजों की हिस्ट्री पूछते हैं, उसके नोट्स बनाते हैं और बीमारियों के बारे में समझते है. इससे सही इलाज के बारे में उन्हें जानकारी मिलती है.

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First published: September 12, 2019, 11:07 AM IST
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