Home /News /chhattisgarh /

2016 में मौत की नींद सो गए छत्तीसगढ़ के 402 नवजात

2016 में मौत की नींद सो गए छत्तीसगढ़ के 402 नवजात

सालाना हेल्थ सर्वे रिपोर्ट में नवजात बच्चों के मौत के चौंकाने वाले आकड़े सामने आए हैं. छत्तीसगढ़ के अस्पतालों मे पैदा होने वाले बच्चों की मौत का आंकडा जहां 30 बच्चा प्रति हजार होना चाहिए, वह 50 बच्चा प्रति हजार है.

    सालाना हेल्थ सर्वे रिपोर्ट में नवजात बच्चों के मौत के चौंकाने वाले आकड़े सामने आए हैं. अस्पतालों मे पैदा होने वाले बच्चों की मौत का आंकडा जहां 30 बच्चा प्रति हजार होना चाहिए, वह 50 बच्चा प्रति हजार है. यानि की एक हजार बच्चों के जन्म के पीछे 50 बच्चों की मौत हो रही है.

    नेशनल हेल्थ मिशन ने 30 बच्चों तक की मौत को सामान्य माना है. मौत का आकड़ा अनुपात से कहीं अधिक जा सकता है. अब तक एक साल में 402 नवजात बच्चों की मौत हो चुकी है.

    पिछले सात सालों की मौत के आंकड़ों को देखें तो ये भी कम चिंताजनक नहीं हैं. साल - 2010 में 30525 प्रसव हुए, जिसमें 1034 बच्चों की मौत हुई. मृत्यु अनुपात 65 बच्चा प्रति हजार रहा.

    इसी तरह. 2011 में 30900 प्रसव हुए, जिसमें 420 बच्चे मृत हुए. मृत्यु अनुपात- 59 बच्चा प्रति हजार रहा. 2012 में 27320 माताओं का प्रसव हुआ, जिसमें 448 बच्चों की मौत हुई. मृत्यु अनुपात - 55 प्रति हजार. 2013 में 27800 प्रसव हुए, जिसमें 548 बच्चों की मौत हुई. मृत्यु अनुपात- 52 प्रति हजार रहा.

    2014 में 28861 प्रसव हुए, 670 बच्चों की मौत हुई. मृत्यु अनुपात- 50 बच्चा प्रति हजार. 2015 में 26886 माताओं का प्रसव हुआ, 760 बच्चों की मौत हो गई. मृत्यु अनुपात- 51 बच्चा प्रति हजार रहा.

    साल 2016 में अब तक 16026 माताओं का सरकारी अस्पतालों मे प्रसव हुआ, जिसमें 402 नवजात बच्चों की मौत हुई है. यानि की बच्चो की मौत का आंकडा 50 बच्चा प्रति हजार है. लोग और सामाजिक कार्यकर्ता स्वास्थ्य विभाग की बड़ी चूक मान रहे हैं तो विभाग जल्द ही मौत के आकड़े कम होने के दावे कर रहे हैं.

    Tags: Chhattisgarh news

    विज्ञापन

    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज

    अधिक पढ़ें

    अगली ख़बर