छत्तीसगढ़ : 525 लोग हाथ से ढो रहे हैं मैला, HC ने दिया सर्वे कराने का निर्देश

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में दाखिल याचिका में प्रदेश में 525 लोगों द्वारा हाथ से मैला ढोने बात कही गई है. इसपर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश जारी किए हैं.

News18 Chhattisgarh
Updated: July 14, 2019, 7:52 AM IST
छत्तीसगढ़ : 525 लोग हाथ से ढो रहे हैं मैला,  HC ने दिया सर्वे कराने का निर्देश
छत्तीसगढ़ में आज भी 525 लोग हाथ से मैला ढो रहे हैं.
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Updated: July 14, 2019, 7:52 AM IST
देश में स्वच्छ भारत अभियान के जरिए साफ-सफाई पर जोर-शोर से चर्चा हो रही है. इस बीच छत्तीसगढ़ से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है. एक याचिकाकर्ता ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में बताया है कि प्रदेश में आज भी 525 लोग हाथ से मैला ढो रहे हैं. जिस पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को तथ्य के सत्यापन का आदेश दिया है. साथ ही नगरीय प्रशासन विभाग ने राज्य के सभी निकायों से इस पर सर्वे कराकर रिपोर्ट तैयार करने को कहा है. निकायों से ऐसे लोगों से स्व-घोषणा फॉर्म भी भरवाने का निर्देश दिया है.

जानकारी के मुताबिक याचिकाकर्ता ने सरकार पर हाथ से मैला उठाने पर कानून का पालन नहीं करने का आरोप लगाया है. जबकि राज्य सरकार ने अपनी दलील में कहा कि पूरे प्रदेश में सर्वे कराया गया है, हाथों से कचरा उठाने वाले एक भी कर्मचारी नहीं मिले. इस पर याचिकाकर्ता ने माननीय न्यायालय से कहा कि उसने खुद के स्तर पर सर्वे किया है. जिसके आधार पर 525 लोग हाथ से मैला ढो रहे हैं. ऐसे लोगों की सूची याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट को सौंपा है.



याचिकाकर्ता ने सरकार पर हाथ से मैला उठाने पर कानून का पालन नहीं करने का आरोप लगाया है.


इसके बाद 26 जून को हाईकोर्ट ने सरकार को वह सूची सौंपते हुए सत्यापन कराते हुए जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने इसके लिए एक महीने का वक्त दिया है. हाई कोर्ट के इस आदेश के आधार पर नगरीय प्रशासन विभाग ने नौ जुलाई को सभी नगरीय निकायों को वह सूची भेजकर सात दिन में अंदर सर्वे रिपोर्ट मांगा है.

क्या है नियम

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर 2013 में संसद ने देश में हाथ से मैला उठाने की प्रथा पर प्रतिबंध लगाने के लिए कानून पास किया था. नियमों के मुताबिक मैला उठाने वाले लोगों की पहचान करने के लिए सर्वे किया जाना था. सर्वे के बाद इस काम से जुड़े हुए लोगों की सूची प्रकाशित कर दावा-आपत्ति मंगाई जानी थी, इसके बाद उन्हें आर्थिक व सामाजिक रूप से समाज की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए पुनर्वास, आर्थिक मदद आदि की व्यवस्था की जानी थी.

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