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कोरोना से जंग जीतने वाले 68 साल के बुजुर्ग ने कहा- मान गया, डॉक्टर ही भगवान हैं

कोरोना से जंग जीतने वाले 68 साल के बुजुर्ग ने कहा- मान गया, डॉक्टर ही भगवान हैं

सांकेतिक फोटो.

सांकेतिक फोटो.

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायुपर के रामनगर में रहने वाले 68 साल के बुजुर्ग चिकित्सा जगत के लिए केस स्टडी बन गए हैं. क्योंकि वो सबसे कम दिनों में कोरोना पॉजिटिव से नेगेटिव हो गए.

रायपुर. कोरोना वायरस को लेकर पूरी दुनिया में दहशत का माहौल है. हर किसी को एक गहरी आशंका है कि कहीं वो कोरोना पॉज़िटिव हुए तो क्या वो बच पाएंगे. लोगों के इस डर के बीच छत्तीसगढ़ की राजधानी रायुपर में रहने वाले 68 साल के बुजुर्ग चिकित्सा जगत के लिए केस स्टडी बन गए हैं. रायपुर के रामनगर में रहने वाले मध्यम वर्ग के परिवार में रहने वाले इन बुजुर्ग ने सिर्फ कोरोना को हराया. बल्कि इससे लड़ने के लिए लोगों में जज्बा भी दिया. कोविड-19 पॉजिटिव मिलने के महज छह दिनों में डिस्चार्ज हुए इस बुजुर्ग ने बता दिया कि यदि दृढ़ आत्मविश्वास हो और खुद के भीतर लड़ने की क्षमता हो तो जीत मुश्किल नहीं.

रायपुर के रामनगर के 68 वर्षीय इस बुजुर्ग के कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद इस बात की आशंका गहरा गई थी कि क्या छत्तीसगढ़ स्टेज थ्री में पहुंच गया है. क्योंकि इनकी कोई ट्रेवल हिस्ट्री नहीं थी. एम्स के गहन चिकित्सा कोरोना वार्ड से डिस्चार्ज होकर यह व्यक्ति अब निमोरा में आइसोलेशन में हैं. छत्तीसगढ़ में अब तक 9 कोविड-19 संक्रमित मरीज मिले, जिनमें से 3 के इस रोग से मुक्त होने का दावा सरकार ने किया. इनमें से पहला नाम इन 68 साल के बुजुर्ग का ही है, अब तक मिले पॉजिटिव केस में ये सबसे उम्रदराज थे. इसलिए ही इन्हें हाई रिस्क केस माना जा रहा था.

अब क्या कर रहे हैं?
2 अप्रैल की रात के करीब 8 बजे हैं. कोरोना को लेकर रायुपर के निमोरा में जो आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है. इसमें 68 साल के इन बुजुर्ग के रहने की सूचना के बाद न्यूज 18 ने जब कॉल लगाया तब वह खाना खाने बैठे थे. कॉल रिसीव होने होने पर हम कोई परिचय देते उससे पहले ही उधर से आवाज आई मैं खाना खा रहा हूं. मेरी थाली में सोयाबीन की बड़ी, बंदी भाजी, दाल, पापड़, भात रोटी और सलाद है. जब घर में था तब भी मस्त खाता था और अस्पताल में हूं तब भी.

पता ही नहीं कोरोना क्या है?
तबीयत पूछने पर कहते हैं- मेरी तबियत तो एकदम ठीक है. हिंदी और छत्तीसगढ़ी का मिश्रण कर कहते हैं. थोड़ किन सर्दी अऊ खांसी रिहिस. नाक घलो नहीं बहावत रिहिस. अचानक 25 तारीख को 12 बजे अस्पताल से कॉल आया कि तैयार हो जाउं. अचानक इतनी रात को जब मोबाइल की रिंग बजी तब मैं हड़बड़ा गया. उधर से किसी ने कहा कि आपकी तबियत खराब हो गई है मौसम बदलने से. रिपोर्ट आ गई है. हम 108 वाले हैं. साथ में डॉक्टर भी हैं. आप को अस्पताल चलना पड़ेगा. मुझे थोड़ी सर्दी तो थी ही. मैंने कहा कि मुझे कपड़े बदलने दो. उंन्होने कहा कि जल्दी करिये. मैंने मौसम बदलने से होने वाली बीमारी के बारे में सुन रखा था. जब मैंने बताया कि मुझे अस्पताल ले जा रहे हैं. पूरे घर मे कोहराम मच गया. लेकिन सर्दी और बुखार ही तो था. कोरोना वायरस को लेकर उन्हें जानकारी नहीं थी.

अकेले कमरे में कट रही जिंदगी
बुजुर्ग कहते हैं- सब कुछ इतनी हड़बड़ी में हुआ कि समझ ही नहीं पड़ रहा था कि कौन क्या करे. कोई इंतजाम करने की कोशिश कर रहा था तो जिसके पास कोई काम नहीं समझ आ रहा था वो रो रहा था. मैं खुद ही फिर चलकर चौक तक आया. फिर मुझे बताया गया कि मुझे एम्स लेकर जा रहे हैं. 31 मार्च तक मैं एम्स में था. कभी ऐसे अकेले कमरे में नहीं रहा. दिन में कई बार डॉकटर देखने आए.

क्या डर लग रहा था?
उन्होंने कहा- घर परिवार के बीच रबे और अचानक तोला आधा रात के कोई असप्ताल के एक कमरा म पटक दीहि त तोला डर नहीं लागहि. दुनिया भर के बात ह दिमाग म आत रिहिस. लोग लईका ऊपर आफत आगे हे. अईसे लागिस. घर मे 15 झन रिहिस. भगवान के दया से सब ठीक होगिस. 26 से 31 तारीख तक इन छह दिनों तक मैं चुपचाप राम राम जपते बैठा रहता था. चुपचाप मन को शांत किये. मुझे किसी तरह का कोई व्यसन नहीं थी. इसका फायदा हुआ कि कोई तलब भी नहीं उठती थी. जो तकलीफ है उसे तो झेलनी ही पड़ेगी. आप जब स्वीकार कर लेते हैं तब चीजें आसान हो जाती है. मैने सोच लिया था कि जो होगा सो होगा. अब ऊपरवाले की मर्जी.

जो जान बचा दे वो ही भगवान है
अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद निमोरा में एक कमरे में रखा गया है. जब से यहां आया हूं. सूरज उगते या डूबते नहीं देखा है. सूरज ही नहीं देखा है. हां इधर उधर से धूप जरूर दिखाई देती है. सबसे मिलने की इक्छा होती है. किसी से बात नहीं कर सकते. यह नहीं पता कि कब छुट्टी देंगे, लेकिन डॉक्टर की बात माननी चाहिए.  जो जान बचा दे वो ही भगवान है, उसे ही भगवान मान लेना चाहिये. उनकी दया से ही तो बचे हैं. वो दिन रात हमारी सेवा कर रहे हैं. दवाई और इंजेक्शन दे रहे हैं. हमें बचाने के लिए वो बेचारे लड़ रहे हैं.

जय श्री राम गाता रहता हूं
यहां जय श्री राम जय श्री राम गाता रहता हूं, किसे चिल्लायेंगे किसे मारेंगे. ऊपर वाले कि सब मर्जी है,  जो मार सकता है वो दुलार भी कर सकता है. वो डरा भी सकता है. किसी संगी संगवारी का नंबर नहीं रख पाया. फिर जब आया तो फोन के पैसे भी खत्म हो गए थे, चार्जर भी भूल गया था. यहां आने के बाद बेटा चार्जर भी लाकर दिया और फोन में पैसे भी डाल दिये.

..तो पत्नी से ​गले मिलूंगा
बातचती के बीच में ही वे कहते हैं- पत्नी की बहुत याद आती है. इसके पहले वो  कभी गई भी थी तो तीजा गई मायके या फिर रिश्तेदारों के घर गई. पर ऐसे दूर रहना अलग बात है. उसे देख नहीं सकता। मिल नहीं सकता. ऐसा बता रहे हैं कि सब यही हैं, लेकिन डॉक्टरों ने किसी से मिलने से मना किया है तो मिल नहीं सकता. पर अब तो पहले से बिल्कुल ठीक हूं. घर जाते ही सबसे पहले पत्नी से गले मिलूंगा. ऊपर वाला मुझे ठोक बजाकर भेजा था. शुरू से ही स्ट्रांग आदमी हूं. 1952 का जन्म है मेरा.

रिश्तों की अहमियत समझ रहा हूं
जो फोन करे हालचाल जाने इस मुश्किल समय मे वही अपना है. जैसे आपसे इतनी लंबी बात और दिलखोलकर बात कर रहा हूं. इस बीमारी से नए रिश्ते भी बने और घर परिवार और संगी साथी की अहमियत पहले से थी, लेकिन अब और समझ आई है. मेरे दो बेटे और एक बेटी और नाती पोते हैं. याद आता है दादा करके आगे  पीछे घूमते रहते थे.

मुख्यमंत्री से की ये शिकायत
मुख्यमंत्री को संदेश देते हुए शिकायत करते हैं कि मैं गरीब आदमी हूं. सारे टैक्स पटाटा था. फिर भी मेरे नल में पानी नहीं आता था. उसीके लिए मैं नगर निगम के कई बार चक्कर काटा. उस समय कभी तेज धूप रहती थी तो अक्सर तेज बारिश. नगर निगम में भी कभी यहां जा कभी वहां जा कहते थे. 68 साल का बुजुर्ग हूं. इसी दौड़ धूप में बीमारी लग गई होगी. इस समस्या से निजात दिलानी चाहिए, पर मुख्यमंत्री को धन्यवाद भी कहना है. व्यवस्था बने करे हे इलाज के.
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Tags: Chhattisgarh news, Coronavirus in India, COVID 19, Raipur news

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