रायपुर: पुलिस थानों के आड़ में चल रही विज्ञापन की दुकान, जिम्मेदार बेखबर

इस खेल की महकमे के आला अधिकारियों को भनक तक नहीं है.

Surendra Singh | News18 Chhattisgarh
Updated: July 9, 2019, 10:09 AM IST
रायपुर: पुलिस थानों के आड़ में चल रही विज्ञापन की दुकान, जिम्मेदार बेखबर
रायपुर के पुलिस थानों का हाल देखिए.
Surendra Singh | News18 Chhattisgarh
Updated: July 9, 2019, 10:09 AM IST
राजधानी रायपुर के थाने अब केबल वायर से लेकर चादर-तकिया, पर्दे और चश्मे से लेकर जूते और पाइप की दुकान बन गए है. रायपुर के थानों से लेकर एएसपी कार्यालय तक में कई निजी संस्थानों के बड़े-बड़े ग्लो साइन बोर्ड लगे हुए है. राज्य पुलिस फंड से जेब गरम कर विज्ञापन की आड़ में संस्थानों से वसूली हो रही है. लेकिन इस खेल की महकमे के आला अधिकारियों को भनक तक नहीं है.

हालत ये है कि राजधानी रायपुर के थानों की दीवाकें चादर, पर्दे, केबल वायर, पाइप और जूतों के विज्ञापन से सजा दी गई है. शहर के प्राइम लोकेशन में बना कोतवाली थाना भी कई उत्पादों की ब्रांडिंग करते नजर आता है. विज्ञापनों का मायाजाल भी ऐसा कि केवल थाने की पहचान बताने भर के लिए, यहां एक ही थाने में कई ग्लो साइन बोर्ड टंगे हुए नज़र आएंगे. कई थानों का हाल तो ऐसा है जहां विज्ञापन और थानों के नाम का साइज़ भी एक बराबर है.

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रायपुर के एक थाने में लगा विज्ञापन.


क्या फायदा पहुंचाने की हो रही कोशिश

थानों के संचालन के लिए पीएचक्यू जरूरत के मुताबिक फंड मुहैया कराता है. ये राशि संबंधित थाने द्वारा बिल जमा करने के बाद उन्हे मिलती है जिसमें स्टेशनरी, टेलीफोन, बिजली बिल, साफ-सफाई, पेयजल, हवालातियों का आहार भत्ता और वाहन मरम्मत समेत कई खर्चे शामिल है. ये राशि जिला पुलिस अधीक्षकों के जरिए उन्हे दी जाती है. लेकिन यहां थानों के पहचान बोर्ड बनाने का काम निजी कंपनियां कर रही है और हर एक थाने में थोक के भाव में विज्ञापन लगे हुए है.

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पुलिस इन विज्ञापनों को जनसहयोग का नाम दे रही है.


समय-समय पर किसी ब्रांड विशेष के विज्ञापन थानों में चस्पा कर दिए जाते है. ऐसे विशेष ब्रांड के विज्ञापन पूरे शहर भर के थानों में आपको नज़र आएंगे जिसमें कंपनियों को भी बड़ा फायदा होता है, क्योंकि अधिकतर थाने शहर के ऐसे जगहों पर है जहां सबकी नज़र जाती है और पुलिस थानों की आड़ में ये विज्ञापन की दुकान काफी समय से चल रही है. लेकिन आला अधिकारियों को इसकी खबर तक नहीं है. रायपुर एसएसपी आरिफ शेख भी इन विज्ञापनों को जनसहयोग का नाम दे रहे है.
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महापौर ने कही ये बात

ऐसे विज्ञापनों के प्रदर्शन शुल्क वसूली की जिम्मेदारी नगर निगम की होती है लेकिन महापौर प्रमोद दुबे का कहना है कि कोई अपनी मर्जी से थानों का बोर्ड नहीं बनाते. लेकिन आने वाले समय में प्रदर्शन शुल्क भी वसूला जाएगा.

 

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First published: July 9, 2019, 9:22 AM IST
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