विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद अब ‌BJP में नेता प्रतिपक्ष को लेकर जद्दोजहद
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विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद अब ‌BJP में नेता प्रतिपक्ष को लेकर जद्दोजहद
डॉ. रमन सिंह. फाइल फोटो.

पार्टी ऐसे अनुभवी और जुझारू व्यक्ति को नेता प्रतिपक्ष बनाने पर जोर जरूर देगी जो विधानसभा में जनहित से जुड़े मुद्दों को तेज तर्रार तरीके से उठा सके.

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छत्तीसगढ़ में 2018 के चुनाव में 15 सालों में सत्ता पर काबिज बीजेपी को करारी हार झेलनी पड़ी. बीजेपी की सरकार को सत्ता से बाहर करने वाली कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ की 90 विधानसभा में 68 सीटों पर अपनी जीत दर्ज की है. भूपेश बघेल के मुख्यमंत्री बनने के बाद छत्तीसगढ़ में अब कांग्रेस की सरकार बन गई है. विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद अब बीजेपी में हार की समीक्षा का दौर शुरू हो गया है. पार्टी ने छत्तीसगढ़ में आगे की रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है. अब पार्टी के आगे एक और चुनौती है नेता प्रतिपक्ष का चयन करना.

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छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी अब सत्ता से बाहर हो गई है. हार के बाद अब पार्टी में इस बात को लेकर मंथन चल रहा है कि छत्तीसगढ़ विधानसभा में प्रतिपक्ष का नेता कौन होगा. पार्टी ऐसे अनुभवी और जुझारू व्यक्ति को नेता प्रतिपक्ष बनाने पर जोर जरूर देगी जो विधानसभा में जनहित से जुड़े मुद्दों को तेज तर्रार तरीके से उठा सके. छत्तीसगढ़ में भाजपा के इन दिग्गजों का नाम नेता प्रतिपक्ष बनने की फेहरिस्त में शामिल है. ऐसी अटकले लगाई जा रही है कि इनमे से किसी को नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी मिल सकती है.



बृजमोहन अग्रवाल-
इस बार के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के कद्दावर मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने रायपुर के दक्षिण सीट से अपनी जीत दर्ज की थी. इस सीट से बृजमोहन अग्रवाल लगातार जीत हासिल करते आ रहे है. कैबिनेट मंत्री रहे बृजमोहन अग्रवाल को 15 सालों का राजनीतिक अनुभव भी है. 1990 से लेकर अभी तक वे एक बार भी चुनाव हारे नहीं है. इस लिहाज से उनको ये जिम्मेदारी सौंपने का पार्टी फैसला ले सकती है.

अजय चंद्राकर

बीजेपी के तेजतर्रार और कद्दावार मंत्रियों में से एक अजय चंद्राकर के नाम पर भी इस लिस्ट में शामिल है. कुरूद विधानसभा सीट से अजय चंद्राकर ने अपनी जीत हासिल की. छत्तीसगढ़ का एक बड़ा वर्ग ओबीसी वोटर्स का है इस लिहाज से पार्टी उनको ये जिम्मा सौंपने का सोच सकती है. साथ ही अजय चंद्राकर संसदीय कार्य मंत्री भी थे. विधानसभा में एक मुखर वक्ता के तौर पर भी उन्हे जाना जाता है.

डॉ. रमन सिंह

अमूमन राजनीति में ऐसी परंपरा रही है जो मुख्यमंत्री होते है उन्हे पार्टी नेता प्रतिपक्ष नहीं बनाती है. लेकिन खुद डॉ. रमन सिंह ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा है कि उन्हे विधानसभा में अपनी उपस्थिति दर्ज करानी है. डॉ. रमन सिंह के पास राजनीति से लेकर सदन का लंबा अनुभव भी है. पार्टी इनके नाम पर भी विचार कर सकती है.

क्या हो सकती है बीजेपी की रणनीति

विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद अब बीजेपी नेता प्रतिपक्ष के लिए एक अनुभवी नाम पर ही मुहर लगाएगी. जाहिर सी बात है अब भाजपा ऐसा चेहरा चुनेगी जो सदन में भाजपा के 15 सालों की उपलब्धियों रखे और कांग्रेस सरकार की नीतियों का विरोध कर सके. भाजपा अब ऐसा नेता चुनने की जुगत करगे जो सबको साथ लेकर चले और छत्तीसगढ़ में बनी नई सरकार पर हमला भी कर सके.

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छत्तीसगढ़ में मिली करारी हार के बाद अब भाजपा लोकसभा चुनाव में जीत की जमीन को तैयार किया करने में भी लगी गई है. जीत के बाद कांग्रेस ने ओबीसी वर्ग के नेता भूपेश बघेल को मुख्यमंत्री बनाया है. भाजपा भी अब इस वोट बैंक को साधने के लिए ओबीसी नेता को नेता प्रतिपक्ष बना सकती है. इस लिहाज से विधायक अजय चंद्राकर के नाम पर पार्टी विचार कर सकती है.

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भाजपा विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद अब कोई ऐसी भूल नहीं करना चाहेगी जिसका सीधा असर लोकसभा चुनाव पर पड़े. इस लिहाज से पार्टी अपना नेता प्रतिपक्ष एक वरिष्ठ और अनुभवी चेहरे को चुनने की कोशिश करेगी. इस लिहाज से बृजमोहन अग्रवाल को भाजपा नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी दे सकती है. बता दें कि छत्तीसगढ़ राज्य गठन के वक्त भी बृजमोहन अग्रवाल नेता प्रतिपक्ष के दावेदार थे. कुल मिलाकर भाजपा ऐसे नाम पर ही मुहर लगाएगी जिससे लोकसभा चुनाव के वोट बैंक को साधा जा सके.

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