जीत के बाद अब छत्तीसगढ़ से कौन सा चेहरा होगा 'टीम मोदी' में शामिल?

पीएम नरेंद्र मोदी.

2014 में सांसदों की कार्यक्षमता के साथ प्रोफेशन और पॉलिटिकल परफार्मेंस के आधार पर मंत्री मंडल में जगह मिली थी. लेकिन इसमे छत्तीसगढ़ के सांसद पिछड़ गए थे.

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लोकसभा चुनाव के नतीजे आते ही छत्तीसगढ़ में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि आखिर प्रदेश से किस नेता को केन्द्र में नेतृत्व का मौका मिलेगा. जीतने वाले सभी सांसद दिल्ली के लिए रवाना हो चुके हैं. वहीं राज्यसभा सांसदों को भी हाईकमान से पहले ही बुलावा आ चुका है. माना जा रहा है इन्ही में से ही कोई चेहरा मोदी मंत्री मंडल में शामिल हो सकता है.

लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद अब बीजेपी में इस बात की चर्चा है कि जीतने वाले किस बीजेपी सांसद को केन्द्रीय कैबिनेट में जगह मिलेगी. इस बार सभी सीटिंग सांसदों की टिकट काटकर नए चेहरों को मैदान में उतारा गया और प्रदेश से 9 प्रत्याशी जीतकर आए. सभी 9 नवनिर्वाचित सांसद दिल्ली रवाना हो गए हैं. वहीं राज्यसभा सांसद रामविचार नेताम को पहले ही दिल्ली से बुलावा आ चुका है. इसके अलावा सरोज पाण्डेय पहले ही दिल्ली में मौजूद हैं.

मालूम हो कि साल 2014 में सांसदों की कार्यक्षमता के साथ प्रोफेशन और पॉलिटिकल परफार्मेंस के आधार पर मंत्री मंडल में जगह मिली थी. लेकिन इसमे छत्तीसगढ़ के सांसद पिछड़ गए थे. केवल विष्णुदेव साय को ही केन्द्रीय राज्यमंत्री का दर्जा मिल पाया था. लेकिन इस बार सभी चेहरे नए हैं और पहली बार लोकसभा जाने वाले सांसदों को भी केन्द्र में नेतृत्व मिलने की उम्मीद बंधी हुई है.. वहीं राज्यसभा सांसदों का भी नाम आगे चल रहा है.

इन नामों की हो रही चर्चा

सरोज पाण्डेय- छत्तीसगढ़ कोटे से राज्यसभा पहुंची सांसद सरोज पांडेय को अब टीम मोदी में शामिल होने की उम्मीद है. डॉ. सरोज पांडेय एक साथ महापौर, विधायक और सांसद रह चुकी हैं. उनका ये रिकॉर्ड गिनीज और लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में भी दर्ज है. 10 साल तक लगातार बेस्ट मेयर का अवॉर्ड से सम्मानित किया गया. 2009 में उन्हें महापौर रहते हुए आम चुनाव में विधायक और दुर्ग सीट से लोकसभा उम्मीदवार के तौर पर खड़ा कर दिया, जिसमें भारी मतों से जीत हासिल की.

उसी समय उनका कद बढ़ा और पार्टी ने उन्हे उन्हें राष्ट्रीय महिला मोर्चा का अध्यक्ष बनाया. हालांकि 2014 में हुए आम चुनाव में मोदी लहर होने के बावजूद हार का सामना करना पड़ा. छत्तीसगढ़ से इकलौती बीजेपी कैंडिडेट थीं, जिन्हें हार मिली. लेकिन बीजेपी ने उन्हे महाराष्ट्र का प्रभारी और राज्यसभा कोटे से सांसद बनाया. ऐसे में अगर महिला मंत्री बनाने की संभावना बनती है, तो सरोज प्रबल दावेदारों में से एक हो सकती हैं.

रामविचार नेताम- अगर मोदी कैबिनेट में आदिवासी चेहरे को तरजीह दी जाती है तो पहला नाम रामविचार नेताम का हो सकता है. पांच बार विधायक रहे रामविचार नेताम प्रदेश में रमन कैबिनेट का भी हिस्सा रह चुके है. लेकिन इस बार विधानसभा चुनाव में रामविचार नेताम की जगह उनकी पत्नी पुष्पादेवी नेता चुनाव में खड़ी थी जिन्हे हार का सामना करना पड़ा. बावजूद इसके बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की टीम में उनको सचिव बनाकर राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति मोर्चा का प्रभारी बनाया गया है. साथ ही भाजपा ने उन्हे राज्यसभा भी भेजा है.

विजय बघेल- प्रदेश के मुख्यमंत्री और गृहमंत्री के क्षेत्र में बीजेपी के विजय बघेल ने 3 लाख 91 हजार से ज्यादा मतों से बाजी मारी है. इस सीट पर वर्ष 2014 में प्रदेश के एक मात्र ताम्रध्वज साहू ने चुनाव जीता था. तब मोदी लहर में प्रदेश की 10 सीटों पर भाजपा का कब्जा हो गया था. इस बार यहीं सीट कांग्रेस पार्टी के हाथ से सरक गई. प्रदेश की सबसे हाई प्रोफाइल संसदीय क्षेत्र में से एक दुर्ग पर सबकी निगाहें टिकी थीं. क्योंकि माना जा रहा है कि यहां से कांग्रेस प्रत्याशी से ज्यादा राज्य सरकार की साख दांव पर लगी थी. ऐसे में जीत का अनुभव बघेल को मिल सकता है. साथ ही कांग्रेस द्वारा प्रदेश की पहली छत्तीसगढ़िया सरकार बताने के दावे के सामने बीजेपी की तरफ से भी ठेठ छत्तीसगढ़िया चेहरा हो सकता है.

इन तीन नामों के अलावा पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह का भी नाम केन्द्रीय नेतृत्व के लिए चल रहा था लेकिन उन्होने ये साफ किया है कि केन्द्र में छत्तीसगढ़ से प्रतिनिधित्व का फैसला पीएम नरेन्द्र मोदी लेंगे. वहीं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के नाते उन्होने अपनी जिम्मेदारी केन्द्रीय स्तर में सम्भालने की बात कही.

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में भी प्रदेश से दो मंत्री डॉ. रमन सिंह और रमेश बैस थे। दिलीप सिंह जूदेव को भी केंद्र में मंत्री बनाया गया था। इसके बाद केंद्र में दस साल यूपीए की सरकार में सिर्फ डॉ. चरणदास महंत को ही मंत्री बनने का मौका मिला. केन्द्र में नेतृत्व को लेकर कांग्रेस संचार विभाग प्रमुख शैलेष नितिन त्रिवेदी का कहना है कि भले ही उनकी सरकार नहीं बनी है लेकिन छत्तीसगढ़ को केन्द्र में नेतृत्व मिलने की उम्मीद जरूर है.

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