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रायपुर एम्स में जीनोम सिक्वेंसिंग की जांच के लिए लैब मौजूद, पर टेस्टिंग किट नहीं

रायपुर एम्स में जीनोम सिक्वेंसिंग की जांच के लिए लैब मौजूद, पर टेस्टिंग किट नहीं

राज्य के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा कि टेस्टिंग किट पर्याप्त मात्रा में मुहैया कराने की मांग केंद्र सरकार से कर रखी है. (सांकेतिक फोटो)

राज्य के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा कि टेस्टिंग किट पर्याप्त मात्रा में मुहैया कराने की मांग केंद्र सरकार से कर रखी है. (सांकेतिक फोटो)

छत्तीसगढ़ फिलहाल जीनोम सिक्वेंसिंग की जांच ओडिशा से करवा रहा. नतीजा है कि रिपोर्ट मिलने में 3 से 4 महीने लग जाते हैं. अगर टिस्टिंग किट केंद्र से पर्याप्त मात्रा में मिले तो छत्तीसगढ़ में ही हो सकती है जांच और रिपोर्ट महज 7 दिन में मिल जाएगी.

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रायपुर. छत्तीसगढ़ के AIIMS रायपुर में जीनोम सिक्वेंसिंग की जांच के लिए लैब है, मगर टेस्टिंग किट पर्याप्त नहीं है. टेस्ट के लिए राज्य के पास अपना आधरभूत ढांचा होने के बाद भी जीनोम सिक्वेंसिंग की जांच के लिए राज्य सरकार को ओडिशा पर निर्भर रहना पड़ता है. कोरोना संकट की वजह से BSL 3 की एक और लैब शुरू करने की मंजूरी का इंतजार भी है.

ओडिशा पर निर्भरता

राज्य के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा कि केंद्र सरकार के संपर्क में राज्य सरकार है. टेस्टिंग किट पर्याप्त मात्रा में मुहैया कराने की मांग भी केंद्र सरकार से कर रखी है. उन्होंने बताया कि AIIMS रायपुर के पास जरूरत के मुताबिक टेस्टिंग किट नहीं होने की वजह से ओडिशा के भुवनेश्वर में जीनोम सिक्वेंसिंग की जांच कराई जाती है. नतीजा है कि टेस्ट की रिपोर्ट तकरीबन 4 महीने बाद हमें मिल पाती है. इतने समय में परिस्थितियां बदल जाती हैं.

टेस्टिंग किट हो तो बदल जाएगा नजारा

कोरोना के नए नए वेरिएंट देश के अलग-अलग राज्यों में मिल रहे हैं. एक लैब होने बावजूद छत्तीसगढ़ सरकार बेबस क्यों है, इस पर स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि टेस्टिंग किट पर्याप्त मात्रा में अगर मिल जाए तो जीनोम सिक्वेंसिंग की टेस्ट रिपोर्ट एक से दो हफ्ते में आ सकती है और परिस्थितियां भी बदल सकती हैं.

BSL 3 लैब की मंजूरी का इंतजार

उन्होंने बताया कि कोरोना संकट को देखते हुए एक और लैब BSL 3 शुरू करने की मंजूरी का इंतजार कर रहे है. लैब की मंजूरी मिलते ही उसे शुरू कर दिया जाएगा. टीएस सिंहदेव ने कहा कि AIIMS रायपुर के साथ राज्य सरकार के बहुत अच्छे संबंध भी हैं. अस्पताल के पास टेस्टिंग किट अगर जरूरत के हिसाब से होगी तो हम ज्यादा टेस्ट भी कर पाएंगे.

जांच रिपोर्ट में देरी से राज्य को नुकसान

AIIMS रायपुर पर भेदभाव के आरोप का बचाव करते हुए टीएस सिंहदेव ने कहा कि जानबूझकर कोई किसी के जीवन से खिलवाड़ नहीं करता है. फिर भी यह देखने की बात है कि जब लैब में टेस्टिंग किट नहीं होगी, तो कैसे कोई टेस्ट कर सकता है. उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार के निर्देश पर जीनोम सिक्वेंसिंग की जांच कराने के लिए दूसरे स्थानों पर भेजते हैं. इसका कोई फायदा राज्य को नहीं होता है, क्योंकि टेस्ट रिपोर्ट आने 3 से 4 महीने लग जाते हैं. उन्होंने कहा कि कोरोना के किसी नए वेरिएंट की जानकारी चार महीने बाद मिलेगी तो राज्य सरकार क्या करेगी, तब तक उस वेरिएंट का असर फैल चुका होता है.

Tags: AIIMS, Genome Sequencing, Raipur news

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