लाल डायरी में छुपे हैं कथित 36 हजार करोड़ के नान घोटाले के राज, SIT जांच में सामने आएगा सच?

आरोप है कि छत्तीसगढ़ में राइस मिलरों से लाखों क्विंटल घटिया चावल लिया गया और इसके बदले करोड़ों रुपये की रिश्वतखोरी की गई. इसी तरह नागरिक आपूर्ति निगम के ट्रांसपोर्टेशन में भी भारी घोटाला किया गया.

निलेश त्रिपाठी | News18Hindi
Updated: January 2, 2019, 3:36 PM IST
लाल डायरी में छुपे हैं कथित 36 हजार करोड़ के नान घोटाले के राज, SIT जांच में सामने आएगा सच?
आरोप है कि छत्तीसगढ़ में राइस मिलरों से लाखों क्विंटल घटिया चावल लिया गया और इसके बदले करोड़ों रुपये की रिश्वतखोरी की गई. इसी तरह नागरिक आपूर्ति निगम के ट्रांसपोर्टेशन में भी भारी घोटाला किया गया.
निलेश त्रिपाठी | News18Hindi
Updated: January 2, 2019, 3:36 PM IST
12 फरवरी 2015 को छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक व राजनीतिक ​गलियारों में भूचाल मच गया. इसी दिन एंटी करप्शन ब्यूरो और आर्थिक अपराध शाखा ने प्रदेश में नागरिक आपूर्ति निगम (नान) के अधिकारियों और कर्मचारियों के 28 ठिकानों पर एक साथ छापा मारा. इस कार्रवाई में करोड़ों रुपयों के साथ ही भ्रष्टाचार से संबंधित कई दस्तावेज़, हार्ड डिस्क और डायरी भी जब्त की गई थी. इस कार्रवाई ने भ्रष्टाचार की नई पोल खोल दी. तब विपक्ष में रही कांग्रेस ने इस मामले को लेकर हर मोर्चे पर सत्ता पक्ष भाजपा को घेरा.

छत्तीसगढ़ में करीब तीन साल पहले सामने आए भ्रष्टाचार के इस मामले में अब नया मोड़ आ गया है. तब विपक्ष में रही कांग्रेस अब सत्ता में है. नई सरकार ने कथित रूप से 36 करोड़ रुपये के इस घोटाले में एसआईटी जांच के निर्देश दिए हैं. आईजी स्तर के अधिकारी इस मामले की जांच करेंगे. अटकलें लगाई जा रही हैं कि यदि मामले में गंभीरता से जांच हुई तो प्रदेश के कई दिग्गज इसकी जद में आएंगे. सवाल भी हो रहे हैं कि क्या एसआईटी जांच में इस बड़े घोटाले का सच सामने आएगा.

क्या है नान घोटाला?
आरोप है कि छत्तीसगढ़ में राइस मिलरों से लाखों क्विंटल घटिया चावल लिया गया और इसके बदले करोड़ों रुपये की रिश्वतखोरी की गई. इसी तरह नागरिक आपूर्ति निगम के ट्रांसपोर्टेशन में भी भारी घोटाला किया गया. इस मामले में 27 लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज़ किया गया था. जिनमें से 16 के ख़िलाफ़ 15 जून 2015 को अभियोग पत्र पेश किया गया था. जबकि मामले में दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारी डॉ. आलोक शुक्ला और अनिल टूटेजा के ख़िलाफ़ कार्रवाई की अनुमति के लिये केन्द्र सरकार को चिट्ठी लिखी गई.

अधिकारियों को बचाने की कोशिश?
मामले में आरोपी दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारी डॉ. आलोक शुक्ला और अनिल टूटेजा के ख़िलाफ़ 4 जुलाई 2016 को केन्द्र सरकार ने अनुमति भी दे दी, लेकिन तात्कालीन राज्य सरकार ने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की. लगभग ढ़ाई साल बाद इन दोनों अधिकारियों के ख़िलाफ़ पिछले महीने की 5 तारीख़ को पूरक चालान पेश किया गया है.

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पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह. फाइल फोटो.

लाल डायरी के पन्नों में छुपे हैं राज!
कांग्रेस का आरोप है कि इस मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो और आर्थिक अपराध शाखा ने आरोपियों से एक डायरी भी बरामद की थी, जिसमें 'सीएम मैडम' समेत तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के कई परिजनों के नाम कथित रुप से रिश्वत पाने वालों के तौर पर दर्ज़ थे. आरोप है कि इस कथित डायरी के 107 पन्नों में विस्तार से सारा कथित लेन-देन दर्ज़ था, लेकिन एंटी करप्शन ब्यूरो और आर्थिक अपराध शाखा ने इस डायरी के केवल 6 पन्नों का सुविधानुसार उपयोग किया. आशंका जताई जा रही है डायरी के 107 पन्नों में पूरे घोटाले के राज छुपे हैं.

क्या गंभीरता से हुई जांच?
कथित घोटाला सामने आने के बाद एंटी करप्शन ब्यूरो के तत्कालीन मुखिया मुकेश गुप्ता ने सार्वजनिक तौर पर इस मामले को लेकर गंभीर बायान दिया था. मुकेश गुप्ता ने स्वीकार किया था कि इस घोटाले के तार जहां तक जुड़े हैं, वहां जांच कर पाना संभव नहीं है. कांग्रेस पार्टी ने भी आरोप लगाया था कि एंटी करप्शन ब्यूरो और आर्थिक अपराध शाखा मुख्यमंत्री के ही अधीन है, इसलिए मामले की निष्पक्ष जांच संभव नहीं है. कांग्रेस पार्टी इस मामले की हाईकोर्ट की निगरानी में जांच की मांग करती रही लेकिन सरकार ने इस मांग अनसुनी कर दी. ऐसे में लगातार सवाल उठते रहे हैं कि क्या तत्कालीन सरकार द्वारा मामले में गंभीरता से जांच कराई गई?

तत्कालीन सरकार ने इस तरह खींचा हाथ
हजारों करोड़ रुपये के जिस कथित घोटाला मामले में राज्य सरकार की ही एजेंसियों ने छापामारी की. इसके बाद जांच कर मामले को उजागर करने का काम किया. कुछ अधिकारियों को गिरफ़्तार कर जेल भेजा, अधिकारियों-कर्मचारियों से करोड़ों की अनुपातहीन संपत्ति और नग़द रक़म जब्त की. उसी मामले में तत्कालीन भाजपा सरकार ने विधानसभा और हाई कोर्ट में ऐसा कोई घोटाला होने से ही इनकार कर दिया. राज्य सरकार ने शपथ पत्र दे कर हाई कोर्ट में कहा कि इस तरह का कोई घोटाला नहीं हुआ है. हालांकि सबूतों और मामले की गंभीरता को देखते हुए गिरफ़्तार किये गये कई अधिकारियों को सालों तक ज़मानत नहीं मिली. हाई कोर्ट ने इसे गंभीर और राष्ट्रीय स्तर के घोटाले की संज्ञा दी.

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First published: January 2, 2019, 3:32 PM IST
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