ANALYSIS: छत्तीसगढ़ चुनाव में हकीकत के कितने करीब होता है एक्जिट पोल

कई बार एक्जिट पोल और वास्तविक नतीजों में काफी अंतर होता है, लेकिन ऐसे भी उदाहरण सामने हैं, जिसमें इस तरह के पोल वास्तविक नतीजों के काफी करीब रहे हैं.

News18 Chhattisgarh
Updated: December 7, 2018, 6:57 PM IST
ANALYSIS: छत्तीसगढ़ चुनाव में हकीकत के कितने करीब होता है एक्जिट पोल
Chhattisgarh Assembly ELection- 2018
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Updated: December 7, 2018, 6:57 PM IST
धनवेन्द्र जायसवाल.

राजस्थान और तेलंगाना में मतदान संपन्न होते ही भारत निर्वाचन आयोग की तरफ से एक्जिट पोल पर लगाई गई बंदिश खत्म हो गई है. इसके साथ ही जनादेश को लेकर किए गए सर्वे के नतीजे आ गए है. कोई कांग्रेस तो कोई भाजपा की सरकार बनाने का अनुमान लगा रहे है. कुछ सर्वे एजेंसी और चैनल त्रिशंकु की सरकार बनाने की भी गुंजाइश बता रहे है. देखना ये होगा कि आने वाले एक्जिट पोल के आंकड़े 11 दिसंबर को आने वाले वास्तविक नतीजों के कितना करीब होता है.

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देश की कई एजेंसी और न्यूज चैनल इस तरह के सर्वे करते हैं. मतदान करके निकलने वालों से ये पूछकर कि, उसने किसको वोट दिया है, और जो जवाब मिलता है, उसकी समीक्षा करके दलों को मिलने वाली सीटों का अनुमान लगाया जाता है. हालांकि कई बार एक्जिट पोल और वास्तविक नतीजों में काफी अंतर होता है, लेकिन ऐसे भी उदाहरण सामने हैं, जिसमें इस तरह के पोल वास्तविक नतीजों के काफी करीब रहे हैं.

छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव 2018 दो चरण में पूरा हुआ. पहले चरण में 18 सीटों पर 11 नवंबर को मतदान हुआ, जिसमें 190 उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे. इसी तरह दूसरे चरण में 72 सीटों पर 20 नवंबर 2018 को वोटिंग हुई, जिसमें 1079 उम्मीदवारों ने भाग्य आजमाया है. इस तरह 90 सीटों पर 1069 प्रत्याशियों ने भाग्य आजमाया है. राज्य के चुनाव में 65 राजनीतिक दलों के उम्मीदवार मैदान में हैं. इस पर कई एजेंसियों और मीडिया समूहों ने एक्जिट पोल कराया है, जो सामने भी आ गए हैं.



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2013 में कितने सटीक थे एक्जिट पोल
बता दें कि साल 2013 के चुनाव के वास्तविक नतीजे जो आए, उसमें भाजपा को 49, कांग्रेस को 39, बसपा को एक और निर्दलीय एक सीट पर जीतने में कामयाब रहे. चुनाव से पहले जिस तरह की भविष्यवाणियां की गई थीं, उनमें सीएनएन आईबीएन ने भाजपा को 50, कांग्रेस को 36 और अन्य को 4 सीटें दी थी. चाणक्य ने भाजपा को 46, कांग्रेस को 42 और अन्य को 2 सीटें दी थी. सी वोटर-इंडिया टीवी ने भाजपा को 47, कांग्रेस को 40 अन्य को दो सीटें मिलने का दावा किया था. एनडब्ल्यूएस-सी वोटर ने भाजपा को 44, कांग्रेस को 41 और अन्य को 5 सीटें मिलने का दावा किया था. एबीपी नीलसन ने भाजपा को 60, कांग्रेस को 27 और अन्य को 3 सीटें दी थीं.

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क्या है एक्जिट पोल का इतिहास?
एक्जिट पोल की शुरुआत नीदरलैंड से हुई थी. वहां के एक समाजशास्त्री मार्शेल वान डैम ने वहां हुए चुनाव को लेकर 15 फरवरी 1967 को पहली बार एक्जिट पोल के नतीजे जारी किए थे. इसके बाद ये दुनियाभर में काफी लोकप्रिय हुआ. बाद में इसके कुछ दुष्प्रभाव भी सामने आए, जिसकी वजह से कई देशों में इस पर बंदिश लगा दी गई है, जबकि भारत समेत कई देशों में इसे कुछ शर्तों के साथ अनुमति दी गई है. हालांकि भारत में भी इस पर बंदिश लगाने की मांग उठती रही है और ये मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचा. अब नई व्यवस्था ये है कि जहां चुनाव हो रहे हैं, उन सभी स्थानों पर मतदान पूरा होने के बाद ही इस तरह के पोल के नतीजे दिखाए जा सकते हैं, ताकि इसके आधार पर मतदाता प्रभावित ना हों.

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ओपिनियन पोल से कैसे अलग है एक्जिट पोल
देश में ओपनियिन पोल भी दिखाए जाते हैं, ये मतदान के पूर्व लोगों की राय पर आधारित होता है. इसमें चुनाव की घोषणा के बाद वोटरों से पूछा जाता है कि आप कौन सी पार्टी को वोट देंगे. इस सर्वे में मुख्य रूप से सैंपल साइज पर जोर होता है. जिस सर्वे का जितना बड़ा सैंपल साइज होता है, उसके नतीजे उतने सही होने के करीब होते हैं. जबकि एक्जिट पोल मतदान के दौरान और बाद में हुए सर्वे के आधार पर होता है.

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