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Modi Cabinet Expansion: क्‍या मोदी कैबिनेट में चमकेगी छत्तीसगढ़ की किस्‍मत, मंत्री बनने की रेस में हैं ये तीन नाम

पीएम नरेंद्र मोदी की कैबिनेट का आज शाम छह बजे विस्‍तार होगा.

पीएम नरेंद्र मोदी की कैबिनेट का आज शाम छह बजे विस्‍तार होगा.

Chhattisgarh News: मोदी कैबिनेट में जगह बनाने की रेस में छत्तीसगढ़ से सांसद अरुण साव (Arun Sao),राज्यसभा सांसद डॉ. सरोज पांडेय और दुर्ग सांसद विजय बघेल का नाम शामिल है. जानें इनके बारे में सबकुछ.

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रायपुर. पीएम नरेंद्र मोदी की कैबिनेट (PM Narendra Modi Cabinet) का आज शाम विस्तार होने जा रहा है. इसको लेकर छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के नौ लोकसभा और दो राज्यसभा सांसद सहित प्रदेश बीजेपी इस उम्मीद से बैठी है कि अंत समय तक भी उनको फोन आए और वे केंद्रीय मंत्रिमंडल का हिस्सा बनें. हालांकि सरगुजा सांसद रेणुका सिंह मौजूदा मोदी कैबिनेट में पहले से ही शामिल हैं. वैसे तो छत्तीसगढ़ की कुल 16 लोकसभा में से 11 सीटों पर बीजेपी का कब्जा है, लेकिन केंद्रीय मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व केवल एक का ही है. ऐसे में तीन-चार नामों पर लगातार चर्चा हो रही है जिन्हें केंद्र में शामिल किया जा सकता है.

मोदी कैबिनेट में जगह पाने वालों की रेस में सबसे आगे राज्यसभा सांसद डॉ. सरोज पांडेय, बिलासपुर सांसद अरुण साव (Arun Sao) और दुर्ग सांसद विजय बघेल के नामों की चर्चा है.

डॉ. सरोज पांडेय- राज्यसभा सांसद
अविभाजित मध्य प्रदेश के दुर्ग नगर निगम में साल 1999 में डॉ. सरोज पांडेय का नाम उस वक्त चर्चाओं में आया जब वो छात्र विंग की राजनीति से दुर्ग नगर की पहली निर्वाचित महापौर बनने में कामयाब रहीं. उस वक्त तक दुर्ग नगर निगम में कांग्रेस का एकतरफा दबदबा था, मगर वह सबसे कम उम्र की महपौर होने के साथ ही दुर्ग नगर निगम की पहली महिला महापौर बनने में कामयाब रहीं. मध्य प्रदेश से छत्तीसगढ़ अगल होने के बाद 2004 में हुई पहली नगरीय निकाय चुनाव में भी सरोज पांडेय दुर्ग नगर निगम में महापौर बनीं.

महापौर से विधायक और फिर सांसद
परिसीमन के बाद साल 2008 में अस्तित्व में आई वैशाली नगर विधानसभा सीट से सरोज पांडेय चुनाव लड़ी और कांग्रेस के दिग्गज नेता बृजमोहन सिंह को हराकर पहली बार विधानसभा तक पहुंची. इस दौरान महापौर भी रहीं. वहीं, साल 2009 में बीजेपी ने मौजूदा महापौर और विधायक सरोज पांडेय को दुर्ग लोकसभा का उम्मीदवार बनाया और वह यहां भी जीत हासिल करने में कामयाब रहीं.

गिनीज और लिम्का बुक में रिकार्ड दर्ज
छात्र राजनीति से ही अपना लोहा मनवा चुकी डॉ. सरोज पांडेय का नाम एक ही समय पर महापौर, विधायक और सांसद रहने का गिनीज और लिम्का बुक में दर्ज है.

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राज्यसभा सांसद डॉ. सरोज पांडेय, बिलासपुर सांसद अरुण साव और दुर्ग सांसद विजय बघेल बीजेपी के दिग्‍गज नेता हैं


2014 में हार, तो 2018 में राज्यसभा सांसद
साल 2014 में मोदी लहर के बाद भी डॉ. सरोज पांडेय दुर्ग लोकसभा सीट से चुनाव हार गईं. उस चुनाव में वह बीजेपी की एक मात्र प्रत्याशी रहीं, जिन्‍हें हार मिली. करीब चार साल के बाद बीजेपी ने साल 2018 में उन्हे राज्यसभा का प्रत्याशी बनाया और वहां जीत दर्ज करने में कामयाब रहते हुए राज्यसभा तक पहुंची. जब साल 2014 में सरोज पांडेय लोकसभा का चुनाव हार गई तब ऐसा लगा की मानों इनका राजनीति करियर खत्म हो गया हो, मगर राष्ट्रीय स्तर पर उनकी धाक तेजी से बढ़ी और बीजेपी महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष बनीं. साथ ही बीजेपी की राष्ट्रीय महामंत्री भी रहीं और महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्य की प्रभारी बनीं.

अरुण साव- बिलासपुर लोकसभा से सांसद
विद्यार्थी परिषद से छात्र राजनीति की शुरुआत करने वाले अरुण साव बेहद की संघर्षशील और राजनीतिक नेता माने जाते हैं. वैसे तो इनका प्रोफाइल ज्यादा बड़ा नहीं है, मगर बीजेपी के प्रति सच्ची श्रद्धा और लगन की ही देन रही है. साल 2019 में उन्हें बिलासपुर लोकसभा प्रत्याशी बनाया गया और वे जीत कर दिल्ली तक पहुंचने में कामयाब रहें.

राजनीतिक सफर
छात्र जीवन से ही राजनीति और सामाजिक कार्यों की शुरुआत करने वाले अरुण साव विद्यार्थी परिषद में विभाग प्रमुख और जिला संयोजक भी रहे. युवा मोर्चा के प्रदेश महामंत्री के पद पर भी रहे, लेकिन कभी भी अपने समाजिक कार्य और वकालत के पेशे को नहीं छोड़ा.

2004 में बने सरकार वकील, तो 2019 में सांसद
साल 2003 में छत्तीसगढ़ में बीजेपी की सरकार बनने के बाद उन्हें साल 2004 में सरकारी वकील बनाया गया. साथ ही डिप्टी एडवोकेट जनरल की भी बड़ी जिम्मेदारी दी गई थी. जबकि बिना लाइम लाइट में आए संघर्ष ही जीवन को आत्मसाध करने वाले साव को साल 2019 में बिलासपुर लोकसभा सीट से प्रत्याशी बनाया गया. 15 सालों बाद छत्तीसगढ़ में सत्ता परिवर्तन में अहम योगदान निभाने वाले और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेहद करीबी अटल श्रीवास्तव को कांग्रेस ने टिकट दिया, लेकिन अपनी सादगी और सौम्यता के कारण साव जीतने में कामयाब रहे.

विजय बघेल- दुर्ग लोकसभा से सांसद
छात्र और समाजिक नेता के रूप में तेज तर्रा छवि वाले विजय बघेल उस वक्त सक्रिय राजनीति के केंद्र बिन्दु बने जब साल 2000 में पहली बार निर्दलीय पार्षद के रूप में चुने गए, तब से लेकर अब तक कई राजनीतिक उतार चढ़ाव झेलने के बाद करीब चार लाख मतों से जीत हासिल कर दुर्ग लोकसभा के सांसद बने.

राजनीतिक सफर
साल 2000 में निर्दलीय पार्षद बनने के बाद राजनीति दलों ने उन्हें साधने की कोशिश की और अंतत: बीजपी से वैचारिक मेल होने के बाद बीजेपी के हो लिए. साल 2003 में छत्तीसगढ़ में हुए पहले विधानसभा चुनाव में जोगी सरकार के तेज तर्रार मंत्री और वर्तमान में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के खिलाफ पाटन विधानसभा से चुनाव लड़े मगर हार गए, साल 2008 में बीजेपी ने एक बार फिर पाटल विधानसभा से ही मौका दिया और इस बार वे जीत दर्ज करने में कामयाब रहे. भूपेश बघेल को हरा कर विधानसभा में पहुंचने का बीजेपी ने इनाम भी दिया और गृह विभाग के संसदीय सचिव भी बनाए गए. मगर साल 2013 में एक बार फिर अपने चिर प्रतिद्वंधी भूपेश बघेल से चुनाव हार गए. जबकि साल 2018 में विधानसभा में टिकट से वंचित विजय बघेल को पार्टी ने साल 2019 में लोकसभा का प्रत्याशी बनाया और वे करीब चार लाख मतों से जीत दर्ज करने में कामयाब रहे.

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