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'आदिवासियों के हित में जितना जरूरी था, उतना काम नहीं कर पाई सरकार'

Prakash Chandra Hota | News18 Chhattisgarh
Updated: August 9, 2018, 10:44 AM IST
'आदिवासियों के हित में जितना जरूरी था, उतना काम नहीं कर पाई सरकार'
Demo Pic.

आदिवासियों की बाहुल्यता वाले छत्तीसगढ़ राज्य में आज भी आदिवासियो की स्थिति को लेकर मतांतर है.

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आदिवासी बाहुल्य छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के इंडोर स्टेडियम में आदिवासी दिवस पर वृहद आदिवासी सम्मेलन का आयोजन किया गया है. आदिवासियों की बाहुल्यता वाले इस राज्य में आज भी आदिवासियो की स्थिति को लेकर मतांतर है. राजनीतिक दल भले ही इसका लाभ लेने की सोच रखतें हों, मगर जानकार मानतें है कि आज भी अनुसूचित जनजाति वर्ग के हितों में बेहतर कार्य करनें की आवश्यकता है.

छत्तीसगढ़ प्रदेश में अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोगो पूरी तरह वनों पर निर्भर है. जानकार मानते है कि आज भी इस समुदाय के लिए कार्य करनें की आवश्यकता है. वरिष्ठ पत्रकार रवि भोई का कहना है कि बीते 18 साल में ऐसा नहीं है कि सरकार ने आदिवासियों के लिए काम नहीं किया, लेकिन काम जितना होना चाहिए, उतना नहीं हुआ. आज भी सुदूर इलाकों में शिक्षा व स्वास्थ्य की सुविधा पूरी तरह से उपलब्ध नहीं है. कई ऐसे इलाके हैं, जहां किसी के बीमार पड़ने पर उसे खांट पर उठाकर अस्पताल लाना पड़ता है. कई इलाकों में सड़कें नहीं हैं.

दूसरी ओर प्रदेश के अनुसूचित जनजाति वर्ग के हितो को लेकर कांग्रेस ने भाजपा पर कड़ा प्रहार करते हुए सरकार को हर मोर्च पर असफल बताया है. कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि भाजपा सरकार आने के बाद इनके हितों पर कुठाराघात हुआ है. कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता आरपी सिंह का कहना है कि आदिवासियों के हित से जुड़े मुद्दों पर सरकार पूरी तरह असफल रही. बेरोजगारी और माओवाद की घटनाओं पर अंकुश नहीं लगाया जा सका है.
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छत्तीगढ़ में भाजपा शासन के 15 वर्ष पूरा होने को है. सरकार जिस तरह से अनुसूचित जनजाति वर्ग के हितों के लिए काम की है, उससे पार्टी पूरी तरह से आश्वस्त है. भाजपा का कहना है कि विपरीत परिस्थितियों के बाद सरकार ने बेहतर काम किया है. इसी लिए जिलों को निर्माण किया गया0 आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रो में प्रशासन की तैनाती की गई. संवर्ग का स्थापना की गई. भाजपा प्रवक्ता संजय श्रीवास्तव का कहना है कि यदि आदिवासी हितों के विकास में कोई अवरोध हुआ है तो उसकी वजह माओवाद की समस्या है.

बता दें कि छत्तीसगढ़ की 11 लोकसभा सीटों में 4 सीट अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित है. वहीं 90 विधान सभा वाले राज्य में 34 सीट अनुसूचित जनजाति वर्गो के लिए आरक्षित है. छत्तीसगढ़ राज्य में 5 विशेष पिछड़ी जनजातियां भी निवास करती हैं, जिनमें बैगा, कमार, कोरवा, बिरहोर, अबूझमाड़िया शामिल हैं. राज्य सरकार ने विशेष जनजातियों के लिए विकास अधिकरण का गठन भी किया है.

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First published: August 9, 2018, 10:44 AM IST
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