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Chhattisgarh Assembly Session: किसान आत्महत्या मामले में तीखी नोकझोंक, विपक्ष ने सरकार को घेरा

सदन में किसानों के आत्महत्या मामले में जोरदार हंगामा. (File)

सदन में किसानों के आत्महत्या मामले में जोरदार हंगामा. (File)

Chhattisgarh Assembly Budget Session 2021: छत्तीसगढ़ में पिछले एक साल में 141 किसानों ने आत्महत्या (Farmer Suicide) की है. विधानसभा के बजट सत्र के पांचवें दिन किसानों की आत्महत्या और मुआवजे का मुद्दा उठा जिसे लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जमकर बहस हुई. आरोप-प्रत्यारोप के दौरान विपक्ष ने वॉकआउट कर दिया.

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रायपुर. छत्तीसगढ़ में  किसानों की आत्महत्या (Farmers Suicide) का शुक्रवार को सदन में उठा. इसे लेकर नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक के अलावा शिवरतन शर्मा ने सत्ता पक्ष को घेरने का कोशिश की. मामले में सत्ता पक्ष की ओर से बीजेपी (BJP) पर भी आरोप लगाए गए. नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक के सवाल पर जवाब देते हुए कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे ने बताया कि अप्रैल 2020 से 1 फरवरी 2021 के बीच कुल 141 किसानों ने विभिन्न कारणों से आत्महत्या की है. उन्होंने बीजेपी पर आरोप लगाते हुए कहा कि पिछले 15 सालों के कार्यकाल में कितने किसानों ने आत्महत्या की, यह हमने देखा है. बीजेपी किसानों की आत्महत्या पर राजनीति कर रही है.

कृषि मंत्री के इस जवाब से बीजेपी भड़क गयी और सरकार पर किसानों के अपमान करने का आरोप लगाया. इसके जवाब में धनेंद्र साहू ने कहा कि बीजेपी के शासन काल में हजारों किसानों ने आत्महत्या की, लेकिन किसी एक को भी मुआवजा दिया हो तो बताएं. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी बीजेपी शासन काल को याद दिलाते हुए कहा कि जब चंद्रशेखर साहू के कृषि मंत्री थे तब उन्हीं के गांव में किसान ने आत्महत्या की थी और उस समय कांग्रेस नेता धनेंद्र साहू किसान के घर गए थे. तब दोषियों के खिलाफ एफआईआर की गई और बीजेपी नेता फोटो खिंचवाने जाते थे. कृषि मंत्री रविंद्र चौबे ने भी इस मामले में बीजेपी पर राजनीति करने का आरोप लगाया.

दुर्ग में नकली कीटनाशक दवा के छिड़काव भी उठा



किसानों की आत्महत्या को लेकर आरोप-प्रत्यारोप यहीं नहीं थमा. बीजेपी ने दुर्ग में नकली कीटनाशक दवा के छिड़काव से फसल बर्बाद होने की वजह से किसान की आत्महत्या को लेकर विपक्ष को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया. लेकिन इसी दौरान कृषि मंत्री ने यह आरोप लगाया कि राजनांदगांव में नकली कीटनाशक बेचने वालों को बीजेपी का ही संरक्षण मिला हुआ है क्योंकि राजनांदगांव पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह का क्षेत्र है.
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राजनांदगांव जिले का नाम सुनते ही बीजेपी ने हंगामा शुरू कर दिया और सरकार पर गुमराह करने का आरोप लगाया. आखिर में मंत्री के जवाब से असंतुष्ट होकर भाजपा विधायकों ने सदन से वॉकआउट किया.
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