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OPINION: छत्तीसगढ़- सीएम जमीन से तय होगा या आसमान से
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निलेश त्रिपाठी | News18Hindi
Updated: December 13, 2018, 12:15 PM IST
OPINION: छत्तीसगढ़- सीएम जमीन से तय होगा या आसमान से
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छत्तीसगढ़ में जीत की खुमारी व जश्न के बीच जनता सहि​त कांग्रेसियों में भी इस बात के समीकरण लगाए जा रहे हैं कि प्रदेश का नया मुखिया कौन होगा?

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छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित हो गए हैं. 15 साल से सत्ता पर काबिज भारतीय जनता पार्टी को जनादेश ने 90 सीटों वाली विधानसभा में 15 सीटों पर समेट दिया है. 68 सीटों के साथ एकतरफा जीत हासिल करने वाली कांग्रेस जश्न मना रही है. जीत की खुमारी व जश्न के बीच जनता सहि​त कांग्रेसियों में भी इस बात के समीकरण लगाए जा रहे हैं कि प्रदेश का नया मुखिया कौन होगा?

छत्तीसगढ़ में भारी बहुमत से जीत के बाद अब मुख्यमंत्री की रेस में भी कुछ दिग्गज मैदान में हैं. इनके बीच जिन नेताओं का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है, उसमें प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भूपेश बघेल और नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव शामिल हैं. ऐसे में इन दो नेताओं की कार्यशैली और भूमिका को जानना जरूरी है, लेकिन उससे पहले जान लेते हैं कि 15 सालों में लगातार हार के बाद कमजोर हो चुकी कांग्रेस ने प्रदेश में इतना भारी बहुमत कैसे हासिल कर लिया.

..तो मध्यप्रदेश में भारी बहुमत क्यों नहीं
चुनाव परिणाम के बाद इस बात की चर्चा जोरों पर है कि कांग्रेस के घोषणा पत्र में किसान कर्ज माफी को शामिल करना और 15 साल की सत्ता के विरोधी लहर ने कांग्रेस को इतनी बड़ी जीत दिलाई है, लेकिन यदि ये ही प्रमुख कारण है तो मध्यप्रदेश में कांग्रेस को इतना भारी बहुमत क्यों नहीं मिला. क्योंकि वहां भी कांग्रेस ने कर्ज माफी का वादा किया है और भाजपा वहां भी 15 साल से लगातार सत्ता में थी.



यदि किसान और कर्ज माफी के मुद्दे पर बारिक विश्लेषण किया जाए तो पता चलेगा कि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की कमान किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले भूपेश बघेल के हाथों में थी. जबकि मध्यप्रदेश में कांग्रेस की कमान राजपरिवार और औद्योगिक घराने से संबंध रखने वाले नेताओं के हाथों में थी. यही वजह है कि छत्तीसगढ़ के किसानों ने कांग्रेस पर ज्यादा भरोसा जताया.

क्यों मजबूत हैं भूपेश बघेल
तेजतर्रार और आक्रामक छवि वाले नेता भूपेश बघेल को दिसंबर, 2013 में कांग्रेस आलाकमान ने प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाया. इस समय विधानसभा चुनाव में लगातार तीसरी हार के बाद कांग्रेसी कार्यकर्ता हताश और निराश थे. इसके बाद भूपेश बघेल ने सरकार के खिलाफ लगातार मोर्चा खोलकर कार्यकर्ताओं को रिचार्ज करने का काम किया. फिर राशन कार्ड में कटौती का मुद्दा हो या किसानों की धान खरीदी और बोनस का मुद्दा, वह नसबंदी कांड का विरोध हो या फिर चिटफंड कंपनियों के पीड़ितों के साथ खड़े होने का मामला, भूपेश ने कांग्रेस को सरकार के खिलाफ सड़क पर उतार दिया.कथित भ्रष्टाचार के मामले एक के बाद एक उजागर किए, जिस तरह से उन्होंने शक्तिशाली नौकरशाहों को खुले आम चुनौती दी उससे राज्य में कांग्रेस की छवि बदली. हालांकि इस बीच जमीन घोटाले, एक मंत्री के सेक्स सीडी कांड को लेकर भूपेश सरकार के निशाने पर भी रहे.

जोगी के खिलाफ कार्रवाई
अंतागढ़ उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी की ख़रीद फ़रोख़्त के मामले में जिस तरह से उन्होंने अपनी ही पार्टी के कद्दावर नेता अजीत जोगी और उनके बेटे अमित जोगी को घेरा और फिर अमित जोगी को पार्टी से निष्कासित किया उसके बाद प्रदेश में यह धारणा बन गई कि भूपेश बघेल 'हिम्मत वाले' नेता तो हैं. क्योंकि पहले कांग्रेस में दो गुट काम करते थे एक संगठन कांग्रेस और दूसरा जोगी कांग्रेस. कांग्रेस के दिग्गज नेता भी जोगी के खिलाफ खुलकर नहीं बोलते थे.

क्या अब भी है इस तेवर की जरूरत
भूपेश बघेल का तेजतर्रार और सरकार के खिलाफ आक्रामक तेवर के कारण भले ही कांग्रेस की लहर छत्तीसगढ़ में चली और सत्ता का वनवास खत्म हुआ, लेकिन बड़ा सवाल ये है कि क्या अब भी कांग्रेस को उस तेवर की जरूरत है, जो भूपेश बघेल को मुख्यमंत्री बनाया जाए? क्योंकि कांग्रेस आलाकमान छत्तीसगढ़ में एक ऐसे चेहरे को सामने लाना चाहेगी, जिसे वो देशभर में प्रोजेक्ट कर सके और उस चेहरे का लाभ आने वाले लोकसभा चुनाव में मिल सके. ऐसे में कोई हैरानी नहीं होगी कि कांग्रेस आलाकमान किसी राष्ट्रीय छवि वाले सौम्य चेहरे को प्रदेश का जिम्मा सौंप दे.

क्या इतना सरल होना भी ठीक है?
कांग्रेस के सौम्य चेहरों में टीएस सिंहदेव और ताम्रध्वज साहू हैं. लेकिन इन दोनों को नेता प्रतिपक्ष और सांसद होने के बावजूद सरकार के खिलाफ आमने सामने की लड़ाई में सड़क पर उतरते नहीं देखा गया.

कुछ विवाद भी हैं..
इसके अलावा पिछले लोकसभा चुनावों में सरोज पांडे की हार को लेकर बीजेपी में भितरघात की खबरें आईं थीं. ताम्रध्वज सरोज पांडे को हराकर ही संसद पहुंचे थे. इसी तरह टीएस बाबा चुनाव में घोषणा पत्र तैयार करने के सिलसिले में जब जशपुर पहुंचे तो वहां उन्होंने जूदेव परिवार के पक्ष में एक बयान देकर सभी को चौंका दिया.

टीएस सिंहदेव ने खुलेआम बयान दिया कि भाजपा के वरिष्ठ नेता रहे दिलीप सिंह जूदेव के परिवार से जो भी चुनाव लड़ेगा, उसके खिलाफ प्रचार नहीं करूंगा. इसके अलावा 2016-17 में जब कांग्रेस संगठन ने ऐलान किया कि कोई भी कांग्रेसी सीएम के साथ मंच साझा नहीं करेगा तो टीएस सिंहदेव सरगुजा में एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के साथ मंच पर नजर आए.

छत्तीसगढ़ में नए मुख्यमंत्री के चेहरे को तय करने के लिए कांग्रेस के पर्यवेक्षक मल्लिकार्जुन खड़गे को जिम्मेदारी दी गई है. मल्लिकार्जुन खड़गे ने विधायकों की आम राय ले ली है. खड़गे अब आला कमान को अपनी रिपोर्ट देंगे. इसके बाद छत्तीसगढ़ का नया सीएम तय हो जाएगा. बताया जा रहा है कि आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर कार्यशैली और जाति वर्ग के साथ ही छत्तीसगढ़ में लंबी पारी खेलने की रणनीति को ध्यान में रखकर कांग्रेस मुख्यमंत्री तय करेगी. ऐसे में आक्रामक​ और सौम्य चेहरे में किसी एक को चुनना कांग्रेस आलाकमान के लिए चुनौती बन सकती है.​

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First published: December 12, 2018, 5:36 PM IST
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स्रोत: स्वास्थ्य मंत्रालय, भारत सरकार
अपडेटेड: April 09 (05:00 PM)
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स्रोत: जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी, U.S. (www.jhu.edu)
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