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छत्तीसगढ़ः चौथी पारी के लिए ओवर कॉन्फिडेंट है BJP या फिर सता रहा कोई डर?

छत्तीसगढ़ः चौथी पारी के लिए ओवर कॉन्फिडेंट है BJP या फिर सता रहा कोई डर?

फाइल फोटो-

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जिस भारतीय जनता पार्टी को छत्तीसगढ़ की जनता ने अब तक के हर विधानसभा चुनाव में स्पष्ट बहुमत दिया है, वो पार्टी क्यों आम लोगों का सहानुभूति वोट चाहती है.

    चाहे टिफिन बांटना हो या चरणपादुका वितरण और अब आदिवासी अंचलों में प्रेशर कुकर बांटने की तैयारी कर रही छत्तीसगढ़ सरकार क्या किसी प्रेशर में है? अटल विकास यात्रा के जरिए देश भर से पार्टी के दिग्गजों का जमावड़ा करने की कोशिश क्या कहती है. हर मंच से जब बहुमत का दावा है घोषणा पत्रों के पूरा होने का विश्वास है तो फिर इतनी ताकत झोंक देना क्या महज पार्टी का उत्साह है, या डर. बीजेपी का डर इस बात से भी झलकता है, क्योंकि जो सरकार 15 सालों से राज्य में राज कर रही है. जिस पार्टी को छत्तीसगढ़ की जनता ने अब तक के हर विधानसभा चुनाव में स्पष्ट बहुमत दिया है, वो पार्टी क्यों आम लोगों का सहानुभूति वोट चाहती है.

    भाजपा चौथी पारी के लिए विकास और उपलब्धियों के नाम पर वोट मांगने की बजाए रणनीति बदलकर पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी के नाम से पूरा चुनाव अभियान चला रही है. बीते पांच सितंबर को अटल विकास यात्रा के शुभारंभ कार्यक्रम में भजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने टल जी के नाम का इमोशनल स्ट्रोक खेला. अमित शाह ने कहा कि अटल जी ने छत्तीसगढ़ का निर्माण किया है. अमित शाह ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने अटल जी के नाम पर नया रायपुर का नाम रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी है.

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    फाइल फोटो


    छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह भी मंचों से कहते रहे हैं कि विपक्ष के हर दांव के लिए तैयार रहना चाहिए. राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि मिशन 65 के लिए जिस तरह से बीजेपी के राष्ट्रीय कार्यसमिति के साथ ही राज्य की बैठकों में भी मंथन हो रहे हैं, वो कहीं न कहीं पार्टी की तैयारी के साथ बेचैनी को भी दिखाते हैं. यह कई तरह के सर्वे रिपोर्ट का ही असर मानना चाहिए कि इस बार सरकार ठीक चुनाव से पहले दो बारा विकास यात्रा निकाल रही है. ताकि सीधे संवाद के साथ ही लोक लुभावनी योजनाओं के जरिए वोटर्स को लुभाया जाए.

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    File image of Narendra Modi and Amit Shah.


    राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के एक ही महीने में दो बार दौरे, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का बार-बार किसी न किसी बहाने छत्तीसगढ़ के अलग-अलग हिस्सों में आना और सभा करने के अपने मायने लगाए जा रहे हैं. यही नहीं सरकार अटल स्मारक बनाने के बहाने घर-घर पहुंचने की कोशिश कर रही है. विकास यात्रा के बावजूद हर बूथ तक पहुंचने के लिए बीजेपी ने यह रास्ता निकाला है.

    हालांकि बीजेपी के वरिष्ठ पदाधिकारी यह मानने से कोई परहेज नहीं करते हैं कि पिछले साल जिन सीटों पर कांग्रेस ने परचम लहराया था वहां मेहनत की जरूरत है.
    भाजपा प्रवक्ता व विधायक श्रीचंद सुंदरानी कहते हैं कि विपक्ष को कभी भी कम नहीं आंकना चाहिए. भाजपा हर सीट पर रणनीति बनाकर काम कर रही है. इस बार संगठन अपने लक्ष्य कुल 90 में से 65 प्लस सीटें जीतने में कामयाब होगी.

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    हालांकि माना जा रहा था कि पूर्व मुख्यमंत्री अजित जोगी की पार्टी जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ राज्य में वोटों के ध्रुवीकरण का एक बड़ा कारण बन सकती है. एक क्षेत्रीय पार्टी होने की वजह से वोट इस बार बंटेंगे. वहीं जनता कांग्रेस के युवा मोर्चा के अध्यक्ष विनोद तिवारी ने जनता कांग्रेस का हाथ हाल में छोड़कर वापस कांग्रेस में वापसी कर ली है. गंभीर बात यह हुई कि विनोद तिवारी ने अपने पार्टी छोड़ने की वजह के रूप में जोगी कांग्रेस और बीजेपी के बीच सांठगांठ को बताया. विनोद तिवारी के इस खुलासे ने ना केवल जोगी कांग्रेस बल्कि बीजेपी के लिए भी मुश्किलें बढ़ा दी हैं.

    छत्तीसगढ़ की सत्ता पर पिछले 15 सालों से खिलखिलाता कमल चौथी पारी में अपनी खिलाहट बरकरार रख पाएगा या नहीं ये तो चुनाव के नतीजे ही बताएंगे, लेकिन सत्ता में आसीन भाजपा इस बार जिस तरह से ताकत लगा रही है, वह एक प्रश्नवाचक चिह्न भी खड़ा करता है कि ये भाजपा में चुनावी तैयारी का उत्साह है या किसी अंदरूनी घबराहट का नतीजा. हालांकि राजनीतिक जानकारों का कहना है कि जो भी सरकार की मशक्कत को किसी आशंका का डर के रूप में आंकना ठीक नहीं है.
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    Tags: Assembly Election 2018, BJP, Chhattisgarh news, Congress

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