विधानसभा चुनाव: एंटी इनकंबेंसी से निपटने के लिए इस फार्मूले पर काम कर रही BJP

बीजेपी जानती है कि इस बार के चुनाव में विपक्ष से कांटों का मुकाबला है. कई मौजूदा सीटों में पार्टी के पास रिपोर्ट काफी खराब आई है. इनमें कुछ कद्दावर नेताओं के भी नाम हैं.

Devwrat Bhagat | News18 Chhattisgarh
Updated: September 14, 2018, 9:08 PM IST
विधानसभा चुनाव: एंटी इनकंबेंसी से निपटने के लिए इस फार्मूले पर काम कर रही BJP
सांकेतिक तस्वीर.
Devwrat Bhagat
Devwrat Bhagat | News18 Chhattisgarh
Updated: September 14, 2018, 9:08 PM IST
चौथी पारी के लिए एंटी इनकंबेंसी की आशंका से घबराई बीजेपी इस बार विधानसभा चुनाव में नए चेहरों पर दांव खेलना चाहती है. बीजेपी की चिंता इसलिए भी है. क्योंकि कई सर्वे रिपोर्ट में उसकी स्थिति कमजोर नजर आई है. खुद आरएसएस ने अपने आंतरिक सर्वे में मौजूदा सरकार के लिए अच्छे संकेत नहीं पाए हैं. मिशन 65 प्लस को लेकर बीजेपी में चल रही गतिविधियों के मुताबिक नये चेहरों का फार्मूला तय कर लिया गया है, जिसमें महिलाओं और युवाओं को ज्यादा मौका मिलेगा.

बीजेपी जानती है कि इस बार के चुनाव में विपक्ष से कांटों का मुकाबला है. कई मौजूदा सीटों में पार्टी के पास रिपोर्ट काफी खराब आई है. इनमें कुछ कद्दावर नेताओं के भी नाम हैं. ऐसे में यहां के लोगों को साधने के लिए पार्टी नए चेहरों को मौका देना चाहती है. इन नए चेहरों में पार्टी की प्राथमिकता युवा और महिला वर्ग है. दरअसल इस विश्वास का एक कारण इस बार युवा और महिला वोटर्स की संख्या भी अधिक होना है. करीब 30 फीसदी नए चेहरों को मौका दिया जाएगा. चूंकि प्राथमिकता में युवा चेहरे हैं. ऐसे में भाजयुमों को इसकी जिम्मेदारी भी दी गई है कि लोकप्रिय चेहरों और बेदाग छवि के प्रत्याशियों की जानकारी जुटाए.

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खुद अमित शाह ने भी मौजूदा स्थिति को देखते हुए युवा प्रत्याशियों तो तरजीह देने को कहा है. हालांकि इस चुनाव में आरएसएस का भी सीधा हस्तक्षेप है, लेकिन फिर भी भाजयूमो के प्रदेश अध्यक्ष विजय शर्मा का दावा है कि इस बार 30 फीसदी से भी ज्यादा युवाओं को बीजेपी टिकट देने जा रही है. विजय शर्मा का कहना है कि अच्छी छवि वाले युवा नेताओं की सूची भी तैयार की जा रही है. इसके लिए निर्देशों का पालन किया जा रहा है.

बीजेपी इस बार के विधानसभा चुनाव में बस्तर और सरगुजा की सभी सीटों को हर हाल में जीतना चाहती है.
इन संभागों की सीटों पर जीत ही मिशन 65 का आधारशीला बनेगी. यहां से भी युवा और नए चेहरों पर को तरजीह दी जा सकती है. पार्टी सूत्रों की मानें तो पार्टी के ही अंदरूनी सर्वे में कई मंत्री और विधायकों की रिपोर्ट कमजोर आंकी गयी है. इसलिए छत्तीसगढ़ में पिछले कई बार के विधायक और मंत्रियों के भी टिकट कट सकते हैं. राजनीतिक जानकार इसे आरएसएस के सर्वे का असर बता रहे हैं.

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इधर पार्टी की तरफ से ये जरूर कहा जा रहा है कि युवा चेहरों को इस बार ज्यादा तवज्जो दी जाएगी, लेकिन कुल सीटों में कितनी सीटें युवा प्रत्याशियों को मिलेंगी. इस बारे में पार्टी अब भी खामोश है. भाजपा के प्रवक्ता संजय श्रीवास्तव का कहना है कि युवाओं को तवज्जो देने की नीति पर भाजपा शुरू से काम कर रही है, लेकिन सीटों की संख्या आला कमान द्वारा ही तय की जाएगी. फिलहाल ​सीटों की स्थिति स्पष्ट नहीं है.
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राजनीतिक जानकार बाबूलाल शर्मा का कहना है कि बीजेपी के लिए युवा और महिला वोटर्स इसलिए भी चिंता का विषय हैं. क्योंकि बेरोजगारी और महंगाई इस बार सरकार के गले की हड्डी बनी हुई है. ऐसे में नये चेहरों को चुनावी दंगल में उतारकर बीजेपी एंटी इनकंबेंसी दूर करने की कोशिश करेगी, लेकिन बीजेपी का ये फार्मूला कितना असर करता है ये तो चुनावी नतीजे ही बतायेंगे.

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