बस्तर टाइगर महेंद्र कर्मा को हराकर पहली बार विधायक बने थे नक्सल हमले में मारे गए भीमा मंडावी
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बस्तर टाइगर महेंद्र कर्मा को हराकर पहली बार विधायक बने थे नक्सल हमले में मारे गए भीमा मंडावी
भीमा मंडावी.

विधानसभा चुनाव 2018 में बीजेपी सरकार के खिलाफ छत्तीसगढ़ में एक लहर चली थी. इसमें भाजपा का लगभग सूपड़ा साफ हो गया.

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लोकसभा चुनाव 2019 में पहले चरण के मतदान से ऐन पहले नक्सलियों ने बस्तर में एक बड़ी घटना को अंजाम दिया है. मंगलवार (9 अप्रैल) को नक्सलियों ने दंतेवाड़ा में भाजपा के चुनावी प्रचार काफिले पर हमला कर दिया. इस घटना में दंतेवाड़ा विधायक भीमा मंडावी मारे गए हैं. भीमा मंडावी भाजपा के ​वरिष्ठ नेताओं में से एक थे. साल 2018 के विधानसभा चुनाव में भीमा मंडावी ने बस्तर टाइगर महेंद्र कर्मा की पत्नी और मौजूदा विधायक देवती कर्मा को हराया था.

विधानसभा चुनाव 2018 चुनाव में बीजेपी सरकार के खिलाफ छत्तीसगढ़ में एक लहर चली थी. इसमें भाजपा का लगभग सूपड़ा साफ हो गया. प्रदेश की 90 में से सिर्फ 15 सीट ही भाजपा जीत पाई थी. भाजपा ने बस्तर संभाग की 12 में से सिर्फ एक सीट दंतेवाड़ा में ही जीत हासिल कर सकी थी. इस सीट से भाजपा के प्रत्याशी भीमा मंडावी ही थे. इस चुनाव में भीमा ने देवती कर्मा को 2071 मतों से मात दिया.

भीमा मंडावी 2008 में बस्तर टाइगर महेंद्र कर्मा को हराकर पहली बार विधायक बने थे. इससे पहले 2007 तक वह पंचायत सचिव थे. उन्होंने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत बजरंग दल से की थी. वर्ष 2013 में देवती कर्मा से हारे थे. बाद में उन्हें 2018 में हराया था. भीमा मंडावी भाजपा के आदिवासी मोर्चा के प्रदेश पदाधिकारी भी रहे हैं. बता दें कि साल 2013 में नक्सलियों ने झीरमघाटी में कांग्रेस के काफिले पर हमला किया था. इसमें बस्तर टाइगर महेन्द्र कर्मा समेत 32 लोग मारे गए थे.
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