अपनी पसंद की कार्यकारिणी पर आला कमान से मोहर लगवाने में कामयाब रहे भूपेश बघेल

छत्तीसगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल चुनावी साल में चुनाव से ठीक पहले नई कार्यकारिणी पर आला कमान की मोहर लगवाने में सफल तो हुए हैं.मगर कई नेताओं के पसंद को दरकिनार भी किया गया है.छत्तीसगढ़ के चुनावी मैदान में युद्धघोष हो चुका है.दोनों ही प्रमुख दले बीजेपी और कांग्रेस एक दूसरे को मात देने की रणनीति पर कार्य कर रही हैं.

Awadhesh Mishra | News18 Chhattisgarh
Updated: September 15, 2018, 11:25 PM IST
अपनी पसंद की कार्यकारिणी पर आला कमान से मोहर लगवाने में कामयाब रहे भूपेश बघेल
प्रदेश कार्यकारिणी स्वीकृत होने पर कुछ यूं खिला पीसीसी अध्यक्ष का चेहरा
Awadhesh Mishra | News18 Chhattisgarh
Updated: September 15, 2018, 11:25 PM IST
छत्तीसगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल चुनावी साल में चुनाव से ठीक पहले नई कार्यकारिणी पर आला कमान की मोहर लगवाने में सफल तो हुए हैं. मगर कई नेताओं के पसंद को दरकिनार भी किया गया है. छत्तीसगढ़ के चुनावी मैदान में युद्धघोष हो चुका है. दोनों ही प्रमुख दले बीजेपी और कांग्रेस एक दूसरे को मात देने की रणनीति पर कार्य कर रही हैं. चुनावी तैयारियों के बीच शनिवार को छत्तीसगढ़ कांग्रेस के नई कार्यकारिणी का ऐलान कर दिया गया. 333 सदस्यी जम्बो कार्यकारिणी को चुनाव और दावेदारों सहित नेताओं के पसंद को ध्यान में रखकर बनाया गया है.

कोषाध्यक्ष के पद पर भूपेश बघेल के बेहद करीबी रामगोपाल अग्रवाल दोबारा काबिज हुए हैं, तो वहीं गिरिश देवांगन,शैलेष नितिन त्रिवेदी, गुरूमुख सिंह होरा, अटल श्रीवास्तव, मलकीत सिंह गैंदू, आनंद कुकरेजा को महामंत्री का पद देकर भूपेश बघेल ने अपनी पसंद सार्वजनिक कर दी है. बात अगर नेताओं के पसंद और उनको स्थान की करें तो वयोवृद्ध नेता मोतीलाल वोरा, ताम्रध्वज साहू, चरणदास महंत, टीएस सिंहदेव, कवासी लखमा के पंसद का पूरा-पूरा ख्याल रखा गया है.वहीं फिर रविंद्र चौबे, सत्यनारायण शर्मा, धनेंद्र साहू, अमरजीत भगत, मोहम्द अकबर, बदरुद्दिन कुरैशी, बोधराम कवंर, पीआर खुंटे जैसे वरिष्ठ नेतओं के पसंद की काफी हद तक अनदेखी की गई.

इतना ही नहीं जोगी कांग्रेस छोड़कर कांग्रेस में वापसी करने वाले अधिकांश बड़े नेताओं को महत्वपूर्ण पदों से नवाजा गया है जिसमें वाणी राव, विनोद तिवारी, हरीश कवासी जैसे नाम प्रमुखता से शामिल हैं. पसंद-ना पसंद के बीच एक बात तो तय है कि जम्बो कार्यकारिणी की घोषणा कर कांग्रेस पूरी तरह से चुनावी लाभ लेना चाह रही है. कार्यकारिणी के घोषणा के बाद उस स्तर पर विरोध के स्वर सुनाई नहीं दिए जिसकी परिपाटी कांग्रेस की शुरू से रही है.फिलहाल चुनावी हार की हैट्रिक तोड़ने को आतुर कांग्रेस संतुलित कार्यकारिणी की घोषणा करने में सफल रही है.
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