Bijapur Encounter: नक्सली आतंक खत्म करने पर बयान नहीं, कुछ ठोस करिए सरकार!

 मुठभेड़ में गोली लगने से एक इनामी बदमाश घायल हुआ है.  (प्रतीकात्मक तस्वीर)

मुठभेड़ में गोली लगने से एक इनामी बदमाश घायल हुआ है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

Naxalite Attack In Chhattisgarh: नक्सलियों के खात्मे के लिए रणनीति पर मंथन के पहले और बाद में गृह मंत्री अमित शाह और सीएम भूपेश बघेल के बयान आए, लेकिन जनता ठोस कार्रवाई चाहती है. वास्तव में नक्सली खत्म करने हैं तो उनकी हथियारों की रसद और उगाही के रास्ते बंद करने होंगे.

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रायपुर. छत्तीसगढ़ के बीजापुर और सुकमा जिले के बॉर्डर पर नक्सली हमले में 24 जवानों की शहादत से हड़कंप मच गया है. इस साल के सबसे बड़े और दस दिन के भीतर दूसरे बड़े नक्सली हमले की गूंज इस बार दिल्ली दरबार तक सुनाई दी. गृह मंत्री अमित शाह को असम में अपना चुनावी दौरा रद्द कर छत्तीसगढ़ का रुख करना पड़ा और असम में कांग्रेस को चुनाव जितवाने की जिम्मेदारी लेकर करीब दो माह से डेरा डाले बैठे छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को वापस लौटना पड़ा. एसटीएफ, पुलिस, सीआरपीएफ, नक्सली ऑपरेशन में लगे अफसरों के संग बैठ कर रणनीति पर मंथन करना पड़ा. ऐसी रणनीतियां 2010 में नक्सली हमले में 76 लोगों की शहादत और कई बड़े हमलों के बाद भी बनी थीं. पहले की तमाम रणनीतियां फेल होते तो सबने देखा है, लेकिन इस बार क्या तय हुआ, यह सामने आना बाकी है.

अलबत्ता मीटिंग के पहले और बाद में गृह मंत्री अमित शाह और सीएम भूपेश बघेल के सामने आए बयान पहले जैसे थे. शाह बोले-'हम जड़ से नक्सलवाद को खत्म करेंगे. उनके खिलाफ लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर है.' सीएम भूपेश बघेल बोले, 'हम नक्सलियों को उनके गढ़ में घुसकर मार रहे हैं, यह नक्सलियों की आखिरी लड़ाई है.' जनता के सामने 24 जवानों की शहादत और 30 से ज्यादा जवानों के घायल होने की खबरें और तस्वीरें सामने आई हैं. मुठभेड़ और नक्सलियों के हताहत होने के दावों के लेकर सिर्फ कयासों पर आधारित अफसरों के बयान ही देखने-सुनने को मिले हैं. सियासी बयानबाजी वक्ती तौर पर जवानों और सुरक्षा बलों का हौसला बढ़ाने और जनता में भरोसा जगाने और अपनी नाकामी को छिपाने की कोशिश का हिस्सा तो हो सकती है, लेकिन जनता के कान ऐसे बयानों को सुनते-सुनते पक चुके हैं. वास्तव में कुछ ठोस करना होगा.

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