शाह का छत्तीसगढ़ दौरा, शक्ति केंद्र संयोजकों को देंगे जीत का मंत्र

बीजेपी को विधानसभा चुनाव में हर बूथ से कम से कम पचास फीसदी वोट मिलने चाहिए और इसकी जिम्मेदारी केंद्र संयोजकों और सह समन्वयकों की होगी, इसलिए करीब 22 हजार संयोजकों की अमित शाह क्लास लेने वाले हैं.

Devbrat Bajpai | News18 Chhattisgarh
Updated: September 11, 2018, 9:40 AM IST
शाह का छत्तीसगढ़ दौरा, शक्ति केंद्र संयोजकों को देंगे जीत का मंत्र
फाइल फोटो-अमित शाह. (पीटीआई)
Devbrat Bajpai | News18 Chhattisgarh
Updated: September 11, 2018, 9:40 AM IST
भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने आगामी विधानसभा चुनाव में फतह करने की रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है, लेकिन इस बार शाह ने पार्टी के बड़े चेहरों से ज्यादा शक्ति केंद्र संयोजकों पर भरोसा जताया है. शाह 29 सितंबर को छत्तीसगढ़ के दौरे पर आ रहे हैं. इस दौरान वे बीजेपी के चुनावी मिशन के तहत बनाए गए शक्ति केंद्र पर फोकस करेंगे. बताया जा रहा है कि शाह पार्टी के बड़े नेताओं की जगह शक्ति केंद्रों से संयोजकों, सहसंयोजकों और केंद्र प्रभारियों पर ज्यादा भरोसा जता रहे हैं.

शाह छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में जीत का मंत्र भी इन्हीं संयोजकों कों देंगे और चुनाव में पार्टी की जीत के लिए इन्हें सबसे मुश्किल टास्क भी दिया जाएगा. पार्टी सूत्रों के अनुसार बीजेपी को विधानसभा चुनाव में हर बूथ से कम से कम पचास फीसदी वोट मिलने चाहिए और इसकी जिम्मेदारी केंद्र संयोजकों और सह समन्वयकों की होगी, इसलिए करीब 22 हजार संयोजकों की अमित शाह क्लास लेने वाले हैं.

पार्टी के चेहरों का अपने-अपने क्षेत्रों में काफी बोलबाला था. पिछले चुनाव में वोटरों को साधने के लिए भाजपा ने इस चेहरों का भरपूर इस्तेमाल भी किया था, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो बीते 15 सालों की एंटी इंकम्बेंसी, क्षेत्र के विधायक और मंत्रियों से लोगों की नाराजगी को शक्ति संयोजक ही दूर कर सकते हैं और यह बात राष्ट्रीय अध्यक्ष भी बेहतर जानते हैं.

इस बार पार्टी के कमजोर विधायक और नेताओं की वजह से डगमगाते मतदाताओं को साधने का काम केवल शक्ति संयोजक ही कर सकते हैं, इसलिए इन शक्ति संयोजकों को अहम जिम्मेदारी दी जा रही है. प्रदेश में लगभग 24 हजार बूथ हैं, एक शक्ति केंद्र में 3 से 5 बूथ है. इस तरह करीब साढ़े सात हजार केंद्र प्रभारी, संयोंजकों और सह संयोजकों की भी इतनी ही संख्या है, इन्हें मिलाकर करीब 22 हजार शक्ति संयोजक है.
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