क्या भूपेश सरकार के लिए परेशानी का सबब बन सकती है आदिवासी गवर्नर की नियुक्ति?

राज्यपाल की नियुक्त के बाद एक ओर आदिवासी समाज ने खुशी जताते हुए अधिकारों की रक्षा होने की बात कही है तो वहीं राजनीति के जानकार इसे राज्य सरकार के लिए बेहतर निर्णय नहीं मान रहे है.

Awadhesh Mishra | News18 Chhattisgarh
Updated: July 22, 2019, 3:06 PM IST
क्या भूपेश सरकार के लिए परेशानी का सबब बन सकती है आदिवासी गवर्नर की नियुक्ति?
राजनीति के जानकार इसे राज्य सरकार के लिए बेहतर निर्णय नहीं मान रहे है. (फाइल फोटो)
Awadhesh Mishra | News18 Chhattisgarh
Updated: July 22, 2019, 3:06 PM IST
आदिवासी बाहुल्य राज्य छत्तीसगढ़ के गठन के बाद ये पहला मौका होगा जब किसी आदिवासी नेत्री को राज्यपाल बनाया गया है. पूर्व प्रोफेसर, बीजेपी सरकार में मंत्री, राज्यसभा सदस्य और अनुसूचित जनजाति आयोग की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रही अनुसूइया उइके छत्तीसगढ़ में कार्यवाहक और प्रभारी मिलाकर नौंवी राज्यपाल बनाई गई हैं. राज्यपाल की नियुक्त के बाद एक ओर आदिवासी समाज ने खुशी जताते हुए अधिकारों की रक्षा होने की बात कही है तो वहीं राजनीति के जानकार इसे राज्य सरकार के लिए बेहतर निर्णय नहीं मान रहे है.

आदिवासी समाज में खुशी

अनुसूइया उइके के राज्यपाल बनने पर सर्व आदिवासी समाज के प्रभारी अध्यक्ष बीएस रावटे का कहना है कि अनुसूइया उइके के राज्यपाल नियुक्त होने पर पूरे समाज में खुशी की लहर है. खासकर महिलाओं में उनकी नियुक्त को लेकर अच्छा उत्साह है. क्योकि पहली बार हमरे मर्ग की महिला को राज्यपाल बनाया गया है.पहले हमे अपनी बात रखने का मौका तक नहीं दिया जाता है, लेकिन अब लगता है हमारी बातें भी सुनी जाएगी. तो वहीं जनीतिक विश्लेषक बाबूलाल शर्मा की मानें तो इस फैसले से राज्य सरकार के कार्यों पर असर पड़ सकता है.



राज्यपाल के पावर:

 

दरअसल संविधान के अनुच्छेद 244 (1) के तहत संवैधानिक प्रावधान के अनुसार अनुसूचित क्षेत्र चिन्हांकित कर संविधान की पांचवी अनुसूची के पैरा 6 (1) के अनुसार राष्ट्रपति और राज्यपाल को इन क्षेत्रों का पालक बनाया गया है, जो अपनी शक्तियों का प्रयोग कर इन क्षेत्रों में राज्य सरकार के किसी निर्णय में परिवर्तन, वृद्धि, कमी, नए प्रावधानों का समावेश सहित निर्णय को रद्द भी कर सकते है.
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एक नजर अनुसूचित क्षेत्रों सहित राज्यपाल की शक्तियों पर जो छत्तीसगढ़ सरकार के लिए मुसीतब का सबब बन सकती है.

 

 

. अनुच्छेद 178 के तहत शक्तियां:

मंत्री मंडल के निर्णयों के गुण-दोष का आधार तलब कर सकती हैं,

अधिसूचना, विधेयक, निर्णयों में हस्तक्षेप कर सकती हैं,

मंत्री मंडल के बाहर लिए गए निर्णयों पर रोक लगा सकती हैं,

अधिकारी-मंत्री स्तर की घोषणाओं पर रोक लगा सकती हैं,

सरकार के अधिकांश निर्णयों पर हस्तेक्षप कर सकती हैं,

 

. अनुसूची पांच के पैरा 3, 4, 5 (1)(2) के तहत शक्तियां:

अनुसूचित क्षेत्रों में प्रशासनिक स्थिति पर केंद्र को रिपोर्ट भेज सकती हैं,

जनजाति सलाहकार परिषद गठन और कार्यों पर रिपोर्ट तलब कर सकती हैं,

महज अधिसूचना जारी कर अनुसूचित क्षेत्रों में नियमों का परिवर्तन कर सकती हैं,

पुलिस के अधिकारों में कटौती या बढ़ोत्तरी कर कोई नया अधिनियम बना सकती हैं,

 

. अनुच्छेद 200 के तहत शक्तियां:

ऐसा कोई भी विधेयक,अधिनियम या कानून जो राज्य के विधानमंडल द्वारा पारित किया गया हो उर पर रोक लगा सकती हैं,

 

बीजेपी-कांग्रेस ने कही ये बात

हालांकि राज्यपाल के नियुक्ति पर सियासी गुणा-गणित कम ही निकाला जाता है. लेकिन सीएम भूपेश बघेल के आक्रमक तेवर की वजह से राज्य और केंद्र के बीच टकराव की स्थिति को देखते हुए ही इस के गुणा-गणित की चर्चा की जा रही है. इतना ही नहीं अनुसूइया उइके के राज्पाल बनने से जहां एक ओर बीजेपी उत्साहित नजर आ रही है वहीं दूसरी कांग्रेस उम्मीद कर रही हैं कि वे बेहतर कार्य करेंगीं.

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बीजेपी-कांग्रेस ने कही ये बात. (फाइल फोटो)


छत्तीसगढ़ बीजेपी प्रवक्ता सच्चिदानंद उपासने का कहना है कि राजनीतिक अनुभवनों का लाभ छत्तीसगढ़ को मिलेगा. आदिवासी प्रदेश में आदिवासी राज्यपाल का होना फायदेमंद ही होगा. वहीं कांग्रेस संचार विभाग प्रमुख शैलेष नितिन त्रिवेदी का कहना है कि कांग्रेस को उम्मीद है कि वे छत्तीसगढ़ को और बेहतक ढंग से सबकी बातों को सुनेंगी और कार्य करेंगी.

 

 

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First published: July 22, 2019, 3:02 PM IST
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