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हार से निराश होने से पहले इस शख्सियत की कहानी आपको जरूर पढ़नी चाहिए

डॉ. तीजन बाई (फाइल फोटो)
डॉ. तीजन बाई (फाइल फोटो)

हार के आगे जीत की ये कहानी आपके लिए एक मिसाल साबित हो सकती है. इनकी कामयाबी की स्टोरी अपको इंस्पायर करने के लिए काफी है.

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छत्तीसगढ़ की विख्यात पंडवानी गायिका डॉ. तीजन बाई शायद किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं. देश ही नहीं बल्कि विदेशों तक छत्तीसगढ़ के नाम का झंडा तीजन बाई ने गाड़ा है. तीजन बाई की इस सफलता की कहानी में हार भी है, निराशा भी है, लेकिन सबसे ऊपर है उनकी लगन, मेहन, जिसके दमपर उन्होने ये सफलता हासिल की. बेहद कम लोगों को ये बात मालूम होगी की तीजन बाई ने पढ़ाई नहीं की है. तीजन बाई ने कोई औपचारिक शिक्षा नहीं ली है.  लेकिन अपने कला के बलौदल तीजन बाई ने डॉक्टर की उपाधि हासिल कर ली है. मालूम हो कि पंडवानी गायिका डॉक्टर तीजन बाई को हाल ही में पद्म विभूषण से भी सम्मानित किया गया. तीजन बाई ये सम्मान पाने वाली छत्तीसगढ़ की पहली नागरिक हैं. इससे पहले भारत सरकार उन्हें पद्म भूषण और पद्मश्री से भी नवाजा है. छत्तीसगढ़ की प्राचीन गायकी कला पंडवानी देश-विदेश तक पहुंचाने का श्रेय तीजन बाई को ही जाता है. छत्तीसगढ़ राज्य के पंडवानी लोक गीत-नाट्य की पहली महिला कलाकार तीजन बाई ही हैं. उन्होंने अपनी कला का प्रदर्शन देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी किया है.  एक छोटे गांव की कलाकार से लेकर पद्म विभूषण तक का उनका सफर आसान नहीं रहा है. बावजूद इसके तीजन बाई ने एक लंबी लड़ाई लड़ सफलता हासिल की. इस सबके पीछे है तीजन बाई के संघर्ष की ऐसी कहानी जो हर किसी के लिए एक मिसाल है.

कम उम्र में दी अपनी पहली पंडवानी प्रस्तुति
 छत्तीसगढ़ के भिलाई के गांव गनियारी में तीजन बाई का जन्म हुआ. उनके पिता का नाम हुनुकलाल परधा और माता का नाम सुखवती था. शुरूआती दिनों में तीजन बाई अपने नाना ब्रजलाल को महाभारत की कहानियां गाते सुनाती-देखतीं थी. धीरे-धीरे उनकी दिलचस्पी पंडवानी की ओर बढ़ने लगी. महाभारत की कहानियां किस्से उन्हे याद होने लग गए. इसी दौरान उनकी अद्भुत लगन और प्रतिभा को देखकर उमेद सिंह देशमुख ने उन्हें अनौपचारिक तौर पर प्रशिक्षण दिया.  महज 13 साल की उम्र में उन्होंने अपनी पहली प्रस्तुति दी. ऐसा कहा जाता है कि उस समय की पंडवानी महिला कलाकार बैठकर प्रस्तुति देती थी. लेकिन तीजन बाई ने इस प्रथा को तोड़ते हुए पुरूषों की तरह पंडवानी गाया. अपनी इस अलग शैली के लिए तीजन बाई काफी प्रसिद्ध हुईं और एक अलग पहचान मिली.






पंडवानी गायिका डॉ. तीजन बाई
पंडवानी गायिका डॉ. तीजन बाई





विदेशों तक पहुंचाई पंडवानी


बताते हैं कि प्रसिद्ध रंगकर्मी हबीब तनवीर ने तीजन बाई को सुना और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के सामने एक प्रस्तुति देने निमंत्रित दिया. उस दिन के बाद से उन्होंने कई  अतिविशिष्ट लोगों के सामने देश-विदेश में अपनी कला का प्रदर्शन किया. धीरे-धीरे उनकी प्रसिद्धि आसमान छूने लगी फिर उन्होने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. 1980 में उन्होंने सांस्कृतिक राजदूत के रूप में इंग्लैंड, फ्रांस, स्विट्ज़रलैंड, जर्मनी, टर्की, माल्टा, साइप्रस, रोमानिया और मारिशस की यात्रा की और वहां पर प्रस्तुतियां दी.




पंडवानी गायिका डॉ. तीजन बाई
पंडवानी गायिका डॉ. तीजन बाई



 

लंबी है पुरस्कारों की फेहरिस्त

पंडवानी गायिका डॉ. तीजन बाई को देश का दूसरा सबसे बड़ा पुरस्कार पद्म विभूषण मिला है. तीजन बाई ये पुरस्कार प्राप्त करने वाली प्रदेश से पहली छत्तीसगढ़ियां कलाकार है. अब तक प्रदेश में किसी को भी पद्म विभूषण नहीं मिला है. तीजनबाई को भारत सरकार ने 1988 में पद्‌मश्री सम्मान प्रदान किया. 3 अप्रैल, 2003 को भारत के राष्ट्रपति डॉ. अब्दुल कलाम द्वारा पद्‌म भूषण, मध्यप्रदेश सरकार का देवी अहिल्याबाई सम्मान, संगीत नाटक अकादमी नई दिल्ली से भी सम्मान मिला.

पंडवानी गायिका डॉ. तीजन बाई
पंडवानी गायिका डॉ. तीजन बाई


1994 में श्रेष्ठ कला आचार्य, 1996 में संगीत नाट्‌य अकादमी सम्मान, 1998 में देवी अहिल्या सम्मान, 1999 में इसुरी सम्मान प्रदान किया गया. 27 मई, 2003 को डीलिट की उपाधि से छत्तीसगढ़ शासन द्वारा सम्मानित की गई. डॉ. तीजन बाई बीएसपी में डीजीएम भी रही हैं, सितंबर 2016 में रिटायर हुईं. 2017 में तीजन बाई को खैरागढ़ यूनिवर्सिटी ने डिलीट की उपाधी दी.  इसके अलावा महिला नौ रत्न, कला शिरोमणि सम्मान, आदित्य बिरला कला शिखर सम्मान जैसे कई खिताबों से उन्हे नवाजा गया है.

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