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छत्तीसगढ़ विधानसभा सत्र: कोरोना से मौत के आंकड़ों पर कांग्रेस MLA ने उठाए सवाल, BJP ने शराबबंदी को बनाया मुद्दा

छत्तीसगढ़ विधानसभा का मानसून सत्र 26 जुलाई से शुरू हो गया है.

छत्तीसगढ़ विधानसभा का मानसून सत्र 26 जुलाई से शुरू हो गया है.

छत्तीसगढ़ में विधानसभा (Assembly) के मानसून सत्र के दूसरे दिन राज्य सरकार अपनी ही पार्टी के विधायकों (MLAs) के सवालों से घिरती नजर आई.

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रायपुर. छत्तीसगढ़ में विधानसभा (Assembly) के मानसून सत्र के दूसरे दिन राज्य सरकार अपनी ही पार्टी के विधायकों (MLAs) के सवालों से घिरती नजर आई. बिलासपुर से कांग्रेस विधायक शैलेष पांडेय ने कोरोना की दूसरी लहर के दौरान मौतों के आंकड़ों पर सवाल उठाए. विधायक पांडेय ने कहा कि बिलासपुर जिले में कोरोना से संक्रमण और मौत के आंकड़े मुझे सही नहीं मिले. इसके बाद मंत्री टीएस‌ सिंहदेव ने प्रदेशभर के आंकड़े प्रस्तुत करना चाहा, लेकिन आसंदी ने विस्तृत आंकड़े शैलेश पांडे को अलग से देने के लिए निर्देशित किया.

कांग्रेस के ही भिलाई नगर विधायक देवेन्द्र यादव ने प्रदेश के आईटीआई में प्रशिक्षण अधिकारियों की नियुक्ति में आरक्षण रोस्टर का पालन नहीं होने पर सवाल किया. इसपर उच्च शिक्षा मंत्री उमेश पटेल ने सदन में स्वीकार किया कि रोस्टर का पालन नहीं हुआ है. देवेंद्र यादव ने पूछा कि इस पर क्या कार्रवाई की जा रही है. इस पर मंत्री उमेश पटेल ने कहा कि सम्बंधित विभागों को अभिमत के लिए भेजा गया है. ये मामला उच्च न्यायालय में लंबित है. विधि विभाग से भी अभिमत मांगा गया है.

शराबबंदी का भी मामला उठा
सदन में नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने आबकारी मंत्री कवासी लखमा से पूछा कि शराबबंदी के लिए कौन कौन सी समिति बनाई है? 3 जुलाई 2021 तक इस समिति में कौन कौन है ?  कब बैठक हुई? शराबबंदी के लिए क्या अनुशंसा की गई? जवाब में मंत्री ने बताया कि शराबबंदी के लिए तीन समितियां बनाई गई हैं. राजनीतिक समिति, प्रशासनिक समिति और सामाजिक संगठनों की समिति गठित की गई है. पूर्ण शराब बंदी लागू किए जाने के संबंध में अनुशंसा के लिए ऐसे राज्य जहां पूर्व में शराबबंदी लागू की गई थी या वर्तमान में पूर्ण शराब बंदी लागू है में शराब बंदी के फलस्वरूप उन राज्यों में आए आर्थिक, सामाजिक एवं व्यावहारिक प्रभाव का अध्ययन करने के लिए गठित समितियों द्वारा अन्य राज्यों की आबकारी नीति का समग्र रूप से अध्ययन के बाद ही उनकी रिपोर्ट राज्य शासन को प्रस्तुत की जाएगी. समितियों की अनुशंसा अनुसार राज्य में पूर्ण शराब बंदी लागू किए जाने के संबंध में निर्णय लिया जाएगा.

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