Chhattisgarh Election Result 2018: भाजपा के इस कद्दावर मंत्री को हराना कांग्रेस के लिए चुनौती
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Chhattisgarh Election Result 2018: भाजपा के इस कद्दावर मंत्री को हराना कांग्रेस के लिए चुनौती
मंत्री अजय चन्द्राकर.

Chhattisgarh Election Result 2018 (छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव परिणाम): कुरूद में इससे पहले हमेशा भाजपा और कांग्रेस के बीच ही सीधा मुकाबला होता आया है. कुरूद विधानसभा सीट की जनता एक बार भाजपा तो एक बार कांग्रेस के प्रत्याशी को चुन कर विधानसभा भेजती रही है.

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छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव के नतीजों पर अब सबकी नजर टिकी है. वादे,दावे और आरोपों का अंतिम फैसला कुछ ही देर में होने वाला है. कई दिग्गजों की साख इस बार के चुनाव में दांव पर है. छत्तीसगढ़ विधानसभा की कुल 90 सीटों में से 25 से अधिक ऐसी सीटें जिन्हे हाई प्रोफाइल माना जाता रहा है. ऐसा ही एक हाईप्रोफाइल सीट है धमतरी का कुरूद विधानसभा सीट. इस सीट को एक तरह से कैबिनेट मंत्री अजय चंद्राकर का गढ़ माना जाता है. लेकिन कुरूद सीट में हर चुनाव में परिवर्तन का इतिहास रहा है. इस बार के मुकाबले में कांग्रेस ने साहू समाज से युवा महिला प्रत्याशी को मैदान में उतारकर अपना चुनावी दांव खेला है. तो वहीं निर्दलीय भी चुनावी समीकरण बिगाड़ने की पूरी फिराक में दिख रहे है.

कुरूद विधासभा सीट पर एक नजर

छत्तीसगढ़ के इस हाईप्रोफाइल सीट को कैबिनेट मंत्री अजय चंद्राकर का गढ़ माना जाता रहा है. कुरूद में इससे पहले हमेशा भाजपा और कांग्रेस के बीच ही सीधा मुकाबला होता आया है. कुरूद विधानसभा सीट की जनता एक बार भाजपा तो एक बार कांग्रेस के प्रत्याशी को चुन कर विधानसभा भेजती रही है. फिलहाल यहां से अजय चंद्राकर विधायक है जो की केबिनेट में मंत्री भी हैं. इस सीट से लगातार पांचवीं बार अजय चंद्राकर को भाजपा से प्रत्याशी भी बनाए गए है. अजय चंद्राकर ने बीता चुनाव में 27 हजार वोट के भारी अंतर से यहां से जीत हासिल की थी, तो इससे पहले 2008 में 6 हजार वोटों से हार भी चुके है.



क्या कहता है इस सीट का चुनावी समीकरण



लगभग 67 फीसदी साहू वोटर वाले कुरूद में कांग्रेस चुनावी दांव खेलते हुए साहू समाज से ही युवा और महिला प्रत्याशी लक्ष्मीकांता साहू को मैदान में उतारा है. अगर साहू वोटों का ध्रुवीकरण करने में कांग्रेस कामयाब होती है तो ये अजय चंद्राकर के लिए काफी भारी पड़ सकता है. लेकिन कुरूद में कांग्रेस से बागी होकर निर्दलीय चुनाव लड़ रहे नीलम चंद्राकर के कारण कांग्रेस की मुश्किलें भी यहां बढ़ चुकी है. कांग्रेस में बगावत के कारण भाजपा के लिए जीत का लक्ष्य थोड़ा आसान दिखाई देने लगा है. फिर भी कुरूद में विधानसभा चुनाव का इतिहास परिवर्तन का रहा है. यहां की जनता एक ही पार्टी को बार-बार चुनना पसंद नहीं करती. ये पहलू मंत्री अजय चंद्राकर के लिये चिंता का सबब जरूर है. शायद यही वजह है कि भाजपा योगी आदित्यनाथ जैसे बड़े और प्रभावशाली चेहरे को प्रचार में इस्तेमाल चुनाव प्रचार के लिए किया.

जानिए, कौन हैं अजय चंद्राकर

छत्तीसगढ़ की राजनीति में अपनी एक अलग पहचान रखने वाले अजय चंद्राकर का नाम कद्दावर मंत्रियों की फेहरिस्त में शुमार है. अजय चंद्राकर का जन्म 24 जून, 1963 को धमतरी जिले के कुरुद में हुआ था. छात्र जीवन से ही अजय चंद्राकर राजनीति में सक्रिय रहे. कॉलेज के दिनों से ही अजय चंद्राकर तेज तर्रार नेता के रूप में फेमस होने लगे. 1987 में आंदोलन में भाग लेने के आरोप में 7 दिनों तक जेल में भी रहे अजय चंद्राकर पहली बार बीजेपी के टिकट पर 1998 में विधानसभा पहुंचे.

छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद 2003 में बीजेपी सरकार ने उनको ग्रामीण विकास और पंचायत मंत्री पदभार दिया. इसके अलावा अजय चंद्राकर को संसदीय कार्यमंत्री का भी प्रभार दिया गया. 2004 में अजय चंद्राकर का कद बढ़ाया गया और उन्हें साइंस एंड टेक्नोलॉजी के साथ तकनीकी शिक्षा की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई. 2007 में कैबिनेट का विस्तार किया गया, जिसमें उनको उच्च शिक्षा मंत्री बनाया गया.

2008 में हुए विधानसभा चुनाव में अजय चंद्राकर कांग्रेस के लेखराम साहू से हार गए लेकिन 2013 में हुए विधानसभा चुनाव में उन्हे जीत हासिल की थी. इसके बाद बीजेपी ने उन्हें राज्य वित्त आयोग का अध्यक्ष बना. उन्हें छत्तीसगढ़ फुटबाल संघ के अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी दी गई. गृहमंत्री रामसेवक पैकरा जब एक सड़क हादसे में घायल हो गए थे तब कुछ समय तक गृहमंत्री का भी कार्यभार संभाला.

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