Chhattisgarh Election Result 2018: यहां दांव पर गृहमंत्री की साख, क्या रामसेवक पैकरा को मिलेगी तीसरी जीत?

Chhattisgarh Election Result 2018 (छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव परिणाम): गृहमंत्री राम सेवक पैकरा के मुकबाले कांग्रेस ने डॉ. प्रेमसाय सिंह को टिकट दिया. वहीं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ जे ने डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह को मैदान में उतारा. इस बार मैदान में कुल 12 प्रत्याशी हैं.

News18Hindi
Updated: December 11, 2018, 7:20 AM IST
Chhattisgarh Election Result 2018: यहां दांव पर गृहमंत्री की साख, क्या रामसेवक पैकरा को मिलेगी तीसरी जीत?
गृहमंत्री राम सेवक पैकरा.
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Updated: December 11, 2018, 7:20 AM IST
छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनाव में मतदान की प्रक्रिया दो चरणों में पूरी हुई थी और अब वोटों की गिनती सुबह 8 बजे से शुरू है. पहले चरण में 12 नवंबर को 18 सीटों और दूसरे चरण में 20 नवंबर को 72 सीटों पर वोटिंग हुई. नतीजों के आने की आहट के बाद अब जीत हार के समीकरण पर चर्चाएं हो रही हैं. हाई प्रोफाइल सीटों के परिणाम को लेकर सियासी सरगर्मी है. ऐसी ही एक सीट प्रतापपुर विधानसभा सीट है. यहां से रमन कैबिनेट में गृहमंत्री राम सेवक पैकरा भाजपा प्रत्याशी हैं.

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गृह मंत्री राम सेवक पैकरा के मुकबाले कांग्रेस ने डॉ. प्रेमसाय सिंह को टिकट दिया. वहीं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ जे ने डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह को मैदान में उतारा. इस बार मैदान में कुल 12 प्रत्याशी हैं. प्रचार के दौरान दोनों राष्ट्रीय दलों के प्रत्याशियों जकांछ से कड़ी टक्कर मिली. यहां की जनता भी हर बार पार्टी बदल देती है. आदिवासी बाहुल विधानसभा में कांटे की टक्कर देखने को मिली.

परिसीमन के बाद 2008 में कभी घोर नक्सल प्रभावित इलाके रहे वाड्रफ नगर और प्रतापपुर को मिलाकर ये नई सीट बनाई गई. कांग्रेस के कब्जे वाली इस सीट पर दो बार भाजपा के रामसेवक पैकरा ने जीत हासिल की है. कांग्रेस के गढ़ में जीत के बाद पिछली बार उन्हें गृहमंत्री जैसा महत्वपूर्ण जिम्मा रमन कैबिनेट में मिला. गृहमंत्री बनने के कारण इस बार ये सीट काफी हाई प्रोफाइल हो गई है.

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प्रतापुर में सबसे बड़ा मुद्दा वो विवाद है, जो नए जिलों के गठन के बाद खड़ा हुआ है. दरअसल नए जिलों के गठन के बाद इस विधानसभा क्षेत्र में आने वाले वाड्रफनगर को बलरामपुर जिले में शामिल किया गया है, जबकि प्रतापपुर अब सूरजरपुर जिले में आ गया है और इन दोनों ही जगह के लोग इस व्यवस्था से खुश नहीं है.

प्रतापपुर विधानसभा सूरजपुर जिले का प्रतापपुर ब्लाक और बलरामपुर जिले का वाड्रफनगर ब्लाक से मिलकर बना है0 प्रतापपुर और वाड्रफनगर मुख्यालय शहर की शक्ल ले चुके हैं. जबकि इनके अंदरुनी इलाके अभी भी पिछड़े हुए हैं. वाड्रफनगर और प्रतापपुर विकासखंडों के साथ जुड़े उनके जिले का नाम ही यहां चुनावी मुद्दा बन गया है0 दरअसल प्रतापपुर में पेयजल और सड़क की समस्या गंभीर बनी हुई है, जिसे लेकर विधायकजी आने वाले चुनाव में घिरते हुए नजर आते हैं.
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प्रतापपुर के सियासी मिजाज और इतिहास की बात की जाए तो साल 2008 में पिलखा सीट को विलोपित कर वाड्रफनगर और प्रतापपुर को मिला कर इस नए विधानसभा क्षेत्र को बनाया गया. पहले इस विधानसभा का आधा हिस्सा पाल और आधा हिस्सा सूरजपुर विधानसभा के अंतर्गत आता था, जब से ये सीट आरक्षित हुई है तब से यहां कांग्रेस का एक ही चेहरा मैदान में हैं और बीजेपी ने भी सिर्फ दो चेहरों को ही मौका दिया है.

प्रतापुर का सियासी इतिहास
प्रतापपुर के सियासी इतिहास की बात की जाए तो पहले ये सीट पिलखा विधानसभा के नाम से जानी जाती थी. साल 1977 में अस्तित्व में आई इस विधानसभा सीट पर जनता पार्टी के नरनारायण सिंह चुनाव जीते. इसके बाद 1980 में कांग्रेस के टिकट पर डॉ. प्रेमसाय सिंह को पहली बार मौका मिला. उन्होंने बीजेपी के मुरारीलाल सिंह को हराया. 1985 में एक बार फिर दोनों का आमना-सामना हुआ. इस बार फिर प्रेमसाय ने बाजी मारी, लेकिन 1990 में मुरारीलाल सिंह ने प्रेमसाय सिंह को शिकस्त देकर बदला ले लिया.

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गृहमंत्री राम सेवक पैकरा का सियासी सफर
साल 1993 के चुनाव में बीजेपी की टिकट पर पहली बार रामसेवक पैकरा चुनाव मैदान में उतरे, लेकिन उन्हें प्रेमसाय के हाथों हार मिली. फिर 1998 के विधानसभा चुनाव में भी यही नतीजा रहा. 2003 में बीजेपी के रामसेवक पैकरा ने कांग्रेस के प्रेमसाय सिंह को 20 हजार से ज्यादा वोटों से मात देकर पिछली दो हार का बदला लिया. इसके बाद 2008 में हुए परिसीमन में पिलखा सीट के विलोपित होने के बाद प्रतापपुर सीट अस्तित्व में आई. एक बार फिर डॉ. प्रेमसाय सिंह और रामसेवक पैकरा में सियासी भिड़ंत हुई. इस बार प्रेमसाय ने बाजी मार ली और 4000 वोटों से रामसेवक पैकरा को हरा दिया. 2013 में बीजेपी-कांग्रेस ने अपने प्रत्याशी नहीं बदले. इस बार कांग्रेस के प्रेमसाय सिंह को रामसेवक पैकरा ने लगभग 8000 वोटों से शिकस्त दी.

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