खाद की कीमतों से छत्तीसगढ़ के किसान परेशान, कांग्रेस-भाजपा की सियासत जारी

खाद की कीमतें छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए सिरदर्द बन गई हैं.

खाद की कीमतें छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए सिरदर्द बन गई हैं.

Chhattisgarh News : डीज़ल के बाद अब महंगी खाद के बाद किसान दोहरी मार झेलने को मजबूर हैं. लेकिन राजनीतिक पार्टियां एक दूसरे पर आरोप मढ़ रही हैं. समस्या सिर्फ किसानों की ही नहीं है, इसकी मार आम जनता ही झेलेगी.

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रायपुर. मौसम विज्ञानियों के मुताबिक़ छत्तीसगढ़ में 10 जून तक मानसून के दस्तक देने की संभावना है, लेकिन खरीफ की फसल (Kharif Crop) की बोनी की तैयारी में जुटे किसान डीज़ल और खाद के बढे दाम से परेशान हो उठे हैं. खाद के दामों में बेतहाशा बढ़ोत्तरी ने किसानों को चिंतित कर दिया है. उधर कांग्रेस और भाजपा नेता एक दूसरे पर आरोप मढ़ने की राजनीति में लग गए हैं.

इफको ने जबसे खाद कीके दाम बढाए हैं, तबसे किसानों के चेहरों पर चिंता साफ दिख रही है. डीएपी और एनपीके के लिए पहले किसानों को 1200 रुपए देने होते थे, लेकिन अब 1900 रुपए चुकाने पड़ रहे हैं.अब तक किसान डीज़ल की कीमतों से परेशान थे लेकिन अब खाद महंगी होने से संकट गहरा रहा है.

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आरोप प्रत्यारोप
छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार किसानों की इस समस्या के लिए केंद्र की मोदी सरकार को ज़िम्मेदार ठहरा रही है. कांग्रेस प्रवक्ता विकास तिवारी ने कहा 'खेतों में खरीफ फसल की बुआई का समय नज़दीक है और केंद्र सरकार ने खाद और फर्टिलाइज़र के दामों में भारी इज़ाफा कर दिया है.' कोरोना काल में किसानों के साथ इसे तिवारी ने अत्याचार कहा.

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किसानों के मुद्दे पर कांग्रेस और भाजपा के बीच बयानबाज़ी जारी है.

उधर, बीजेपी की दलील है कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में मूल्यों की वृद्धि से खाद के दाम बढे.. बीजेपी के प्रवक्ता संजय श्रीवास्तव का कहना है 'किसानों को राहत देने की बजाए छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार भ्रम फैलाने का काम कर रही है.'



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खेती किसानी के जानकार बता रहे हैं कि डीज़ल की बढ़े दामों के बाद खाद की कीमतें बढ़ने से उत्पादन लागत पर सीधा असर होगा, जिससे किसानों पर बोझ तो बढ़ेगा ही, अनाज की कीमतें भी बढ़ेंगी. होगा यही कि आम जनता को फिर एक बार महंगाई की मार झेलनी होगी.

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