जबरन रिटायर किए गए अधिकारियों की सरकार ने मांगी रिपोर्ट, 50 साल में दे दी गई थी अनिवार्य सेवानिवृत्ति

विभाग के एसीएस, पीएस, सेक्रेटरी और स्पेशल सेक्रेटरी से कहा गया है कि वे छानबीन समिति की अनुशंसा पर सेवानिवृत्त किए गए अधिकारियों-कर्मचारियों की जानकारी भेजे.

Mamta Lanjewar | News18 Chhattisgarh
Updated: July 27, 2019, 10:29 AM IST
जबरन रिटायर किए गए अधिकारियों की सरकार ने मांगी रिपोर्ट, 50 साल में दे दी गई थी अनिवार्य सेवानिवृत्ति
भूपेश बघेल ने विधानसभा चुनाव के दौरान घोषणा की थी कि 20 साल की सेवा या 50 वर्ष की आयु को आधार बनाकर जिन कर्मचारियों को रिटायर किया गया है, सरकार उसकी समीक्षा कराएगी.
Mamta Lanjewar | News18 Chhattisgarh
Updated: July 27, 2019, 10:29 AM IST
छत्तीसगढ़ सरकार ने पूर्ववर्ती भाजपा सरकार के दौरान जबरिया सेवानिवृत्त किए गए अधिकारियों-कर्मचारियों की रिपोर्ट मांगी है. बीजेपी सरकार ने इन अधिकारियों-कर्मचारियों जिनकी 20 साल की सेवा या 50 वर्ष की आयु पूरी हो गई है, अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी थी. मालूम हो कि सीएम भूपेश बघेल ने विधानसभा चुनाव के दौरान घोषणा की थी कि 20 साल की सेवा या 50 वर्ष की आयु को आधार बनाकर जिन कर्मचारियों को रिटायर किया गया है, सरकार उसकी समीक्षा कराएगी. सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी विभागों से सेवानिवृत्त किए गए स्टाफ की लिस्ट भेजने कहा है. विभाग के एसीएस, पीएस, सेक्रेटरी और स्पेशल सेक्रेटरी से कहा गया है कि वे छानबीन समिति की अनुशंसा पर सेवानिवृत्त किए गए अधिकारियों-कर्मचारियों की जानकारी भेजे.

इनकी मांगी गई जानकारी

अफसरों को जानकारी भेजने का एक फार्मेट भी भेजा गया है कि उन्हें क्या-क्या जानकारी देनी है. इसे अ और ब प्रपत्र कहा गया है. जीएडी सचिव कमलप्रीत सिंह ने 10 जुलाई 2019 की स्थिति में संबंधित विभाग, विभागाध्यक्ष व अधीनस्थ दफ्तरों से जानकारी मांगी है कि प्रथम, द्वितीय, तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कितने प्रकरण बने.

रिपोर्ट मांगी गई है कि अलग-अलग विभागों में वीआर देने के कितने अभ्यावेदन मिले.  इनमें से विभाग ने समिति के समक्ष कितने आवेदन पेश किए. इनमें से समिति ने कितने आवेदन मान्य या अमान्य किए. विभाग ने समन्वय में आदेश प्राप्त कर सेवा में वापस लिए गए अधिकारी-कर्मचारी कौन हैं. विभाग ने समन्वय में आदेश तो प्राप्त किया, लेकिन अभ्यावेदन अमान्य कर दिए. इन सब के बाद भी कितने लोगों के केस विचाराधीन है, इसकी जानकारी देने को कहा गया है.

बताते हैं कि जिन अफसरों की ऊंची पहुंच थी वे तो पहले ही बहाल हो गए है, लेकिन कई कर्मचारी अब तक इस फैसले की वजह से पीड़ित है. कुछ वर्ग विशेष से जुड़े लोगों ने तब सरकार पर आरोप लगाया था कि 20-50 की आड़ में उन्हें टारगेट किया जा रहा है.

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विभाग के एसीएस, पीएस, सेक्रेटरी और स्पेशल सेक्रेटरी से कहा गया है कि वे छानबीन समिति की अनुशंसा पर सेवानिवृत्त किए गए अधिकारियों-कर्मचारियों की जानकारी भेजे.


निगम-मंडलों की रिपोर्ट मांगी
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जीएडी ने विभागीय सचिवों से 50-20 मामले में एक दूसरी रिपोर्ट भी मांगी है.  यह निगम, मंडलों प्राधिकरणों, स्वायत्तशासी संस्थाओं से संबंधित है. इसमें भी पूछा गया है कि 10 जुलाई की स्थिति में प्रथम, द्वितीय, तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के जबरिया सेवानिवृत्त किए मामले कितने है. अनिवार्य सेवानिवृत्ति के खिलाफ कितनों ने आवेदन लगाया. विभाग ने अभ्यावेदन समिति को कितने केश पेश किए. इनमें से समिति ने कितने प्रकरण मान्य या अमान्य किए. विभाग ने समन्वय में आदेश प्राप्त करके कितने कर्मचारियों को सेवा में बहाल किया या विभाग ने समन्वय से आदेश तो लिया, लेकिन नौकरी नहीं लौटाई. अब विभाग में 20-50 से संबंधित कितने केस पेंडिंग है.

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First published: July 27, 2019, 10:25 AM IST
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