भिलाई के निजी मेडिकल कॉलेज को खरीदेगी छत्तीसगढ़ सरकार, CM भूपेश ने किया ऐलान

कॉलेज परिसर में चंदूलाल चन्द्राकर की प्रतिमा का अनावरण सीएम भूपेश बघेल ने किया.

कॉलेज परिसर में चंदूलाल चन्द्राकर की प्रतिमा का अनावरण सीएम भूपेश बघेल ने किया.

Chhattisgarh News: देश में एक ओर जहां शासकीय संस्थाओं का निजीकरण करने का आरोप केन्द्र की बीजेपी सरकार (BJP Government) पर लग रहे हैं, वहीं दूसरी ओर छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) सरकार निजी संस्थान को सरकारी बनाने की कवायद कर रही है.

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रायपुर. देश में एक ओर जहां शासकीय संस्थाओं का निजीकरण करने का आरोप केन्द्र की बीजेपी सरकार (BJP Government) पर लग रहे हैं, वहीं दूसरी ओर छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) सरकार निजी संस्थान को सरकारी बनाने की कवायद कर रही है.  मुख्यमंत्री भूपेश बघेल (CM Bhupesh Baghel) ने दुर्ग जिले के भिलाई (Bhilai) स्थित चंदूलाल चंद्राकर मेमोरियल मेडिकल कॉलेज के अधिग्रहण की घोषणा की. उन्होंने कहा कि जल्द ही इस मेडिकल कॉलेज को शासकीय मेडिकल कॉलेज बनाने की प्रक्रिया आरंभ की जाएगी. इसके लिए कैबिनेट में जल्द ही प्रस्ताव लाया जाएगा तथा अन्य प्रक्रिया आरंभ की जाएगी.

सीएम भूपेश बीते मंगलवार को दुर्ग जिले के कचांदुर में स्वर्गीय चंदूलाल चंद्राकर की पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उक्त आशय की घोषणा की. बता दें कि चंदूलाल चंद्राकर मेमोरियल मेडिकल कॉलेज के संचालन में दिक्कत होने के चलते प्रबंधन ने सरकार से प्रदेश में मेडिकल एजुकेशन की बेहतरी को देखते हुए सरकार से इस कॉलेज का अधिग्रहण आग्रह किया था. सीएम भूपेश बघेल ने इस मौके पर कहा कि दुर्ग जिले में मेडिकल शिक्षा को मजबूत करने के लिए चंदूलाल चंद्राकर का सपना था कि यहां मेडिकल कॉलेज खुले, इस पर डॉ. एपी चन्द्राकर से उनकी लंबी चर्चा हुई थी और इसके पश्चात क्षेत्र का पहला मेडिकल कॉलेज खुला था.

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प्रबंधन ने बताई थी दिक्कतें
सीएम भूपेश ने कहा कि अभी इस मेडिकल कॉलेज के संचालन में कुछ दिक्कतें आ रही थी और प्रबंधन ने अपनी दिक्कतें शासन से साझा की थी. उन्होंने कहा कि चंदूलाल चंद्राकर का देखा गया यह सपना फले फुले इसे आगे बढ़ाए रखना है. मुख्यमंत्री ने इस मौके पर चंदूलाल चंद्राकर से जुड़ी हुई स्मृतियों को साझा किया. उन्होंने कहा कि चंदूलाल चंद्राकर हमेशा जमीन से जुड़े रहे. उन्होंने लगातार विदेश यात्राएं की, लेकिन अपना छत्तीसगढि़या स्वभाव नहीं छोड़ा. जब भी विदेश जाते, अपने साथ दातुन लेकर जाते अपने साथ ठेठरी खुरमी लेकर जाते. वे विशाल व्यक्तित्व के धनी थे. उनकी रूचि का दायरा काफी व्यापक था. उन्हें फोटोग्राफी का बहुत शौक था और देश-विदेश में रिपोर्टिंग के साथ ही उनकी फोटोग्राफी भी काफी मशहूर थी.

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