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मॉब लिंचिंग के पीड़ितों को मुआवजा देगी छत्तीसगढ़ सरकार, ये हो चुके हैं घटना के शिकार

निलेश त्रिपाठी | News18 Chhattisgarh
Updated: June 25, 2019, 6:09 PM IST
मॉब लिंचिंग के पीड़ितों को मुआवजा देगी छत्तीसगढ़ सरकार, ये हो चुके हैं घटना के शिकार
साल 2018 सुप्रीम कोर्ट ने उन्मादी भीड़ की हिंसा रोकने के लिए राज्यों को क़ानूनी कार्रवाइयों के अलावा मुआवज़ा संबंधी नीति बनाने का निर्देश जारी किया था.

जुलाई 2018 सुप्रीम कोर्ट ने उन्मादी भीड़ की हिंसा रोकने के लिए राज्यों को कानूनी कार्रवाइयों के अलावा मुआवज़ा संबंधी नीति बनाने का निर्देश जारी किया था.

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छत्तीसगढ़ की भूपेश सरकार ने मॉब लिंचिंग यानी भीड़ जनित हिंसा पीड़ितों को मुआवजा देने का फैसला लिया है. इसके लिए राज्य सरकार ने 2011 में बने पीड़ित क्षतिपूर्ति कानून में संशोधन किया है. इस तरह की घटना में जान गंवाने वालों के परिजनों को सरकार 3 लाख रुपये की सहायता देगी. इसके अलावा मॉब लिंचिंग में घायलों के इलाज का खर्च भी सरकार ही वहन करेगी. इस संबंध में सरकार द्वारा दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं.

जुलाई 2018 सुप्रीम कोर्ट ने उन्मादी भीड़ की हिंसा रोकने के लिए राज्यों को क़ानूनी कार्रवाइयों के अलावा मुआवजा संबंधी नीति बनाने का निर्देश जारी किया था. छत्तीसगढ़ में भी ऐसे मामले हैं, जिनमें कई लोग गलतफहमी के चलते मॉब लिंचिंग का शिकार हो गए हैं. अब छत्तीसगढ़ सरकार के निर्णय के बाद ऐसे लोगों को राहत मिलने की उम्मीद की जा रही है.

छत्तीसगढ़ में मॉब लिंचिंग के मामले
छत्तीसगढ़ में मॉब लिंचिंग का ताजा मामला 6 मई 2019 को ही सामने आया था. जांजगीर-चांपा जिले के तालदेवरी गांव में एक सड़क दुर्घटना के बाद भीड़ ने प्रकाश भारती नामक ड्राइवर को कई घंटों तक पीट-पीट कर मार डाला था. बाद में पुलिस ने इस मामले में कई लोगों की गिरफ्तारी की थी.

बच्चा चोरी की अफवाह और मॉब लिंचिंग
छत्तीसगढ़ में पिछले पांच सालों में बच्चा चोरी गैंग सक्रिय होने की अफवाह में मॉब लिंचिंग की कई घटनाएं सामने आई हैं. जून 2018 में बस्तर के आसानार और नगरनार सहित 50 गांवों में इस तरह की अफवाह फैली और तीन गांवों में ग्रामीणों ने अनजान लोगों की पिटाई कर दी.

जून 2018 में ही सरगुजा जिले के मेंड्राकला गांव में बच्चा चोर के शक में ग्रामीणों ने एक विक्षिप्त व्यक्ति को पीट-पीटकर मार डाला था. उसी इलाके में लखनपुर के अंधला और दरिमा के बेलखरिखा में भी बच्चा चोर के शक में दो लोगों को भीड़ ने पीट-पीट कर अधमरा कर दिया था. एक आंकड़े के मुताबिक मई 2015 से मई 2019 तक छत्तीसगढ़ में मॉब लिंचिंग की करीब 15 घटनाएं हुईं, इनमें से करीब 12 बच्चा चोरी के शक से जुड़ीं थीं.एक संवेदनशील शुरुआत
छत्तीसगढ़ राज्य के गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने मीडिया से चर्चा में कहा कि समान्य तौर पर जिसका कोई दोष नहीं होता, ऐसे लोग ही मॉब लिंचिंग का शिकार हो जाते हैं. इसका बुरा असर उनके परिवार पर पड़ता है. ऐसे लोगों को हमारी सरकार ने राहत देने की कोशिश की है. राज्य सरकार ने एक संवेदनशील शुरुआत की है. आने वाले दिनों में इस कानून से जुड़े दूसरे सभी पहलू पर समय-समय पर विचार किया जाएगा.

50 फीसदी अधिक मुआवजा
राज्य सरकार के निर्णय के अनुसार मॉब लिंचिंग पीड़ित के अवयस्क (नाबालिग) होने की स्थिति में 50 फीसदी अतिरिक्त राहत राशि दी जाएगी. अफसरों ने बताया कि पीड़ित के 80 फीसद दिव्यांग होने की स्थिति में दो लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा. यदि वह नाबालिग है तो यह राशि तीन लाख रुपये हो जाएगी. भीड़ जनित हिंसा पीड़ितों के इलाज की भी व्यवस्था सरकार करेगी. पीड़ित को निशुल्क इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी. शुल्क लेने की आवश्यकता भी पड़ी तो केवल वास्तविक मूल्य ही लिया जाएगा.

मॉब लिंचिंग ही रोका जाए
भारतीय जनता युवा मोर्चा के पदाधिकारी नितेश मिश्रा कहते हैं कि मॉब लिंचिंग पीड़ितों को मुआवजा देना सरकार की अच्छी पहल है, लेकिन सिर्फ इतना कर सरकार अपनी जिम्मेदारियों से बच नहीं सकती है. सरकार को प्रदेश में कानून व्यवस्था ऐसी करनी चाहिए कि मॉब लिंचिंग की कोई घटना ही न हो.

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First published: June 25, 2019, 5:12 PM IST
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