लोक गीत के 'भीष्म पितामह' के नाम का अवार्ड देगी छत्तीसगढ़ सरकार, जानिए कौन हैं ये शख्स

छत्तीसगढ़ी लोक गीत का भीष्म पितामाह कहे जाने वाले खुमान साव का निधन 9 जून 2019 को 90 वर्ष की आयु में निधन हो गया.

निलेश त्रिपाठी | News18 Chhattisgarh
Updated: June 17, 2019, 10:58 AM IST
लोक गीत के 'भीष्म पितामह' के नाम का अवार्ड देगी छत्तीसगढ़ सरकार, जानिए कौन हैं ये शख्स
लोक गीत के प्रख्यात चेहरा खुमान साव को श्रद्धांजलि देते मुख्यमंत्री भूपेश बघेल.
निलेश त्रिपाठी | News18 Chhattisgarh
Updated: June 17, 2019, 10:58 AM IST
छत्तीसगढ़ी लोक गीत व संगीत की देश दुनिया में पहचान बनाने वाले प्रसिद्ध संगीतकार खुमान के नाम पर छत्तीसगढ़ सरकार अवार्ड स्थापित करेगी. कला के क्षेत्र में खुमान साव के नाम पर पुरस्कार देने की घोषणा छत्तीसगढ़ की भूपेश सरकार ने की है. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसका ऐलान किया है. हर वर्ष समारोह का आयोजन कर कला के क्षेत्र में खुमान साव के नाम पर अवार्ड दिया जाएगा.

छत्तीसगढ़ी लोक गीत का भीष्म पितामाह कहे जाने वाले खुमान साव का निधन 9 जून 2019 को 90 वर्ष की आयु में निधन हो गया. उन्होंने राजनांदगांव जिला स्थित अपने पैतृक गांव ठेकुआ में अंतिम सांस ली. उनके अंतिम संस्कार पर मुक्ति धाम में उनके ही 'गीत माटी होहि तोर चोला रे संगी' गूंजता रहा. बीते 16 जून को राजधानी रायपुर में ‘सुरता खुमान साव के’ श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी शामिल हुए. यहीं सीएम बघेल ने खुमान साव के नाम पर अवार्ड देने का ऐलान किया.


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चंदैनी गोंदा संस्था की स्थापना
छत्तीसगढ़ के संगीत सम्राट कहे जाने वाले खुमान साव ने प्रदेश की लोक कला और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए चंदैनी गोंदा संस्था की स्थापना की. इसके माध्यम से उन्होंने पांच हजार से अधिक प्रस्तुतियां दीं. इसके साथ ही आम लोगों की बोली में जमीन से जुड़े उनके गीत प्रदेश, देश की सरहदें पार कर सात समुंदर पार तक जा पहुंचे.

राष्ट्रपति से सम्मानित
संगीत के क्षेत्र में उनके विशेष योगदान के लिए भारत सरकार की ओर से खुमान साव को संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. राष्ट्रपति रहते प्रणव मुखर्जी ने उन्हें सम्मानित किया था. खुमान साव छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से प्रदान किया जाने वाला मंदराजी सम्मान को न लेकर कला जगत में सनसनी पैदा कर दी थी. वे सम्मान देने के दोहरे मापदंड से असहमत और आहत थे. वर्ष 1929 को जन्मे खुमान साव की बचपन से ही रुचि संगीत में रही. किशोर अवस्था में वे नाचा के युग पुरुष दाऊ मंदराजी के साथ जुड़ गए थे. 70 के दशक में उनकी मुलाकात दाऊ रानचंद्र देशमुख से हुई और यहीं से उन्होंने अपने जीवन की एक नई शुरुआत की. चंदैनी-गोंदा में वे बतौर संगीत निर्देशक काम करने लगे.

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First published: June 17, 2019, 10:54 AM IST
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