छत्तीसगढ़ में लगातार घटी है मायावती की 'माया', इस नीति से वोट बैंक बढ़ाने की कोशिश

बसपा प्रत्याशियों की परफाॅर्मेंस की बात करें तो साल 2008 के चुनाव में विधानसभा की 90 सीटों में से 69 सीटों पर जमानत जब्त हो गई थी. फिर साल 2013 के चुनाव में यह आंकड़ा बढ़कर 84 सीटों का हो गया.

Surendra Singh | News18 Chhattisgarh
Updated: October 11, 2018, 8:51 PM IST
Surendra Singh | News18 Chhattisgarh
Updated: October 11, 2018, 8:51 PM IST
छत्तीसगढ़ में चुनावी पारा चढ़ चुका हैं. पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी की पार्टी के साथ गठबंधन कर खुद को मजबूत मान रही बसपा को चुनावी टॉनिक देने के लिए खुद पार्टी सुप्रीमो मायावती 13 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ आ रही हैं. छत्तीसगढ़ में बसपा अपनी पार्टी की जड़ों को मजबूत करने की कोशिश कर रही है. इसके लिए बसपा को पार्टी सुप्रीमो मायावती की 'माया' पर भरोसा है. इसलिए पार्टी बिलासपुर में होने वाली मायवती की आमसभा में भीड़ जुटाने के लिए पूरी ताकत लगा रही है.

बहुजन समाज पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष ओपी बाजपेयी का कहना है कि मायावती की आमसभा को ऐतिहासिक बनाने की कोशिश की जा रही है. बिलासपुर के सरकंडा में होने वाली इस आमसभा में पूरे छत्तीसगढ़ से लोग पहुंचेगे. इसके लिए पार्टी के पदाधिकारी व कार्यकर्ता हर स्तर पर काम करे हैं. ओपी बाजपेयी का मानना है कि मायावती की आमसभा का सीधा लाभ बसपा को आगामी विधानसभा चुनाव में होगा.

मायावती की आमसभा से बसपा को लाभ के पीछे पार्टी का अपना तर्क है. बसपा के पदाधिकारी कहते हैं कि प्रदेश में कुल 1 करोड़ 81 लाख 79 हजार 435 मतदाताओं में से करीब 12 फीसदी एससी वर्ग के मतदाता हैं. एससी वर्ग बसपा का वोट कैडर वर्ग है. ऐसे में नीतिगत तरीके से एससी बाहुल्य सीटों वाले बिलासपुर संभाग में मायावती की सभा का आयोजन किया जा रहा है.

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Assembly Election in Chhattisgarh
बसपा प्रमुख मायावती (File Photo).

बसपा सुप्रीमो मायावती पर पार्टी का प्रदेश संगठन भले ही पूरा भरोसा करता हो, लेकिन लेकिन पिछले चुनाव के आंकड़ों पर नजर डालें तो छत्तीसगढ़ में मायावती की पार्टी का बहुमत घटता ही जा रहा है. साल 2008 के विधानसभा चुनाव में बसपा को कुल मतदान का करीब 6 फीसदी वोट मिले थे, जो 2013 के चुनाव में घटकर करीब 4 फीसदी हो गया.
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इतना ही नहीं यदि प्रत्याशियों के परफॉर्मेंस की बात करें तो साल 2008 के चुनाव में विधानसभा की 90 सीटों में से 69 सीटों पर बसपा प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई थी. फिर साल 2013 के चुनाव में यह आंकड़ा बढ़कर 84 सीटों का हो गया. इन दोनों चुनावों से पहले भी मायवती ने छत्तीसगढ़ में आमसभा की थी.

आंकड़े बताते हैं कि छत्तीसगढ़ में बसपा लगातार कमजोर ही हुई है. यही कारण है कि प्रदेश प्रमुख राष्ट्रीय दल भाजपा और कांग्रेस बहुजन समाज पार्टी और मायावती के दौरे को लेकर ज्यादा चिंता जाहिर नहीं कर रहे हैं. भाजपा प्रवक्ता सच्चिदानंद उपासने का कहना है कि जिस पार्टी को उनके गढ़ उत्तर प्रदेश की जनता ने नकार दिया हो वो छत्तीसगढ़ में क्या असर दिखा पाएगी. बसपा से प्रदेश भाजपा को कोई नुकसान नहीं होगा.

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दूसरी ओर कांग्रेस प्रवक्ता आरपी सिंह का कहना है कि छत्तीसगढ़ में बसपा का कोई जनाधार नहीं है. समर्थकों की संख्या भी लगातार कम हो रही है. ऐसे में इसका कोई असर कांग्रेस पर नहीं होगा.

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