छत्तीसगढ़ में 'बाबूजी' के नाम से जाने जाते हैं मोतीलाल वोरा

मुख्यमंत्री, राज्यपाल, मंत्री सहित तमाम पदों को संभाल चुके मोतीलाल वोरा कांग्रेस के दिग्गज नेताओं में शुमार हैं.

News18 Chhattisgarh
Updated: July 3, 2019, 5:50 PM IST
छत्तीसगढ़ में 'बाबूजी' के नाम से जाने जाते हैं मोतीलाल वोरा
ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद से राहुल गांधी के इस्तीफा देने के बाद मोतीलाल वोरा को पार्टी का अंतरित अध्यक्ष बनाया गया है.
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Updated: July 3, 2019, 5:50 PM IST
ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद से राहुल गांधी के इस्तीफा देने के बाद मोतीलाल वोरा को पार्टी का अंतरिम अध्यक्ष बनाने की चर्चा है. हालांकि खुद मोतीलाल वोरा ने इसका खंडन किया है. उन्होंने कहा कि मुझे तो कोई जानकारी नहीं है, वर्किंग कमेटी की बैठक में ही सारा निर्णय होता है, जो जनरल सेक्रेटरी है वो ही कह सकते हैं. कांग्रेस के कॉन्स्टीट्यूशन के हिसाब से भी कांग्रेस प्रेसिडेंट का निर्णय भी वर्किंग कमेटी की बैठक में ही होता है.

बहरहाल, व्यावसायी से पत्रकार और पत्रकार से नेता बने मोतीलाल वोरा एक समय छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में ट्रांसपोर्ट कंपनी चलाते थे. मोतीलाल वोरा अपने समय के नामी पत्रकार भी रहे. जानते हैं मोतीलाल वोरा से जुड़ी खास बातें.

9 मार्च, 1985 को अर्जुन सिंह ने अपने नेतृत्व में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद दोबारा मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. लेकिन कुछ दिन बाद ही मध्यप्रदेश की कांग्रेस सरकार का मुखिया बदल गया और नये मुखिया के रूप में अब के छत्तीसगढ़ के दुर्ग का प्रतिनिधित्व करने वाले मोतीलाल वोरा ने शपथ ली. इसके बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश के राज्यपाल सहित कांग्रेस के तमाम ओहदों की जिम्मेदारियां निभाईं.

File Photo.


कौन हैं मोतीलाल वोरा
मोतीलाल वोरा का जन्म राजस्थान के नागौर जिले में 20 दिसम्बर, 1928 में हुआ था. इसके बाद उनका परिवार तब के मध्यप्रदेश वर्तमान में छत्तीसगढ़ शिफ्ट हो गया. मोतीलाल वोरा ने रायपुर और कलकत्ता से शिक्षा प्राप्त की. उन्होंने कई वर्षो तक पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य करते हुए कई समाचार पत्रों का प्रतिनिधित्व किया. साल 1968 में राजनीतिक क्षितिज पर वे उभर कर आये. कांग्रेस ज्वाइन किया और 1972 में उन्हें मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में दुर्ग सीट से जीत मिली और मध्य प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के उपाध्यक्ष नियुक्त हुए. इसके बाद 1977 और 1980 में फिर से विधानसभा चुनाव में जीत मिली.

उच्च शिक्षा मंत्री रह चुके हैं वोरा
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सन् 1980 में अर्जुन सिंह मंत्रिमण्डल में उन्हें उच्च शिक्षा विभाग का दायित्व सौंपा गया. ये 1983 में कैबिनेट मंत्री हुए. इसके बाद वे मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष नियुक्ति हुए. 13 मार्च, 1985 को मोतीलाल वोरा मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बने. इसके बाद 13 फ़रवरी, 1988 में उन्होंने मुख्यमंत्री पद से त्याग पत्र देकर 14 फ़रवरी, 1988 में केन्द्र में स्वास्थ्य परिवार कल्याण और नागरिक उड्डयन मंत्रालय का कार्यभार ग्रहण किया.

1988 में पहली बार बने राज्यसभा सांसद
मोतीलाल वोरा अप्रैल 1988 में मध्य प्रदेश से राज्यसभा के लिये चुने गये. 26 मई, 1993 से 3 मई, 1996 तक उत्तर प्रदेश के राज्यपाल के पद पर आसीन रहे. साल 1998-99 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें राजनांदगांव संसदीय क्षेत्र से मैदान में उतारा, लेकिन बीजेपी के प्रत्याशी डॉ. रमन सिंह से वे चुनाव हार गए.

लंबे समय तक रहे कांग्रेस के कोषाध्यक्ष
लोकसभा चुनाव हारने के बाद 2002 में कांग्रेस कोटे की सीट से मोतीलाल वोरा राज्यसभा में लाए गए. इसके बाद पार्टी ने उन्हें संगठन का राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बनाया. मोतीलाल वोरा को 2018 में पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव से पहले इस पद से मुक्त कर दिया गया. अब पार्टी ने उन्हें अंतरिम राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया है.

बाबूजी के नाम से फेमस
सरकार और कांग्रेस में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाने वाले 91 वर्षीय मोतीलाल वोरा को छत्तीसगढ़ की वर्तमान राजनीति में बाबूजी के नाम से जाना जाता है. वोरा लगभग दो दशक पार्टी के कोषाध्यक्ष रहे. अब भी वे गांधी परिवार के खास माने जाते हैं. इतने लंबे सांगठनिक कार्यकाल के दौरान वोरा ने अपने बेटे अरुण वोरा को सियासत में जमाने की कोशिश की. अरुण 1993 में जीत के बाद लगातार तीन विधानसभा चुनाव हारे, मगर 2013 में फिर पापा की बदौलत टिकट मिला और इस बार चुनाव जीतने में वह सफल रहे. इसके बाद 2018 के विधानसभा चुनाव में भी उन्हें जीत मिली. अरुण भी मोतीलाल वोरा को बाबूजी कहकर ही बुलाते हैं.

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First published: July 3, 2019, 5:08 PM IST
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