लोकसभा चुनाव : कांग्रेस के इन दिग्गज नेताओं के इलाके में इस बार कम हुई वोटिंग!

मतदान के बाद सामने आए ये आंकड़े कई तरह के सवाल खड़े कर रहे हैं.

Awadhesh Mishra | News18 Chhattisgarh
Updated: April 29, 2019, 11:16 AM IST
लोकसभा चुनाव : कांग्रेस के इन दिग्गज नेताओं के इलाके में इस बार कम हुई वोटिंग!
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Awadhesh Mishra | News18 Chhattisgarh
Updated: April 29, 2019, 11:16 AM IST
छत्तीसगढ़ के सभी 11 सीटों पर 3 चरणों में लोकसभा चुनाव संपन्न हो चुका है. अब इंतजार है 23 मई का, जब मतगणना होगी और प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला होगा. लेकिन मतगणना से पहले सियासी पंडित कई तरह के गुणा-गणित में उलझे दिखाई दे रहे हैं. इन्हीं में से एक सियासी गणित है, दिग्गजों के क्षेत्र में मतदान का कम होना.

कांग्रेस के तमाम दिग्गज, चाहे वह खुद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल हों या फिर मंत्री टीएस सिंहदेव, ताम्रध्वज साहू, शिव डहरिया, रविंद्र चौबे, रूद्र गुरू, ड़ॉ प्रेमसाय सिंह टेकाम की, या फिर विधानसभा अध्यक्ष चरणदास महंत विधायक और वरिष्ठ नेता अमरजीत भगत, धनेंद्र साहू, रामपुकार सिंह, इन तमाम नेताओं के क्षेत्र में साल 2014 की तुलना में इस साल हुए लोकसभा चुनाव में वोटिंग का प्रतिशत कम हुआ है. मतदान के बाद सामने आए ये आंकड़े कई तरह के सवाल खड़े कर रहे है.



लोकसभा चुनाव में हुए कम मतदान के मामले में अब राजनीति शुरू हो गई है. इस मामले में कांग्रेस और भाजपा दोनों एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं. कम मतदान के मामले में छत्तीसगढ़ बीजेपी प्रवक्ता संजय श्रीवास्तव का कहना है कि अगर कांग्रेस के दिग्गज नेताओं के इलाके में मतदान के प्रतिशत कम हुआ है, तो इससे कई तरह के सवाल खड़े होते हैं. इससे निश्चित तौर पर उन नेताओं की कार्यशैली पर भी प्रश्न उठता है. वहीं कांग्रेस प्रवक्ता आरपी सिंह का कहना है कि छत्तीसगढ़ में हुए मतदान ने पिछले साल के रिकॉर्ड तोड़ा है. ये बात जरूर है कि शरही क्षेत्रों में मतदान कम हुआ है तो वहीं ग्रामीण इलाकों में मतदान ज्यादा हुआ है.

एक नजर इन नेताओं के क्षेत्रों में घटे मतदान प्रतिशत के आकड़ों पर...

विधानसभा का नाम - पाटन
क्षेत्र के नेता- मुख्यमंत्री भूपेश बघेल
विधानसभा 2018    लोकसभा 2014     लोकसभा 2019
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82.93                     77.78                   73

विधानसभा का नाम- अंबिकारपुर
क्षेत्र के नेता- मंत्री टीएस सिंहदेव
विधानसभा 2018             लोकसभा 2014                लोकसभा 2019
78.47                              75.42                              71.90

विधानसभा का नाम- दुर्ग ग्रामीण
क्षेत्र के नेता- मंत्री ताम्रध्वज साहू
विधानसभा 2018                  लोकसभा 2014                 लोकसभा 2019
74.15                                  68.78                               65.43

विधानसभा का नाम- साजा
क्षेत्र के नेता- मंत्री रविंद्र चौबे
विधानसभा 2018              लोकसभा 2014                 लोकसभा 2019
82.39                               72.33                                67.50

विधानसभा का नाम- आरंग
क्षेत्र के नेता- मंत्री डॉ शिवकुमार डहरिया
विधानसभा 2018           लोकसभा 2014              लोकसभा 2019
76.80                            69.54                           68.73

विधानसभा का नाम- अहिवारा
क्षेत्र के नेता- मंत्री रूद्र कुमार गुरू
विधानसभा 2018               लोकसभा 2014                लोकसभा 2019
72.93                                 70.36                              67

विधानसभा का नाम- प्रतापपुर
क्षेत्र का नाम- मंत्री डॉ प्रेमसाय सिंह टेकाम
विधानसभा 2018                   लोकसभा 2014                    लोकसभा 2019
83.38                                        75                                    70

विधानसभा का नाम- कोरबा
क्षेत्र के नेता- विधानसभा अध्यक्ष डॉ चरणदास महंत
विधानसभा 2018                       लोकसभा 2014                लोकसभा 2019
71.56                                          66.30                           62.83

विधानसभा का नाम- अभनपुर
क्षेत्र के नेता- वरिष्ठ विधायक धनेंद्र साहू
विधानसभा 2018                   लोकसभा 2014                 लोकसभा 2019
84.04                                    74.41                              74.12

विधानसभा का नाम- पत्थलगांव
क्षेत्र के नेता- वरिष्ठ विधायक रामपुकार सिंह
विधानसभा 2018                    लोकसभा 2014                 लोकसभा 2019
80.39                                      74.32                                68.50

भले ही नेताओं के बयान कुछ भी हो लेकिन आंकड़े बताने के लिए काफी हैं, कैसे दिग्गजों के क्षेत्र में मत का प्रतिशत लगातार घटा है. राजनीतिक विश्लेषक रविकांत कौशिक का कहना है कि लोकसभा चुनाव में कम मतदान का होना कई सवाल खड़े करता है. विधानसभा चुनाव में जीत के बाद लोकसभा चुनाव में कम मतदान का होना, कुछ नए विधायकों की विसंगति और कुछ इलाकों में पार्टी के ओवर कांन्फिडेंस को दिखाता है.

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