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लोकसभा चुनाव 2019: छत्तीसगढ़ में प्रचार के रण से क्यों गायब हैं राहुल-प्रियंका गांधी?

प्रियंका और राहुल गांधी (फाइल फोटो)

प्रियंका और राहुल गांधी (फाइल फोटो)

बीते नवंबर-दिसंबर में छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव हुआ था. इस दौरान राहुल गांधी ने चुनावी सभा से लेकर रोड-शो तक किए थे. मगर लोकसभा के रण से अब तक राहुल गांधी नदारद ही हैं. इससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं तो वहीं इस पर राजनीति भी हो रही है.

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छत्तीसगढ़ में लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण का मतदान होने वाला है. चुनाव प्रचार के लिए भाजपा सहित कांग्रेस के स्टार प्रचारकों ने चुनावी सभा की. बात अगर बीते विधानसभा चुनाव की करें तो सभी पार्टियों ने पूरे दम-खम से चुनाव प्रचार किया था. कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी भी छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनाव के दौरान अपनी ऊर्जा और उत्साह का प्रदर्शन किया था. मगर कांग्रेस को सत्ता तक पहुंचाने वाले राहुल गांधी लोकसभा चुनाव के रण से बिल्कुल ही नदारद हो गए हैं.

भूपेश बघेल सहित तमाम नेताओं की लाख कोशिशों के बाद भी राहुल गांधी का बस्तर में चुनावी दौरा नहीं हो सका. इतना ही नहीं प्रियंका में इंदिरा गांधी की छवि देखने वाले कांग्रेसी नेताओं ने प्रियंका की बस्तर में सभा के महज सपने ही दिखाए. पहले और दूसरे चरण के चुनाव में राहुल गांधी सहित आला नेता छत्तीसगढ़ क्यों नहीं आए? ये एक बड़ा प्रश्न बना हुआ है. बीजेपी इसे राहुल गांधी का डर करार देते हुए संभावित हार बताते हुए नक्सली कनेक्शन से जोड़ रही है, वहीं कांग्रेस राहुल गांधी के छत्तीसगढ़ से नदारद रहने का कारण बताने के बदले बीजेपी पर तंज कस रही है.

राहुल गांधी (फाइल फोटो)




इस पूरे मामले में छत्तीसगढ़ बीजेपी के प्रवक्ता गौरीशंकर अग्रवाल का कहना है कि राहुल गांधी विधानसभा चुनाव के दौरान कई बार छत्तीसगढ़ आए. इस दौरान उन्होने जनता से कई वादे किए. लेकिन इन वादों को उन्होंने पूरा नहीं किया. अब जनता के सवाल से बचने के लिए वे छत्तीसगढ़ नहीं आ रहे हैं. उन्होंने कहा कि बस्तर में विधायक भीमा मंडावी की मौत के बाद कांग्रेस की कलई पूरी तरीके से खुल गई है. वहीं कांग्रेस प्रवक्ता विकास तिवारी का कहना है कि विधानसभा की हार के बाद बीजेपी थर्राई हुई है. बस्तर से गांधी परिवार का गहरा रिश्ता है. भाजपा इन बातों का जिक्र सिर्फ अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए करती है.
प्रियंका गांधी (फाइल फोटो)


दरअसल विधानसभा चुनाव में राहुल गांधी के सामने छत्तीसगढ़ के नेताओं ने एकजुटता का परिचय तो दिया था. मगर सत्ता मिलते ही पूर्व की तरह अपनी ढपली, अपना राग शुरू हो गया. बात चाहे मुख्यमंत्री पद की हो या फिर मंत्री मंडल गठन की या फिर लोकसभा के लिए प्रत्याशी चयन की. आला नेताओं के बीच सामंजस्य का भी आभाव भी साफ तौर पर देखा गया. इन तमाम हकीकतों के बीच कांग्रेस ने मिशन 11 का लक्ष्य तो रखा. मगर लक्ष्य पूरा कैसे होगा? इसकी ठोस रणनीति धरातल पर दिखाई नहीं दी.

कांग्रेस


यही वजह बनी की कांग्रेस के रायपुर प्रत्याशी प्रमोद दुबे ने अपना अलग से घोषणा पत्र जारी कर कांग्रेस के भीतर खाने मचे भयंकर घमासान को सार्वजिक कर दिया है.

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