छत्तीसगढ़: ICMR से प्रतिबंधित चीनी किट से MLA और अफसरों का हुआ कोरोना टेस्ट, जांच की मांग
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छत्तीसगढ़: ICMR से प्रतिबंधित चीनी किट से MLA और अफसरों का हुआ कोरोना टेस्ट, जांच की मांग
कोरोना वायरस के नए टेस्ट किट से सिर्फ 20 मिनट में संक्रमण की पहचान हो सकती है.

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में आईसीएमआर (ICMR) द्वारा प्रतिबंधित चीनी कंपनी के रैपिड एंटीबॉडी ब्लड टेस्ट किट का उपयोग COVID-19 के परीक्षण के लिए किया गया.

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रायपुर. छत्तीसगढ़ में पिछले 72 घंटे में कोरोना वायरस (Covid-19) संक्रमण के कोई भी नए मामले नहीं आए. इससे पहले 24 अप्रैल को रायपुर एम्स के एक नर्सिंग स्टाफ में संक्रमण की पुष्टि हुई थी. हॉटस्पॉट कोरबा के कटघोरा और एम्स के नर्सिंग स्टाफ के अलावा पूरे अप्रैल महीने में अब तक हुई जांचों में कोई भी नया संक्रमित मरीज प्रदेशभर में नहीं मिला. इसके बावजूद स्वास्थ्य महकमे की कार्यशैली और गंभीरता पर सवाल उठ रहे हैं. क्योंकि बिलासपुर में आईसीएमआर (ICMR) द्वारा प्रतिबंधित की गई चीनी कंपनी की रैपिड एंटीबॉडी ब्लड टेस्ट किट का उपयोग कोविड-19 के परीक्षण के लिए किया गया.

छत्तीसगढ़ भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्च के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य नितेश मिश्रा ने प्रतिबंधित चीनी किट से विधायक और अफसरों की जांच किए जाने पर सवाल उठाए. नितेश ने एक ट्वीट कर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से इस मामले को गंभीर बताते हुए इसकी जांच की मांग की.





चीनी किट वापस करने के निर्देश
गौरतलब है कि चीनी कंपनी गुआंगझोऊ वोंडफो बायोटेक और झूहाई लिवजॉन डायग्नोस्टिक रैपिड एंटीबॉडी ब्लड टेस्ट किट के परिणाम को लेकर शिकायत मिली. इसके बाद इंडियन कांउसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने इससे जांच पर 21 अप्रैल को 48 घंटों के लिए प्रतिबंध लगा दिया. आईसीएमआर ने कहा था कि इसके परिणाम सही नहीं आ रहे हैं. किट की जांच होगी और उसके बाद ही इससे टेस्ट की अनुमति दी जाएगी. इसके बाद 27 अप्रैल को आईसीएमआर ने राज्य सरकारों को एक पत्र जारी कर उक्त चीनी कंपनी के रैपिड टेस्ट किट को वापस करने के निर्देश दे दिए.

..तो फिर क्यों की गई जांच?
छत्तीसगढ़ सरकार के जनसंपर्क विभाग द्वारा 27 अप्रैल की शाम को कोविड-19 को लेकर जारी एक विशेष बुलेटिन में कहा गया- राज्य सरकारों की शिकायत के बाद आईसीएमआर द्वारा दी गई आरडी किट से जांच रोक दी गई थी. आईसीएमआर द्वारा चीनी कंपनी गुआंगझोऊ वोंडफो बायोटेक और झुहाई लिवजॉन डायग्नोस्टिक के किट को अमानक बता कर उसे वापस करने के निर्देश दिए गए हैं. अब सवाल उठ रहा है कि 21 अप्रैल को प्रतिबं​ध के बाद बिलासपुर में विधायक, अफसरों और पत्रकारों की जांच इस किट से क्यों की गई? बिलासपुर विधायक शैलेष पांडेय ने 25 अप्रैल की शाम को एक ट्वीट कर लिखा- 'आज मैंने अपना कोरोना की संक्रमण बीमारी के लिए रेपिड टेस्ट किट से परीक्षण करवाया.'



कलेक्टर और सीएमएचओ ने नहीं दिया जवाब
चीनी किट से विधायक और अन्य की कोरोना जांच की पुष्टि और उठ रहे सवालों के जवाब के लिए न्यूज 18 ने बिलासुपर के कलेक्टर संजय अलंग और सीएमएचओ प्रमोद महाजन को मोबाइल नंबर पर मैसेज किए. सीएमएचओ प्रमोद महाजन को कई कॉल भी किए, लेकिन खबर लिखे जाने तक उनका कोई जवाब नहीं मिला.

हॉटस्पॉट में फिर से होगी जांच
कोरोना के सैंपल जांच मामलों में प्रदेश के नोडल अधिकारी डॉ. धर्मेन्द्र गव्हई ने न्यूज 18 को बताया कि बिलासपुर में चीनी किट से जांच की उन्हें जानकारी नहीं है. प्रदेश में कोरोना के हॉटस्पॉट कोरबा जिले के कटघोरा में उस किट से करीब 500 लोगों के रैपिड टेस्ट हुए हैं. इस किट को अमानक माना गया है. इसलिए उनकी फिर से जांच की जाएगी.

मंत्री ने कहा- प्रतिबंध से पहले हुई जांच
बिलासपुर में चीनी किट से विधायक और अन्य की जांच मामले में प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने न्यूज 18 से बातचीत में 27 अप्रैल को आईसीएमआर द्वारा जारी पत्र का हवाला दिया. मंत्री सिंहदेव ने कहा- 'जब टेस्ट हुआ तब रोक नहीं थी. बचे किट वापस किए जा रहे हैं.'

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