Chhattisgarh News: जानें, कैसे महंगा होता 'तेल' बिगड़ा रहा है रसोई का खेल


खाद्य तेलों के दाम में 50 फीसदी की बढ़ोतरी हो गई है.

खाद्य तेलों के दाम में 50 फीसदी की बढ़ोतरी हो गई है.

Chhattisgarh News: सामान्य परिवारों में एक माह में 5 से 6 लीटर खाद्य तेल की खपत होती है. इस लिहाज से 800 से 900 रुपए तेल में ही खर्च करने पड़ रहे है. तेल कंपनियां भी पैकेट में 40 से 50 रुपए अधिक प्रिंट कर रही हैं.

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असलम

खाद्य तेलों के दाम में 50 फीसदी की बढ़ोतरी हो गई है. महंगाई रसोई का बजट बिगड़ गया है. घरों में पांच से छह लीटर खाने के तेल की खपत सामान्य है. कोरबा जिले में एक साल के भीतर खाद्य तेल की कीमतों में 50 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है. सबसे ज्यादा बढ़ोतरी सरसों, सन फ्लॉवर और सोयाबीन के दामों में हुई है. इससे रसोई का बजट बिगड़ने लगा है. चिल्हर कारोबारी भी तेल मनमाने दाम में बेच रहे हैं.

सामान्य परिवारों में एक माह में 5 से 6 लीटर खाद्य तेल की खपत होती है. इस लिहाज से 800 से 900 रुपए तेल में ही खर्च करने पड़ रहे है. तेल कंपनियां भी पैकेट में 40 से 50 रुपए अधिक प्रिंट कर रही हैं. इससे कम दाम में बेचकर भी दुकानदार ग्राहकों को यह कह रहे हैं कि प्रिंट रेट से कम ही लगाया है. इससे भी लोग ठगे जा रहे हैं. अभी थोक बाजार में रिफाइंड सोयाबिन तेल 147 से 157 रुपए थोक मार्केट में बिक रहा है, लेकिन इसके पैकेट पर 180 से 200 रुपए तक प्रिंट है. यह चिल्हर मार्केट में प्रति लीटर अधिकतम 160 से 165 रुपए में ही मिल रहा है. सोयाबीन तेल का कारोबार कई कंपनियों के द्वारा किया जाता है, जिनके बीच आपसी प्रतिस्पर्धा के चलते एक से दो रुपए तक का अंतर हो सकता है.

इसी तरह सनफ्लॉवर तेल की कीमत थोक बाजार में 175 से 176 रुपए है, जो चिल्हर बाजार में 185 से 190 रुपए तक बिक रहा है. पैकेट में मूल्य 245 रुपए तक प्रिंट किया जा रहा है. इसी तरह सरसों तेल का भाव वर्तमान में थोक भाव 172 से 182 रुपए तक है. चिल्हर भाव अधिकतम 185 से 190 है, लेकिन अलग-अलग कंपनियों के एमआरपी 220 से 235 रुपए तक है. गृहणियां बढ़ते दाम से परेशान है. उनका कहना है कि यदि कारोबारी 10 से 15 रुपए के मार्जिन में तेल बेचकर भी मुनाफा कमा सकते हैं, तो फिर मिनिमम रिटेल प्राइज में 40 से 50 रुपए का अंतर क्यों रखा जाता है.
खाद्य विभाग और प्रशासन को इसके कारणों की जांच कर संबंधित पर कार्रवाई करनी चाहिए. साथ ही सतत निगरानी भी रखनी चाहिए, ताकि आम उपभोक्ता ठगी से बच सके और मंहगाई से उन्हें राहत मिल सके.

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