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CAA-NPR के विरोध में उतरे छत्तीसगढ़ के आदिवासी, बीजेपी को हो सकता है नुकसान
Raipur News in Hindi

Awadhesh Mishra | News18 Chhattisgarh
Updated: February 25, 2020, 2:48 PM IST
CAA-NPR के विरोध में उतरे छत्तीसगढ़ के आदिवासी, बीजेपी को हो सकता है नुकसान
राज्य सरकार की कमेटी ने दर्ज प्रकरणों को वापस लेने की अनुसंशा की है. फाइल फोटो.

छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) का सबसे बड़ा वर्ग अगर किसी फैसले के विरोध में उतर जाए तो समझिए की क्या होगा?

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रायपुर. छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) का सबसे बड़ा वर्ग अगर किसी फैसले के विरोध में उतर जाए तो समझिए की क्या होगा. सीएए (CAA), एनपीआर (NPR) को लेकर सूबे के आदिवासी (Tribal) नाराज हैं और 27 फरवरी को राजधानी रायपुर (Raipur) में जंगी प्रदर्शन की तैयारी कर चुके हैं. आदिवासी बाहुल्य राज्य छत्तीसगढ़ के 146 में से 85 विकासखंड में रहने वाले आदिवासी केंद्र सरकार से खासा नाराज है. केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए सीएए और एनपीआर के विरोध में पूरा आदिवासी समाज सामने आ गया है.

अपनी नाराजगी प्रदर्शित करने के लिए आदिवासी समाज के हजारों लोग 27 फरवरी को राजधानी रायपुर में जुटेंगे. रायपुर के बुढ़ा तालाब स्थित इंडोर स्टेडियम में विरोध सभा के बाद सभी केंद्र सरकार के खिलाफ आक्रोश रैली निकालेंगे. समाज प्रमुखों का कहना है कि जो आदिसासी जंगलों में अपना जीवन-यापन करते हैं. वे पचास साल पुराना प्रमाण पत्र कहां से लाएंगे.

..तो इनका क्या होगा
एक उदारहण देते हुए सर्व आदिवासी समाज के कार्यकारी अध्यक्ष बीएस रांवटे ने कहा कि छत्तीसगढ़ के बस्तर में सलवा जुडूम हुआ तो सौकड़ों आदिवासी परोड़ी राज्य आंध्रप्रदेश, तेलांगाना, ओडिशा और महापाष्ट्र चले गए. जिन्हें लाकर या तो बसाया गया या फिर वे खुद आ गए. अब ऐसे लोग जो बामुश्किल दो वक्त के रोटी का इंतजाम करते हैं वे पचास साल पुराना प्रमाण पत्र कहां से लाएंगे. बीएस रांवटे ने यह भी कहा जब उनका जाति प्रमाण पत्र बनने में तीन से चार साल का वक्त लगा था तो अन्य का कैसे बनेगा यह आसानी से समझा जा सकता है.



आदिवासियों को कांग्रेस भड़का रही है


साल 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में सूबे के भाजपा को आदिवासियों की नाराजगी कितनी भारी पड़ी इस बात से समझा जा सकता हैं कि बीजेपी 15 सालों तक शासन करने के बाद 90 में से 14 सीटों पर ही जीत सकी. आदिवासियों के नाराजगी से भयभीत बीजेपी अब इसमें राजनीति तलाशते हुए कांग्रेस पर दोष मढ़ रही है. न्यूज़ 18 से बात करते हुए बीजेपी प्रवक्ता संजय श्रीवास्तव ने कहा कि कांग्रेस के ऐसे नेता जो आदिवासी क्षेत्रों में रहते हैं. वे इन्हें दिगभ्रमित कर रहे हैं. जबकि सीएए से आदिवासियों का कोई लेनादेना ही नहीं है और ना ही एनआरसी लागू हुई है. ऐसे में हजारों की संख्या में आदिवासियों का जुटना राजनीतिक प्रेरणा की देन है.

बीजेपी का आदिवासी चेहरा हो चुका है बेनकाब
आदिवासी बाहुल्य राज्य छत्तीसगढ़ में केंद्र सरकार के खिलाफ आदिवासियों की नाराजगी से सत्ताधारी दल कांग्रेस की पौबारह हो गई है. कांग्रेस आदिवासियों के नाराजगी को राजनीतिकतौर पर भुनाना चाहती है और यहीं वजह हैं कि जैसे ही बीजेपी ने कांग्रेस दिगभ्रमित करने का आरोप लगाया पलटवार करते हुए कांग्रेस प्रवक्ता विकास तिवारी ने कहा कि जो बीजेपी एक आदिवासी को प्रदेशाध्यक्ष बनाती है और एक साल के भीतर ही हटाने की तैयारी कर चुकी हो. जो नंदकुमार साय छत्तीसगढ़ बीजेपी के पृत पुरुष कहलाते हैं वे कह चुके हैं कि छत्तीसगढ़ बीजेपी में नेतृत्व का अभाव है ऐसे में बीजेपी दूसरे दल पर दोष मढ़ने से बेहतर हैं कि अपनी गिरेबान में झांके.

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First published: February 25, 2020, 2:48 PM IST
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