छत्तीसगढ़: ग्रामीणों ने ‘पवित्र भूमि’ पर बनाए गए BSF के दो शिविरों का किया विरोध, 50 प्रतिनिधियों ने दिया इस्तीफा

बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी. ने कहा कि बस्तर में हाल में बनाए गए 16 शिविरों में ये दोनों शिवर शामिल हैं. (सांकेतिक फोटो)

बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी. ने कहा कि बस्तर में हाल में बनाए गए 16 शिविरों में ये दोनों शिवर शामिल हैं. (सांकेतिक फोटो)

सिकसोद के सरपंच लच्छूराम गावडे (Sarpanch Lachhuram Gawade) ने बताया कि कांकेर के पाखनजोर में 23 दिसंबर से ही हजारों लोग बीएसएफ शिविरों को हटाने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं.

  • Share this:

रायपुर. छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में उग्रवाद प्रभावित कांकेर जिले (Kanker District) में पंचायत निकायों के 50 से अधिक प्रतिनिधियों ने स्थानीय लोगों के पवित्र स्थल पर सीमा सुरक्षा बल की दो चौकियां बनाने के विरोध में इस्तीफा दे दिया है. एक अधिकारी ने बताया कि शिविरों का गठन काटगांव एवं कामतेदा गांवों में किया गया है जो यहां से करीब 127 किलोमीटर दूर हैं. यह परतापुर-कोयलीबेडा मार्ग (Partapur-Koylibeda Road) पर स्थित है.

सिकसोद के सरपंच लच्छूराम गावडे ने बताया कि कांकेर के पाखनजोर में 23 दिसंबर से ही हजारों लोग बीएसएफ शिविरों को हटाने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘‘शनिवार को कम से कम 46 सरपंच, सात जनपद पंचायत सदस्य, एक उप सरपंच और एक जिला पंचायत सदस्य ने अपना इस्तीफा सौंपा.’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम बीएसएफ के शिविरों के खिलाफ नहीं हैं. हम जमीन अधिग्रहण के खिलाफ हैं जहां हम कई वर्षों से धार्मिक क्रियाएं करते आ रहे हैं. उन्होंने एक पेड़ भी काट दिया जिसकी हम पूजा करते थे और यह हमारे देवी-देवताओं का अपमान है.’’

ये भी पढ़ें- कांकेर: 18 सरपंच, 3 जनपद पंचायत सदस्य ने सामूहिक रूप से दिया इस्तीफा, वजह जानकर आप भी रह जाएंगे दंग

हिंसक ताकतों के दबाव में विरोध
बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी. ने कहा कि बस्तर में हाल में बनाए गए 16 शिविरों में ये दोनों शिवर शामिल हैं और इन शिविरों के कारण नक्सलियों को परेशानी हो रही है जो लोगों को सुरक्षा बलों की मौजूदगी का विरोध करने के लिए बाध्य कर रहे हैं. कांकेर के जिलाधिकारी चंदन कुमार ने कहा कि जल्द ही मुद्दे का समाधान हो जाएगा और दावा किया कि ‘‘प्रथम दृष्ट्या प्रतीत होता है कि ग्रामीण हिंसक ताकतों के दबाव में विरोध कर रहे हैं.’’ बता दें कि इससे पहले भी छत्तीसगढ़ में स्थानीय निवासियों ने जमीन अधिग्रहण का विरोध किया है. वे जंगल की कटाई को लेकर भी अपना विरोध जताते रहते हैं.

अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज