बार-बार मौसम की मार, फसल खराब होने से 1 हजार करोड़ रुपये का नुकसान, कैसे संभले किसान? ​
Raipur News in Hindi

बार-बार मौसम की मार, फसल खराब होने से 1 हजार करोड़ रुपये का नुकसान, कैसे संभले किसान? ​
बेमौसम बारिश और ओलों ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है.

छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में बेमौसम हुई बारिश और ओलों ने किसानों की कमर तोड़ दी है. फल और सब्जियों के साथ ही गेहूं, मसूर और चना की फसलों को भारी क्षति पहुंची है.

  • Share this:
  • fb
  • twitter
  • linkedin
रायपुर. छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में बेमौसम हुई बारिश और ओलों ने किसानों (Farmer) की कमर तोड़ दी है. शुरुआती आंकलन में करीब 1 हजार करोड़ रुपयों के नुकसान का अंदाजा लगाया जा रहा है. नुकसान के आंकड़े और बढ़ने की आशंका है. प्रदेश में बीते 25 फरवरी को बेमेतरा (Bemetara), धमधा, बलरामपुर और रायपुर (Raipur) के आसपास सबसे ज्यादा ओले गिरे. इससे यहां हजारों एकड़ में लगी रबी की फसलें और सब्जियां बर्बाद हो गई हैं. प्रदेश में करीब 16 लाख हैक्टेयर में रबी की फसल तैयार की गई थी.

छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में बेमौसम हुई बारिश और ओलों ने किसानों की कमर तोड़ दी है. फल और सब्जियों के साथ ही गेहूं, मसूर और चना की फसलों को भारी क्षति पहुंची है. केला और पपीता के फलों को तो भारी नुकसान हुआ ही है. वहीं आम के तो बौर झड़ ही गए. फूल गोभी, पत्ता गोभी, मुनगा, सेमी और सबसे ज्यादा टमाटर की फसलें बर्बाद हो गई हैं. बुरी तरह  से बर्बाद किसान अब सरकार की ओर आस लगाकर देख रहे हैं.

Chhattisgarh
ओले से टमाटर की फसल खराब हो गई.




करें तो क्या करें?



रायपुर से लगे धरमपुरा में रहने वाले किसान भक्त दास का कहना है कि इस बार खड़ी धान की फसल पर बारिश की मार पड़ी तो वह भी खराब हो गई थी. इसके बाद उम्मीद थी कि चना और गेंहू से राहत मिलेगी. अब जब चने में फूल आ गए, गेंहू की फसल लगभग तैयार हो ही गई थी कि इस पर ओले पड़ गए. अब करें तो क्या करें. यहीं खेती करने वाले किसान गौतम घोष का कहना है कि धान की फसल बर्बाद होने के बाद दलहन तिलहन और गेंहू का सहारा था. लगा था सब्जियों से भी नुकसान पूरा हो जाएगा, लेकिन अब तो स्थिति यह है कि सब बर्बाद हो गया है. सरकार की ओर ही उम्मीद लगाए बैठे हैं. सरकार को किसी को खेतों में भेजना चाहिए ताकि वो वास्तविक स्थिति देख सके. इसके आधार पर आर्थिक सहायता मिलें.

किसानों पर बड़ी आपदा
रायपुर के इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय​ के एग्रोमेट्रोलॉजी विभाग के एचओडी डॉ. जीके दास का भी मानना है कि यह किसानों पर बड़ी आपदा है, जो ओला वृष्टि हुई है उससे तैयार सब्जियों को आनन फानन में औने पौने दाम में बेचना ही किसानों के पास एकमात्र उपाय है. वहीं दलहन तिलहन की फसल जो बर्बाद हुई है, उसे सुधारना मुश्किल है. ओलावृष्टि से केले और पपीते के फल को भी भारी नुकसान हुआ है. उनका कहना है कि किसानों को तुंरत फसल बीमा के लिए प्रयास करना चाहिए. ओले और बारिश से जो नुकसान हुआ है उससे सरकार ही राहत दे सकती है.

सीएम भूपेश ने दिए निर्देश
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस बीच राज्य के सभी कलेक्टरों को सात दिन के भीतर ग्राऊंड रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने यह भी कहा है कि प्रावधान के तहत पीड़ितों को आर्थिक सहायता दी जाए, जो सहायता दी गई उसकी जानकारी भी दी जाए. जमीनी स्तर पर सर्वे के लिए भी कहा गया है. किसानों को हेल्पलाईन नंबर दिए गए हैं. मुख्यमंत्री का कहना है कि राहत की कोशिश शुरू हो गई है. सरकार ने कलेक्टरों को निर्देश तो दे दिए हैं, लेकिन यह भी सच है कि सरकार के सामने भी चुनौती है कि जहां किसानों को धान के अंतराल की राशि देनी है ऐसे में अब  किसानों को यह मुआवजा भी देना है.

ये भी पढ़ें:
नाबालिग बेटे को शराब पिलाने की शिकायत लेकर थाने पहुंची मां, जुर्म की धारा तय करने में उलझी पुलिस

पेड़ काटने से रोकने के लिए अनोखी पहल, लोग डरें इसलिए उन पर भगवान की तस्वीर चिपका रहा है ये शख्स 
First published: February 27, 2020, 10:26 AM IST
अगली ख़बर

फोटो

corona virus btn
corona virus btn
Loading