छत्तीसगढ़ी विशेष:  हठ नांव के ये हथियार गजबे के ताकतवर होथे

छत्तीसगढ़ी विशेष

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जब कोनो हथियार काम मं नइ आवय तउन समय एकर परयोग करे जाथे. सुनब, पढ़ब मं आय हे जउन-जउन ये हथियार ला काम मं लाय हे ओकर बिजय होय हे. ओकर बइरी के नास होय हे. जानकार मन बताथे-एकर वार कभू खाली हाथ नइ जाय.

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  • Last Updated: April 1, 2021, 11:14 PM IST
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मैं नइ जानव, हठ के परकार के होथे फेर जइसन सुने, पढ़े अउ जाने हौं तेमा तीन परकार के हठ हे. बाल हठ, राज हठ अउ इसतीरी हठ. ये तीनो चरचा मं हे, एला सबो जानत अउ मानत हे. इतिहास अउ पुरान मं घला ए तीनो के गुनानबाद मं आथे. बड़े-बड़े कथा हे, सुनबे ते अचरज लगथे. मन सोचे ले धर लेथे के अइसनो होय हे, हो जथे? बात नानकीन होथे फेर गुन ला देखबे, सुनबे तब माथा धर के बइठे कस लागथे. कोनो पतियाही नहीं, के अइसन कइसे हो जथे? फेर होय हे तभे तो इतिहास, पुरान मं कथा बनगे हे. ये हठ मं इतिहास उलटे के ताकत होथे, राज सत्ता, तख्ता पलटे के दम होथे. जउन ताकत तोप, तलवार, बन्दूक अउ बम मं नइ होवय, ये गुन हठ मं होथे.

हठ ला नानकुन चांटी असन जान के नइ छोड़ देना चाही. चांटी दिखथे भले छोटेकीन गोटी बरोबर फेर पहाड़ कस भारी-भरकम दिखइया हाथी ला अइसे पछाड़ के गिरा देथे, अधमरा कर देथे के ओहर जन्मो नइ सोचे राहत होही के अतकी जाड़ चांटी जीव हा ओकर अइसन हालत कर दिही. इही पाके हाना मं घला आय हे “बड़े मिया तो बड़े मिया छोटे तो सुभान अल्लाह”. इही पाके कहे जाथे छोटे ला कभू कमजोर जान के छोड़ नइ देना चाही. जब मैदान मं लड़े बर उतरे हे तब उहाँ छोटे-बड़े के चिन्हारी नइ करना चाही, सब बराबर होथे. कोनो दया करे के लइक नइ होवय

हठ तो हठ होथे, फेर का ये हठ हा, का ला कहिथे हठ? जिहां तक मोर समझ हे, आन मन के का बिचार होही तेला तो नही कहि सकौं फेर मोर अइसन मत हे के हठ हा एक परकार के गुस्सा (आगी) के रूप हे. तलवार, बन्दूक सही एक ठन हथियार (आग्नेयास्त्र) हे जेला बिपत के समय मं अपन रक्छा करे खातिर काम मं लाय जाथे. जब कोनो हथियार काम मं नइ आवय तउन समय एकर परयोग करे जाथे. सुनब, पढ़ब मं आय हे जउन-जउन ये हथियार ला काम मं लाय हे ओकर बिजय होय हे. ओकर बइरी के नास होय हे. जानकार मन बताथे-एकर वार कभू खाली हाथ नइ जाय. भागवान कृष्ण के चक्र सुदर्शन के वार एक घौं “फेल” हो जाही फेर हठ के वार दुछ्छा हाथ नइ लहुटय. जेकर बर छोड़े जाथे तेकर जान ला लेके ही लहुटथे.

छत्तीसगढ़ी विशेष: तीरतार मा कोनो बने असन दिखतिन त संघार लेतेन
हठ नांव के ये हथियार गजबे के ताकतवर होथे अइसे रक्छा बिभाग के बड़े-बड़े विशेसग्य, फौजी अफसर अउ सेना के अधिकारी मन बताथे. गुनथौ ये हथियार ला कोन देश वाले मन सब ले पहिली बनवाइन होही? जइसे आज के तारीख मं एक ले बढ़ के एक मिसाइलमेन हे जेमा डॉक्टर अब्दुल कलाम के नाम घला आथे. वइसने ये हठ नांव के घला घातक हथियार हे तेकर “जनक” याने “मास्टर माइन्ड” कोन होही? ये तो अभी के नो हे. एकर बरनन तो इतिहास, पुरान मं आय हे. लगथे महा मुनि बेद ब्यास के छोड़े कोनो दुसर हो नइ सकय? अतेक बड़े मिसाइल मेन, वैज्ञानिक जउन हा हठ के आविष्कार करिस तेकर आज कोनो चरचा नइ करय? ओला तो आज मरनोपरांत तो हमर देश के सबले बड़े अलंकरन “भारत रत्न” देके सम्मान करना चाही. हठ ला कोन काहय, एकर जइसे लड़ाई के समान, औजार के बरनन वेद पुरान मं भरे हे. ओला पढ़ लिख के कतको लड़ाई के औजार बनाये जा सकत हे.

खैर जान दौ ओ हथियार अउ औजार मन के बात, ए तीर हठ जइसन घातक हथियार के बात चलत हे जउन घर, परिवार, समाज ला कोन काहय देश बिदेश के राजनीति, इतिहास अउ ब्यवस्था ला पलक झपकते बदल दे के दम रखथे. एकर सब ले बड़े उदाहरण रामायण काल मं देखे जा सकत हे. कइसे महारानी कैकेई के इस्तिरी हठ राजा दशरथ ला पटकनी दे दिस. कहां रामचन्द्र के अयोध्या मं राजतिलक के तइयारी चलत रिहिस हे तउन हा देखते देखत ओकर चउदा बरस के वनवास अउ उहू तपसी बेस मं निकले के बदलगे. कोनो सोचे, समझे, जाने अउ बिचारे नइ रिहिन होही? का ले का होगे? कतको मनइन, समझइन कैकई ला फेर ओहार कनमटक नइ दिस. एला कहिथे हठ, ओ दिन पूरा संसार देखिन के हठ मं कतेक ताकत होथे? ये हठ राजा दशरथ के परान ला लेके रिहिस. न तोप, न तलवार, न बन्दूक| एक हठ काफी रिहिस हे बिना खून खच्चर के सत्ता परिवर्तन, सैन्य क्रांति.

हठ के परकार के होथे तेकर चरचा उपर मं करे हन. तीन परकार के हठ के चरचा सब करथे अउ इही ला सबो जानत हन. फेर अब ये करा एक ठन नवा हठ के जनम होय हे तेकर चरचा हमर देश मं अभी-अभी जाने-सुने ले मिले हे. एकर नांव हे किसान हठ. मीडिया हा ये हठ ला अइसे चारो मुड़ा बगरादे हे जइसे कोनो कंपनी वाले मन अपन नवा “प्रोडक्ट” ला बाजार मं ले जाय खातिर करथे. रातो-रात देश बिदेश, गांव-गांव, गली-गली मं सब के मुंह मं बसगे किसान आन्दोलन.....किसान आन्दोलन. तीन कृषि क़ानून वापस ले के मांग करत अइसे हठ कर दीन अउ बइठगे आन्दोलन मं ते सरकार सकपकागे. चार महिना होगे आन्दोलन चलत हे, माने बर कोनो तइयार नइ होवत हे. कतको झन ये आन्दोलन के समरथन मं अपन जान गवां दीन तभो ले सरकार कनमटक नइ देवत हे. हाथ चपकागे हे पथरा तरी न निकालत बनत हे अउ न टस मस करत बनत हे. अब सरकार करय ते करय का भला? न किसान आन्दोलन वापस लेबर तइयार होवत हे न सरकार कृषि कानून ला. दोनों अड़िया के बइठ गे हे अइसने अड़ियाये हठ करत बइठे रहिही तब कइसे बनही? किसान अन्नदाता हे, हलधर बलराम के वंशज हे ओकर मन के गुस्सा भड़क जाहि तब का होही?



लाल बहादुर शास्त्री जउन समय ओ हर देश के परधान मंत्री रिहिस तउन बखत जय जवान जय किसान के नारा लगाय रिहिस हे. आज विही देश हे जिहाँ किसान मन ला अइसन दूरदीन देखे ले परत हे, खुले सड़क मं, भरे बरसात मं आन्दोलन करे ले परत हे. ओकर मन के मांग तीन कृषि कानून ला वापस करे के मांग हे अब ओला सरकार नइ मानत हे. दुनो झन मं महाभारत असन मात गे हे. ये समस्या के हल कइसे निकाले जाय इकरे उपर पूरा देश के नजर हे. बेरा बखत के राहत ले रसदा चत्वार लेना चाहि अइसे सब झन के राय हे. बाप-बेटा अइसने लड़त रइही तब देश अउ घर के का हाल होही? ये हठ बने नइ होवय. बने बने के बने होथे अउ कहूं बिगड़ गे तब बंठाधार होय बिगन नइ छोड़य. किसान हमर बेटा हे, भाई हे, परान हे गलत सही का हे उहू ला समझना चाही अउ सरकार ला घला. (लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और ये उनके अपने विचार हैं)
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