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छत्तीसगढ़ी व्यंग्य: नारदजी के छत्तीसगढ़ दौरा

सांकेतिक फोटो.

सांकेतिक फोटो.

नारदजी के छत्तीसगढ़ आगमन होइस. ओखर बर न कोनो हवा-यान के जरूवत हे, न लौह-पथ गामिनी (रेल) के, न चतुर्थ चक्र वाहन के, न द्वि-त्रि चक्र वाहन के. स्वर्ग-लोक से सीधा ओखर बर टोल-फ्री आकाश-मार्ग हे. न पंख के जरूवत, न पंखा के, अंधियारी-अंजोरी के कोनो बाधा नइ हे.

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महान विष्णु भक्त, दुनिया के पहिली पत्रकार अउ आल वल्ड टूरिस्ट (संसार के भ्रमणकर्ता) नारदजी के छत्तीसगढ़ आगमन होइस .ओखर बर न कोनो हवा-यान के जरूवत हे, न लौह-पथ गामिनी (रेल) के, न चतुर्थ चक्र वाहन के, न द्वि-त्रि चक्र वाहन के. स्वर्ग-लोक से सीधा ओखर बर टोल-फ्री आकाश-मार्ग हे. न पंख के जरूवत, न पंखा के, अंधियारी-अंजोरी के कोनो बाधा नइ हे. महामुनी जिहां चाहें, जब चाहें परगट हो जथे. अउ छूमंतर हो जथें. महामुनि के साइंस हमर साइंस से करोड़ों गुना जादा आगू हे.

देव-लोक के महिमा अलग हे. महामुनी तिर न पइसा न कौड़ी. न कागज के रूपिया, न अद्दश्य करेंसी इ-रूपे के कोनो गुंजाइश हे, तभो ले सब उपर उन भारी हे.. न कखरो से कुछ लेना, न देना. जो मिलगे खा लिस, पी लिस. नइ मिलिस त नई मिलिस. कखरो से कोनो शिकायत नइ हे. न काहू से दोस्ती,न काहू से बैर. आजकल इही रोल म हमर उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी के हे. योगीजी घलो न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर, फेर अपराधी अउ भ्रष्टाचारी के उनकर राज म नइ हे खैर. अनोखा मुख्यमंत्री हे.

राजपथ म नारदजी
महामुनी नारदजी के कलेचुप छत्तीसगढ़ आगमन के खबर मीडिया ल कानों कान नइ हो पइस. भक्त-जन खुशी-खुशी म खबर लिक करके हर्षित होइंन. राजधानी के रहवइया मन नारदजी ल जब आकाश मार्ग ले राजधानी के राजपथ म उतरत देखिन त चकित रहिगें. सब झन अपन-अपन आँखी ल टमड़ीन. अपन आप से पूछिन-कहूं हम सपना त नई देखत हन? आँखी ल हाथ से मल के फेर देखिन तब विश्वास होइस. आकाश-मार्ग से तंबूरा बजावत संउहत (साक्षात्) नारदजी पधारत हें. महामुनी लकठइस तब एक दुसर के मुख ल देखा-देखी होइंन. नारदजी पियंर, पातर, धोती कुर्ता पहिने, लकड़ी के खड़ाउ धारण करे खट ले भूइंया म उतरिस. भूइंया ल परनाम (प्रणाम) करिस. नारायण ..नारायण ..करत चारों खूंट गोल घूम के ठाढ़ होगे.  छत्तीसगढ़ के राजकीय गीत के धुन पूरा तन्मयता के संग गुनगुनाइस.  फेर हाथ-हलाके भक्त-गन मन ल नमस्कार करिस. स्वभाव से अति नम्र नारदजी ल लोगन परनाम करिन.ओखर बाजू म गूंथाय रंग-बिरंगी फूल के खुशबू से पूरा वातावरण मंहमागे.

तीनों जियत मोक्ष पागें.
खबरीलाल, लालबुझक्कड़ अउ गरीबदास तीनों मितान मन घलो अपन हवा बदले बर राजधानी गे राहंय. अचानक राजपथ म खूब हलचल दिखिस. महामुनी नारद के उन दरसन पागें. उनकर दरसन मात्र से उन ल लगिस के तीनों जीते जियत मोक्ष पागें. उन गदगद हो के अकबकागें.  जब चेतना लहुटिस तब तीनों झटपट नारदजी के चरन म साष्टांग प्रणाम करिन. नारदजी नारायण ..नारायण .. कहि के आशीर्वाद दिस. नारदजी किहिस- स्वर्ग-लोक के हाई-पावर कमेटी मोला छत्तीसगढ़ भेजे हे. इहाँ के हाल-चाल जाने बर, खबरीलाल, लालबुझक्कड़ अउ गरीबदास नारदजी के मुखारविंद से छत्तीसगढ़ के नाम सुन के बहुत खुश होइंन. खबरीलाल पूछिस हे!

महात्मन, आपके स्वर्ग-लोक म सब कुशल तो हें न ? नारदजी अपन तंबूरा ल बजा के किहिस नारायण…नारायण..स्वर्ग लोक म दुःख के प्रवेश नइ होय वुहाँ सब देवता सोम-रस के आनंद लेत हें.सब मस्त हें.  राग-रागनी के दौर चलत हें. देवांगना मन रस बरसावत रिहिंन. इन्द्र देवता ल हर पल  अपन राजगद्दी की चिंता रहिथे. बीच-बीच म धरती म अपन गुप्तचर गोपनीय रूप से धरती म  भेजत रहिथें ये जाने बर कि कलजुग म घलो  कोनो घोर तपस्वी तो नहीं है जोन इन्द्रासन झटके के फिराक म होय. अइसना कोनो तपस्वी आजकल भारत भूमि म नइ हे जेन इन्द्रासन झटक सके. ये रिपोर्ट मिले ले इंद्र देवता चैन के सांस लिस.

खुशबू वाले चाउर
लालबुझक्कड़ बड़ जिज्ञासु परानी आय. मउका देख के पूछ बैठिस- हे !ब्रम्ह गियानी महामुनि आपके इहाँ छत्तीसगढ़ आगमन कइसे होय हे? हमर प्रदेश त नानकुन हे, हमन अलवा-जलवा पढ़े –लिखे हन. आपके इहाँ आय के किरपा कइसे होय हे? नारदजी किहिस तुंहर प्रदेश ह धान के कटोरा आय के नोहे? लालबुझक्कड़ हाथ जोर के किहिस-महामुनी, हाँ हमर छत्तीसगढ़ ल धान के कटोरा कहे जथे.पहिली कोठी रिहिस, अब कटोरा होगे हे !! नारदजी किहिस-इहाँ के चाउर स्वर्ग-लोक म घलो सप्लाई होथे आप जानत हो ? लालबुझक्कड़ अपन दुनो संगवारी के संग मुड़ हलइस. हम नइ जानन प्रभु !!

तब नारदजी बोलिस-इहाँ के विष्णु भोग, जवां-फूल, दुबराज, तरूण-भोग, जीरा-फूल आदि के आनंद स्वर्ग के देवता मन लेवत हें. गरीबदास हाथ जोर के नारदजी ल किहिस-हे! महामुने, अब समझ म अइस के हमन ल खुशबू वाले चाउर काबर दूरिहा के बात हे देखे बर घलो नइ मिले. नारदजी ये जान के बड़ दुखी होइस. पूछिस का कंट्रोल दूकान म घलो नइ मिले? गरीबदास किहिस-बहुत मोटा अनाज मिलथे,प्रभु.ओ चाउर ल कतको झन मन कंट्रोल रेट म खरीद के चाउर दूकान म बेच देथें. इहाँ के मन चिक्कन मुहूँ के होगे हें. देवारी, होली तिहार बार बर घलो खुशबू वाले अनाज सूंघे बर नइ मिले. नारदजी दुखी होइस ओखर मुहूँ ले निकलिस नारायण…नारायण..

ओलंपिक गेम म फुगड़ी ल जगा मिले
नारदजी किहिस-आपके प्रदेश म गउ माता गोबर खूब देवत हे. गोबर से लोगन ल रोजगार मिले के खबर हे! खबरीलाल किहिस- गोबर बेचइया मन बेचत हें. रूपिया बनावत हें. वर्मी खाद बनत हे.फेर आजकल गोबर चोरी अउ भ्रष्टाचार के खबर घलो आवत हे. नारदजी पूछिस-तुहंर इहाँ हरेली तिहार म गेंड़ी-गेम खेले जाते न ? खबरीलाल किहिस-हाँ, देवर्षि हमर इहाँ गेंड़ी-गेम खेले जाथे. खुद हमर मुख्यमंत्रीजी गेंड़ी-डांस जानथे. हमन भारत सरकार ल सुझाव देबो के ओलंपिक गेम म फुगड़ी ल जगा देवाय जाय. फुगड़ी रे फुन्न-फुन्न काहत जब इहाँ के दाई-बहिनी मन गेम खेलहीं त भारत ल फुगडी म सुवर्ण-पदक मिल सकत हे. नारजी-चकित होइस किहिस-इहाँ अतेक जादा टेलेंट है, मोला पहिली बखत पता चलिस.

तीन साल म पन्दरा साल के विकास
नारदजी किहिस- ये छोटे प्रदेश म बड़े-बड़े घोसना होथे. स्वर्ग-लोक म घलो इहाँ के पोंगा के आवाज सुनाथे. देवता मन सोचथें. छ्त्त्तीसगढ़ म पोंगा जुग जिंदाबाद हे. हमन सुने हन के तुमन सब उधार-बाढी, करे म बड़ चतुरा हो. करजा कर के घी पियत हो. लालबुझक्कड़ किहिस- हे! देवर्षि,आप त भूत,भविष्य अउ वर्तमान के ज्ञाता हो. आप से का छुपे हे?फेर कल किसने देखा है ? हमर छत्तीसगढ़ नवा गढ़े जात हे. हमन गढ़ कलेवा खावत-खावत खूब विकास करत हन. चारों खुंट विकास होवत हे. जे डाहर देखबे ते डाहर विकास हे. अभी त तीन साल म पन्दरा साल के विकास हो चुके हे. ये विकास सब के आँखी म नइ दिख सके. एला देखे बर ‘दिव्य-चक्षु’ चाही. आपके पास ‘दिव्य-चक्षु’ हे. आप स्वर्ग-लोक से देखहू त जादा साफ़ दिखही.

खबरीलाल किहिस-हे! महामुनि, पछहत्तरवां सुतंत्रता दिवस के हमर प्रदेश के मुखिया चार ठन नवा जिला अउ अठारह नवा तहसील बनाय के धड़ाधड़ घोसना कर दिस. ये घोषणा म जोन  सुख हे वो अद्भूत हे. इहाँ आत्मा ल आनंद देवइया स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंगरेजी विद्यालय डेढ़ सौ के संख्या म खुल गे हे. बिजली बिल हाफ अउ किसान के करजा माफ़ त तुरत फुरत लागू होगे हे.चिकित्सा के मोबाइल यूनिट फ्री म घुमत हे. लालबुझक्कड़ किहिस-हे! मुनिराज, हमर छत्तीसगढ़ प्रदेश म सत्ता के अढ़ाई-अढ़ाई साल के मुख्यमंत्री के बात हवा म घुमत रहिथे.हालंकि एखर भीतरी म सच का हे, झूठ का हे? ये ह अभीतक पहेली बरोबर हे. कभू-कभू राजनीतिक धुंगिया दिखते त लोगन मनगनिंत लगावत रहिथें. नारदजी किहिस- देवलोक म घलो सत्ता के अइसना फूलझड़ी कोनो-कोनो देवता छोड़ते रहिथे. इंद्र देवता हलाकान हो जथे. गरीबदास किहिस-छत्तीसगढ़ म दिल्ली ले आशीर्वाद आते रहिथे.इहाँ के राजगद्दी निष्कंटक हे.

नारदजी जरूरी राजनीतिक चरचा करके झट अंतर धियान होगे. खबरीलाल आँखी रमजत उठिस मुंह धोईस त घड़ी म सुबह के आठ बजे रिहिस. ओला समझ नइ एस के ओहा सपना देखत रिहिस के जागत रिहिस !!

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