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छत्तीसगढ़ी व्यंग्य: आन-लाईन कविता के बरसात

सांकेतिक फोटो.

सांकेतिक फोटो.

लोकल-कवि टोटल आन-लाईन होगें. आन-लाईन के विकास यात्रा म जगा-जगा आन-लाईन कवि-मंच बनगे. कवि-जागरन के अदभूत समय हे. कवि राष्ट्रीय से अन्तर्राष्ट्रीय होगें.

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कम्प्यूटर–इंटरनेट के आय ले कवि-फोकटराम अउ ओखर संगवारी मन के बड़ मौज होइस. अचरा-कचरा, अडढा-गडढा सब राष्ट्रीय-राजमार्ग बनगे. कविता के फसल हरियागे. सनसनात कविता के उत्पादन बाढ़गे. अधिकांश कवि आँन-लाईन होगें. लोकल-कवि घलो टोटल आन-लाईन होगें. आन-लाईन विकास यात्रा म जगा-जगा कवि-मंच बनगे. कवि-जागरन के अदभूत समय हे. आघू चल के रोबोट ह कविता लिखही-पढ़ही. पारिश्रमिक रोबोट-कवि ल मिलही. आँन लाईन कविता-पाठ होय ले कविता के ऐतिहासिक बरसात जारी हे. कवि कविता के कारखाना होगे हे. कविता धार-धार रस-धार बरसावत हे. कविता मंच के गियानिक एला कविता के अद्भूत बरसात कहि के खुद ल चकित बतावत हें. कतको कवि राष्ट्रीय स्तर ल पार करके अब सीधा अंतरराष्ट्रीय होगे हें. आन-लाईन कवि-सम्मेलन के महत्व बाढ़ते जावत हे.

कवि के गणित अउ समीकरन
आजकल कवि मन जोड़-तोड़ गुना-भाग, घटा-चटा के सब उठा-पटक ल सब समझत हें. जेन गणित म फेल हो जांय या किरपांक (कृपांक) भरोसा पास होंय उन कवि-सम्मेलन म कविता-पाठ करे बर नवा-नवा समीकरन हल करत हें. नव-सिखिया कवि मन कविता लिखे के मशीन होगे हें. कतको झन आशु-कवि के परसिद्धि पाय के आसपास हें. कोरोना-काल म कवि सम्मेलन के मार्केट जुड़ागे रिहिस. अब धीर लगा के उठत हे.सोसल मीडिया म  कविता के बाढ़ आ गे हे. वीर रस के कविता उफान मारत हे. सियान-जवान मन के जोश कविता म ढलत हे. कविता के नवा-नवा स्त्रोत फूटत हे. कवि-मार्केट संभलत हे. ठप्प कवि-ठेका फेर शुरू होवत हे. हर वेरायटी के कवि रस-संगम म सहज उपलब्ध हें. कवि मन के ताली-बजवाय अउ वाह वाह कहे के दिन आवत हे.उंकर वीर रस के गर्जना से चीन, पाकिस्तान डोल जथे. मंच के असली मजबूती वीर-रस अउ श्रृंगार-रस के कविता-पाठ से सिद्ध होथे. श्रृंगार-रस के रस-भरी कविता सुने म तन-मन गदगदा जथे. कवि हर मौसम म बसंत के आनंद करा देथे.

 कवि-ठेका:अच्छा व्यवसाय
मंचीय कवि सम्मेलन बर ठेकादार मार्केट-ब्रांड कोनो बड़े कवि के समर्थक होना जरूरी हे. उहाँ ले ओके होगे तहाँ ले मंच संचालक कवि के खुश होना जरूरी हे. ओहा अपन जबानी पैरासूट से  नीरस कवि ल घलो सरस ढंग से जनता के आघू म पेश करे के कला ल जानथे. कवि-मार्केट म अइसना कवि धीरे-धीरे ठेलात आघू बढ़ जथे. ठेकादार मन तिर कवि  ब्रांड कवि मन के लिस्ट होथे. जेन खूब ताली बजवाथें ओखर अलग डिमांड होथे. एमा फायर ब्रांड कवि के नाव लेके शेष मन तर जथें. कुछ मंच के शोभा बढ़ाथें. कुछ मंच ल उठाथें. कुछ मंच ल गिराथें.कुछ मंच म गपिया के मनोरंजन करथे.  आजकल हास्य कवि मन ल कतको झन जोकर कवि कहि के मजा लेथें. हास्य कवि मंच म जमगे त दुसर कवि के जरूवत खतम हो जथे. एक-दु कवयित्री के बिना मंच अधूरा होथे. उनकर बिना मंच सुन्ना होथे. छत्तीसगढ़ म कवि सम्मेलन ल कइ बखत कवि-नाचा कहि के सम्मान देय जथे.

ब्रांडेड कवि लाने के फायदा
ब्रांडेड कवि मन आयोजन समिति अउ शहर के खूब बड़ई करथें. ओखर ले दूसरा कार्यक्रम इहें कब होही ये ह मौक़ा म तय हो जथे. अपन बड़ई ल  सुन कोण खुश नइ होय ? उन ल बैलून बरोबर फूलोय बर लगथे. कतको कवि मन मंच म कविता से जादा किस्सा सुनाथें. ये किस्सा घलो आजकल कवि-सम्मेलन के हिस्सा बनगे हे. कविता श्रोता ल ताली बजवाथे. मंच म हास्य रस के कवि के हाव-भाव विदूषक या जोकर कस बन जथे. ये कवि महाशय अपन अंग संचालन के संग कविता पाठ करके रस-रस निचोय के कमाल देखाथें. बिन बादर हास्य-रस के घनघोर बरसात होथे. हास्य के भयानक बाढ़ म श्रोता रस-धार म बोहावत रहिथे. रात बारा बजे के आसपास कतको श्रोता अपन घर रवाना हो जथें. संचालक ठेका से आए नवा कवि मन ल बीच-बीच म बला के निपटा देथें. कोनो कवि ल हिमालय म चढ़ा देथे. त कोनो नीचे पटक देथें. ताली के उतार-चढाव से कवि, कवि-सम्मेलन म कते करा हे एखर अंदाजा लगा लेथे.

कविता कम चुटकुला के जादा
कविता के मंच म श्रृगार-रस सावन महीना कस आथे. रति अउ कामदेव के कल्पना, बिजली के चमकना, अंग-अंग फड़कना, इंद्र सभा के सुंदर चित्रण के भाव-सागर म सुनामी आ जथे. वियोग में संयोग अउ संयोग म वियोग के महाधारा के संगम म श्रोता डूबकत-डूबकत ले दे के किनारा पाथें. कोनो प्रसिद्ध कवि अपन गीत से शीतल झरन(झरना) म स्नान करवाथें. मंच संचालक तराजू ले के कभू कवि मन के त कभू श्रोता मन के मनोभाव अउ कविता के मूल्यांकन करत कवि सम्मेलन ल पार लगाथे. कतको मंच संचालक मन खुद कविता कम सुनाथें बात पूरा लपेट श्यामपट कस करथे. कभू श्रोता मन डाहर ले घलो ताली बजाथे.

हालंकि जादा ताली बजाय के सर्वाधिकार श्रोता मन के होथे. ठेका लेवइया कवि सम्मेलन के सुंदर रेखाचित्र खिंच के आयोजक मन ल भरमाथें अउ कवि ले जादा पारिश्रमिक खुद पाथें. आजकल श्रोता मन कविता कम चुटकुला सुनना जादा पसंद करथें. आखिर म सब ले गरू लिफाफा कोन ल मिलिस ? कइ बखत लिफाफा के बात ल रहस्य रखे जथे. लोग अनुमान लगाथें कवि मन के ठेका ले के थोक म कवि-सम्मेलन बर कवि सप्लाई करइया कवि के लिफाफा सब ले जादा गरू होना ही हे.

साहित्य लेखन के महा-दौर
अब सोसल मीडिया म साहित्य लेखन के महादौर चलत हे. ये महादौर म तथाकथित महान साहित्य के सृजन होवत हे.. ठेलहा बइठे कवि  अचानक क्रियाशील होगे हें. उन ‘कलम उठा, लिख मार’. कार्यक्रम म भीड़ हे. कोरोना-काल म कविजी, कवयित्री जी खूब कविता-तप करत हें. सोसल मीडिया के हर पेज उनकर कविता लेखन से सराबोर हे. सोसल मीडिया म कवि-सम्मेलन आम बात होगे हे. ये आन लाईन जुग म आन-लाईन पढ़ाई, आन-लाईन कवि-सम्मेलन, आन-लाईन वीडियो कांफ्रेंसिंग, आन-लाईन-उदघाट्न, आन-लाईन-भासन, आन-लाईन व्यवसाय, आन-लाईन चेटिंग, आन-लाईन खाता, आन-लाईन रूपिया जमा-निकासी, आन-लाईन सम्मभाषन, आन-लाईन समाचार, आन- ये आन-लाईन वरदान बरोबर होगे हे. कोरोना अइस त पूरा दुनिया ल तेज गति से लाईन अटैच कर दिस.

आपस म वाह… वाह….
लोकल कवि देखते-देखत म राष्ट्रीय कवि होगें. कवि-कवयित्री मन आँन लाईन कविता पाठ करथें.आपस म  वाह वाह-करत रहिथें. आयोजक, संचालक वाह-वाह के तेज धार म बोहावत मजा लेथें. जागरूक जन कथें कोरोना संकट-काल म अमर साहित्य लिखात हे, सुनात हें. हर प्रश्न के गूगल गुरू तिर हाजिर जवाब हे.

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