• Home
  • »
  • News
  • »
  • chhattisgarh
  • »
  • छत्तीसगढ़ी व्यंग्य: लइका के जरूरी प्रश्न

छत्तीसगढ़ी व्यंग्य: लइका के जरूरी प्रश्न

सांकेतिक फोटो.

सांकेतिक फोटो.

सरकार बड़ दयालु हे बेटा,. उपर टैक्स ठोंकथे,...ओला भगवान के चिंता-फ़िकर नइ राहे. उन ल भगवान से घलो डर नइ लागे. सरकार त गरीब, पिछड़ा, मजदूर, किसान शास्त्र अउ शस्त्र म भिड़े रहिथे. इही भक्ती-भाव सार हे. इही म राजगद्दी के भक्ति-भाव अउ महिमा हे.

  • Share this:

एक झन लइका ह एक दिन अपन ददा ल पूछिस-कइसे ददा, ये केंद्र अउ राज्य सरकार हमर नोहे का ? लइका के ददा अपन टूरा ल एकटक देखिस फेर किहिस-सरकार तो हमर तोर सबके आय रे ? टूरा फेर पूछिस-फेर सरकार हमर मन के कभू चिंता काबर नइ करे? ददा- काबर नइ करही रे. लइका—कइसे चिंता करथे गा ? ददा कथे,–नौकरी पेशा वाले मन ले इनकम टैक्स, कारोबारी मन से जी.एस.टी. वसूले के चिता करथे. किसम –किसम के टैक्स होथे ?सरकार बड़ दयालु हे बेटा, टैक्स ..उपर टैक्स ठोंकथे,..ओला भगवान के चिंता-फ़िकर नइ राहे. उन ल भगवान से घलो डर नइ लागे. सरकार त गरीब, पिछड़ा, मजदूर, किसान शास्त्र अउ शस्त्र म भिड़े रहिथे.  इही म राजगद्दी के भक्ति-भाव अउ सार हे.

दिव्य-दृष्टि
लइका—ददा, तेंहा हम ला झन बहका. हम जानना चाहत हन के सरकार कभू हमर चिंता-चिंतन काबर नइ करे? ददा-हर सरकार करा दिव्य-दृष्टि होथे बेटा. ओ दिव्य-दृष्टि ओला कुरसी म बइठते साठ कुरसी देथे. ओखर विशेषता ये होथे के मध्यम वर्ग ल छोड़ के अउ वुहू म अनारक्षित वर्ग ल छोड़ के सरकार ल सब दिखथे. कतको झन कथें के सरकार रतौंधी के शिकार हो जथे. राजनीति के बाजार म कतको किस्सा उफलत अउ बूड़त रहिथे.

गरीबी के अमर गान
ददा आघू किहिस-हमर भारत देश महान हे. इहाँ सत्ता बर गरीबी के अमर गान प्रसिद्ध हे. हर माननीय मन के अमरित बानी म हाय! गरीबी, हाय गरीबी !! के अमर–गान होथे. गरीबी ल नापत-नापत सत्तर साल होगे. सब सुविधा ‘फ्री’ म मिलत हे. गरीबी दूर नइ होय. देश के गरीबी टस ले मस नइ होय. बल्कि बाढ़त जथे. ददा- सरकार तिर गरीबी हटाय के कोनो टार्गेट नइ होय का ? हमर देश म गरीब मन ले जादा गरीब नेता मन होथें. सब एक-दूसर के गरीबी पहिली दूर करथें. इन  जनम-जात महान होथें. लइका–हमर दुःख ल कोन समझे? ददा–सरकार ल गरीबी-रेखा के नीचे-उप्पर तो दिखथे. दुनों के बीच म हमन बसे हन. ‘दु पाटन के बीच म साबूत बचा न कोय’. हमर पीरा समझ सके न कोय, उप्पर वाले (पूंजीपति) सत्ता के कुकरी-कुकरा लड़वाथें. घुड़दउड़ करवाथें. भइंसा लड़वाय म आनंद लेथें. परदा म दिखे नहीं. फेर तुरूप के पत्ता उही मन काटथें/बाँटथें. दुए जात हें-गरीब अउ अमीर बीच म जो हें तेंन पिसाय वाले आबादी आय.

मध्यम वर्ग रबर कस
लइका-हमर पढ़ई-लिखई, नउकरी-चाकरी, उद्योग-धंधा बर सुविधा के कुछ गुंजाइश नइ दिखे !! ददा—सोचना घलो मत. सरकार गरीबी खतम करे बरहर परकार के आसन करत हे. एक सौ छत्तीस करोड़ के भारी-भरकम आबादी हे. गरीबी राष्ट्रीय बीमारी के रूप म दुनिया म परसिद्ध हे ! हमर राष्ट्रीय स्तर के प्रसिद्ध गाना ‘गरीबी’ आय. नेता मन गरीबी के बीन बजाथें , गरीबी ल नचवाथे. राजकोष से योजना उपर योजना निकलथे .फ्री सुख पा के देश के गरीबी गदगद होथे. अब तो उनकर जीवन से कर्मठता छूमंतर होवत हे. ‘फोकट म पाय त मरत ले खाय’ इही सार्थक होवत हे. गरीबी कतको घटाय के कोशिश करव घट्बे नइ करे.उलटा बाढ़े जात हे. अब सरकार मध्यम वर्ग ल खिंच के गरीबी रेखा के खाल्हे डाहर लाय के कसरत करत हे. मध्यम वर्ग ल रबर खींचे कस तान के खिंचत हे, अतेक जोर से के गरीबी रेखा ल चीरत-चुरात गरीबी रेखा के बरोबर आ जाय. तब समानता दिखही.

हमर हे मरे बिहान
लइका-ददा हमर त मरे बिहान हे? हमन महान भारतीय गरीबी रेखा के न ये पार हन, न ओ पार. अब त गरीबी रेखा के गुरूत्वाकर्षण हमन ल अपन डाहर तिरत हे तइसे लागत हे. न कोनो पूछ न परख. न सुविधा, न छूट !! हम अपने देश म अपने-अपन पाछू ढकलात जावत हन.ददा के छाती के पीरा ओला कलेचुप रोवा दिस. ओहा मने-मन सोचिस हमर महान लोकतंत्र म आम आदमी ल जे दिन आसानी से नियाव मिलही, वुही दिन आजादी के बड़े दिन होही.

लइका किहिस-ददा,नवा-भारत बनाय बर.एक देश-एक जाति (हर देशवासी भारतीय) होना जरूरी हे. अभी तो गिद्ध-चील कस नेता मन के आँखी रतनार हे. उन ल देश ले बढ़के अपन सुवारथ दिखत हे.

पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.

हमें FacebookTwitter, Instagram और Telegram पर फॉलो करें.

विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन

टॉप स्टोरीज