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छत्तीसगढ़ में पढ़ें: कोन गली मं हे नियाव?

छत्तीसगढ़ में पढ़ें: कोन गली मं हे नियाव?

सांकेतिक फोटो.

सांकेतिक फोटो.

पांचों अंगुरी कभू, ककरो एक बरोबर नइ रहय? बिधाता चुन के, हिसाब लगा के संसार के रचना करे हे, फेर मनखे मन अइसे हे अपन ला छोड़ देथे, दुसर के मीन-मेख लगाय मं लगे रहिथें.

पांचों अंगुरी कभू, ककरो एक बरोबर नइ रहय? बिधाता चुन के, हिसाब लगा के संसार के रचना करे हे, फेर मनखे मन अइसे हे अपन ला छोड़ देथे, दुसर के मीन-मेख लगाय मं लगे रहिथें. कहिथें-ओकर लइका कोलवा हे, लंगड़ा-लुलवा हे, ढेरवा हे, कनवा हे, तिरपट हे, तिरछा देखथे. अब एमा दाई-ददा के का दोस. बिधाता जइसने गढ़े हे वइसने अवतरे हे. जनम देके दाई-ददा के काम. अउ रूप-रंग, गुन के देवइया तो ओ उपर वाला हे.

अमीर गरीब के खेल घला वइसने हे. जइसन करम करथें, पुरुसारत करथें भगवान वइसने ओला वोकर फल देथे. अब एमा रोना-गाना का मचाना? दुसर के चीज बस, धन-दौलत, खेत-खार, कारखाना, घर-दुआर, घोड़ा-गाड़ी, बइला, महल, कार-मोटर अउ असबाब ला देख के का इरखा करना, फेर मन ला कोन जनी का कीरा काटथे ते दुसर के चीज बस ला देखे नइ सकय. बने पढ़े लिखे हें तेकर परसादे अच्छा नौकरी मिले हे, पद पाय हे, अपन बुद्धि अउ धन लगाय हे, पुरुसारत करे हे तब बने खेत, सोना, हीरा सही फसल उगले हे धरती मइया अपन ये बेटा ला जुग जुग जिओ, बने घर दुआर तो कोठा-कोठी गउ अउ अन्न ले भरपूर भरे रहाय कही के असीस दे हे. कारखाना वाले मन ला कारखाना मिलथे राजनीति वाले मन ला बड़े बड़े पद अउ परतिष्ठा मिलथे.

भाग अपन-अपन होथे, फेर भाग अइसने रसता चलत नइ मिल जाय. पछीना उगारथे, तन, मन अउ धन खपाथे. समय अउ भाग विकरे संग देथे. फेर समय आज खराब हे. हवा खराब होगे हे. सब उल्टा चाल चले ले धर ले हे. काम करे बर ककरो जांगर नइ चलय, सब कामचोर होगे हें. फोकट के माल हड़पना चाहत हें. सब डलहउजी के हड़प नीति के रसता मं चले ले धर ले हें. चाहे छोटे होवे चाहे बड़े, नीयत सबके खराब होगे हे. चाहे नेता, अधिकारी, किसान, करमचारी कोनो होवय, काला का कहिबे. सब ला धन चाही, पइसा चाही, सुख सुविधा चाही फेर ये सब मिलही कइसे, आही कहां ले घर बइठे तो नइ आ जय? एकर कोनो ला कांहीं चिंता नइ हे. फोकट के तीन दम मरइया सब हे.

देश के हालत बहुत ख़राब हे. सब लूट-खसोट मं भिड़े हें. काला का कहिबे, जेने ल सहराबे तउने मन गढ्ढा मं बोजवत हें. चाल-चलन अउ चरित्र के ककरो भरोसा नइ हे. बड़े-बड़े आर्थिक घोटाला आज कोन मन करत हें, चारित्रिक पतन आज काकर मन के होवत हे, उपर ले राम-राम, तिरपुंड भभूत लगाय हें कथा भागवत बाचत हें अउ रात मं ओमन का करत हें, ए बात आज ककरो से छिपे नइ हे. जतके बड़े हें, धनवान हे, इज्जत वाले हे विकरे मन के हाथ आज खून मं सने हे. कोनो बोलइया नइ हे ओकर, क़ानून ला पइसा मं खरीद लेवत हें अउ अइसन तो जमाना आगे हे. लाखों, करोड़ों, अरबों के घोटाला करत हें, कोन हें ये मन? बैंक के रूपया पइसा ला मुसवा सही करो-करो के खाली कर देवत हें. एमन सब ले बड़े डकैत हें, एमन ला तो फांसी मं चढ़ा देना चाही, फेर सरकार अउ अदालत अइसे कर नइ सकय. सब जानत हें, अइसन काबर होथे. ओ डकैत मन बर पुलिस लगा देथे, जंगल-जंगल, परवत-परवत छान मारथे, मुठभेड़ करथें. ए डकैत मन ले तो ओ सफ़ेदपोस डकैत मन ला देखते साठ गोली मार देना चाही, ओकर चीज बस ला तुरते जपत कर लेना चाही, फेर नहीं अइसन नइ होवय. ओला छुवब मं पुलिस अउ क़ानून डरथें. ओमन पहुँच अउ पइसा अउ रूतबा वालें होथें. कानूनी दांव-पेंच मं उलझा के रख देथें अउ इही बीच ओमन उड़न छू हो जथे, ए देश ला छोड़ के भाग जथे.

गरीब ला कभू कोनो काल मं नियाव नइ मिले हे, काबर की ओहर गरीब होथे. वइसे गरीब ला नियाव मांगे के घला कोनो हक़ नइ हे, ना ओला मांगना चाही, ना अदालत के दरवाजा खटखटाना चाही. गरीब घर जनम ले हे तब गरीब घर रहना चाही, अमीरी के सपना कभू नइ देखना चाही. सपना कभू सच घला नइ होवय. सपना अच्छा करम, अच्छा मेहनत करे के देखना चाही. हो सकत हे कोनो अच्छा करम करे ले अच्छा पद परतिष्ठा अउ धनवान बन जथें अइसन देश में कतको उदाहरन भरे परे हे. ककरो एक झन के नाम ले देना ए तीर ठीक नइ हें. पूर्व राष्ट्रपति स्वर्गीय अब्दुल कलाम सब ला इही नेक सलाह देवय, स्वामी विवेकानंद घला काहय-उठव, जागव, अच्छा पुरुसारत करव. सपना इही पुरुसारत मं छिपे हें.
बड़े मन के बड़े बात होथे, ओकर मन के विचार बड़े होथे फेर ओला धरथे कोन? सब एक कान ले सुनथे अउ दुसर कान ले उड़ा देथे. गरीब तो जांगर टोरथे, तभोले ओला मेहनत के फल नइ मिलय. मजदूर, किसान, आदिवासी के ए देश मं आज का हालत हे? कोन मलाई चाटत हें अउ कोनो मन ला चाउर मं भुलवार देहें? अटपट नगरी चउपट राजा, टका सेर भाजी टका सेर खाजा, अइसन खेल ए देश मं चलत हे. गरीब तो चाउर मं भुलाय हें. चल कइसनो करके ओकर मन दोंदर तो भरत हे.

मलई खवइया मन के छतरंगी चाल कोनो समझ नइ सकय, ओमन गरीब मन के सोसक हे. बोकरा ला मारे के पहिली जइसे चाउर खवाय जाथे तइसने गरीब, किसान, मजदूर आदिवासी मन के हाल हे. ओकर मन के जमीन ला गांव-गांव जाके औने पौने दाम मं झटकत हें. दे बर मना करथे तब धमकी-चमकी देथे, कानून मं फसा के जेल भेजवा देबों कहिके डेरवा देथे. गरीब अनपढ़ मनखे के बारा हाल होवत हे, तना-नना होगे हे ओमन आज. कहां हे नेता, मंत्री अउ कानून? नइ हे कोनो  रखवार (रक्षक) एकर मन के, जउने रखवार हें तउने मन भक्षक बने बइठे हें. रोवत हें बोम फार के आज गांव, छाती पीट-पीट के गोहार लगावत हें. फेर कोनो नइ हे सुनइया. गरीब के गोहार ला भगवान घला नइ सुनय, ओकरो कान भैरा होगे हे. हे कहुं कोनो मेर ये धरती मं, संसार मं नियाव?

Tags: Articles in Chhattisgarh language, Articles in Chhattisgarhi

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