पाई-पाई को मोहताज हैं छत्तीसगढ़ के ये करोड़पति किसान, जानें क्यों?

नया रायपुर के किसान एक के बाद एक मरते जा रहे हैं. इसके बाद भी सरकार इस ओर कोई ठोस कदम उठाती नजर नहीं आ रही है.

Awadhesh Mishra | News18 Chhattisgarh
Updated: July 30, 2019, 3:26 PM IST
पाई-पाई को मोहताज हैं छत्तीसगढ़ के ये करोड़पति किसान, जानें क्यों?
नया रायपुर के किसान एक के बाद एक मरते जा रहे हैं. सांकेतिक फोटो.
Awadhesh Mishra | News18 Chhattisgarh
Updated: July 30, 2019, 3:26 PM IST
गांव..गरीब..किसान...यह ऐसे शब्द हैं जो हमेशा देश की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाते हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ में गांवों, गरीबों और किसानों की वास्तविक स्थिति क्या है इस बात की चिंता शायद किसी को नहीं है. यही कारण है कि नया रायपुर के किसान एक के बाद एक मरते जा रहे हैं. इसके बाद भी सरकार इस ओर कोई ठोस कदम उठाती नजर नहीं आ रही है.

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से सटा नया रायपुर..कहने के लिए चमचमाती चौड़ी-चौड़ी सड़कें. बड़े-बड़े बिल्डिंग. मंत्रालय, सचिवालय, संचालनायल जैसे बड़े-बड़े भवन, आज से कुछ सालों पहले तक यहां खेत हुआ करते थे. खेतों में फसलें लहलहाती थीं और उन फसलों को देखकर किसानों के चेहरे खिल जाते थे. मगर जब से नया रायपुर बनाने की परिकल्पना धरातल पर आकार लेने लगी तब से किसानों की परेशानियां बढ़ने लगी. अब परेशानियां का पाहाड़ इतना बड़ा हो चुका हैं कि किसान अपनी जान देकर भी परेशानियों के इस पहाड़ को पार नहीं कर पा रहे हैं.

नया रायपुर.


चार किसानों की मौत

नया रायपुर के किसान तात्कालिक सरकार के तुलगकी फरमान के खिलाफ न्याय की आस लिए न्यायालय की शरण तक तो पहुंचे. मगर इन किसानों को शायद इस बात का इल्म नहीं था कि वे सिस्टम से लड़ने जा रहे हैं, जिस सिस्टम से लड़ते-लड़ते आज तक देशभर में सौकड़ों लोगों की जान जा चुकी है. पीड़ित किसान पुनित राम बंजारे और पवन बाई का कहना है कि बीते आठ-दस सालों से नया रायपुर के कोटराभांटा गांव के किसानों की सिस्टम से लड़ाई आज इस मोड़ पर पहुंच चुकी है कि लड़ाई लड़ते-लड़ते 14 में से 4 किसानों की मौत हो चुकी है. जो बचे भी वे और उनके परिवार वाले पाई-पाई के लिए मोहताज हैं.

सांकेतिक चित्र.


इसलिए परेशान हैं किसान
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किसान नेता रूपन चन्द्राकर बताते हैं कि नया रायपुर के तमाम किसान मंत्रालय से सटे कोटराभांटा गांव के हैं, जो सरकार द्वारा जबरन भू-अर्जन करने के खिलाफ 2012 से ही न्यायलय की लड़ाइ लड़ रहे हैं. मगर फैसला आज तक नहीं आया. जिससे आज इन किसानों से ना तो जीते बन रहा है और ना ही मरते. क्योंकि मुआवजा राशि कम होने की बात कहकर उन्होंने सरकार से मुआवजा राशि नहीं ली. चूंकि अब मामला कोर्ट में है. इसलिए वे अपनी ही जमीन न तो बेच पा रहे हैं और न ही उससे कोई लाभ ले पा रहे हैं.

बदहाली का जीवन जी रहे किसान
नया रायपुर स्थित कोटराभांटा गांव के शिशुपाल बंजारे नामक किसान और उसके परिजन आज न्याय की स में बदहाली में जीने के लिए मजबूर हैं. बारह सदस्यीय यह परिवार एक टूटे-फूटे शेड के नीचे जीवन जीने को मजबूर है. दरअसल इनकी जमीन का सरकार ने भू-अर्जन किया है जिसके खिलाफ यह परिवार बीते आठ सालों से न्यायलय के चक्कर काट रहा है. न्याय के इंतजार में शिशुपाल ने अपने पिता को खो दिया. शिशुपाल का कहना है कि बतौर विपक्ष कांग्रेस ने न्याय दिलाने का आश्वासन दिया था, लेकिन सरकार बनते ही कांग्रेस की सरकार ने कोर्ट केस का हवाला देकर मामले से पल्ला झाड़ लिया है.

नया रायपुर से लगे गांव की महिला किसान.


पाई-पाई के लिए मोहताज किसान
नया रायपुर स्थित कोटराभांटा गांव के 14 किसानों ने सरकार से बगावत कर न्यायलय की शरण क्या ली, मानों इनके और इनके पूरे परिवार पर मुसीबतों का पहाड़ टूट गया हो. पीड़ित किसान ललित यादव कहते हैं महज साढ़े नौ लाख रुपए प्रति एकड़ की दर पर सरकार द्वारा भू-अर्जन करने के खिलाफ कोटराभांटा के 14 किसानों साल 2013 में बिलासपुर हाईकोर्ट के शरण में गए. किसानों का दावा है कि उनकी कुल जमीन करोड़ों रुपयों की है, लेकिन उन्हें सरकार द्वारा कम दाम ही दिया जा रहा है.

किसान नेता रूपन चन्द्राकर.


..तो सुप्रीम कोर्ट पहुंचे
किसान नेता रूपन चन्द्राकर कहते हैं कोर्ट में सुनवाई के दौरान ही नया रायपुर विकास प्राधिकरण ने साल 2017 में किसानों से प्रशासनिक शक्तियों के तहत जमीन खाली करा अपने कब्जे में ले ली. जिसके खिलाफ पीड़ित किसान सुप्रीमकोर्ट के दरवाजे तक पहुंचे, लेकिन बिलासपुर हाई कोर्ट में जारी सुनवाई के तहत सुप्रीम कोर्ट ने पहले हाई कोर्ट में सुनवाई पूरी होने की बात कही. जिसके बाद किसान वापस बिलासपुर हाई कोर्ट पहुंचे और तब से लेकर आज तक केवल तारीख पर तारीख में ही उलझे हुए हैं.

फाइल फोटो.


करोड़ों रुपये प्रति एकड़ में बेची जा रही जमीन
किसानों का कहना है कि उनका विरोध इस बात से भी है कि जिन किसानों से नया रायपुर विकास प्राधिकरण द्वारा महज साढ़े नौ लाख रुपए प्रति एकड़ में जमीन ली गई, उसे डेवलप कर के करोड़ों रुपए प्रति एकड़ के दाम पर सरकार द्वारा बेचा जा रहा है. बीते आठ-दस सालों से लड़ाई लड़ते-लड़ते इन किसानों ने सरकार बदलते तो देख लिया. मगर किसानों की स्थिति कब बदलेगी इस बात की संभावना भी दिखाई नहीं दे रही है. जबकि चुनावी समर में तात्कालिक नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस घोषणा पत्र समिति के अध्यक्ष टीएस सिंहदेव ने कांग्रेस की सरकार बनने पर सरकार द्वारा मध्यस्था करते हुए चार गुना मुआवजा दिलाने का अश्वासन दिया गया था.

कोर्ट का हवाला
छत्तीसगढ़ सरकार में वरिष्ठ मंत्री मोहम्मद अकबर का कहना है कि नया रायपुर में किसानों का मामला हाई कोर्ट में पेंडिंग है. ऐसे में सरकार इसपर कोई निर्णय नहीं ले सकती है. ऐसे में अब किसानों को कोर्ट का निर्णय आने तक इंतजार करना होगा.

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First published: July 30, 2019, 3:24 PM IST
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