PM नरेन्द्र मोदी को CM भूपेश बघेल ने लिखा पत्र, कहा- 'किसान विरोधी अध्यादेश वापस ले केन्द्र सरकार'
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PM नरेन्द्र मोदी को CM भूपेश बघेल ने लिखा पत्र, कहा- 'किसान विरोधी अध्यादेश वापस ले केन्द्र सरकार'
सीएम भूपेश बघेल और पीएम नरेन्द्र मोदी की फाइल फोटो.

छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल (CM Bhupesh Baghel) ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi) को एक पत्र लिखा है.

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रायपुर. छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल (CM Bhupesh Baghel) ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi) को एक पत्र लिखा है. इस पत्र में उन्होंने पीएम मोदी से भारत सरकार द्वारा जारी कृषि उत्पाद व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन एवं सुविधा) अध्यादेश 2020 को वापस लेने का आग्रह किया है. मुख्यमंत्री ने पत्र में लिखा है कि भारत सरकार द्वारा 5 जून को जारी यह अध्यादेश कृषकों के हित में नहीं है, रोजगार के अवसरों को कम करने वाला और संघीय ढांचे की मान्य परंपराओं के विपरीत है. ऐसे में किसान विरोधी इस अध्यादेश को वापस लिया जाना चाहिए.

सीएम भूपेश बघेल ने पत्र में लिखा है कि छत्तीसगढ़ कृषि प्रधान राज्य है, राज्य की अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित है और लगभग 70 प्रतिशत जनसंख्या कृषि गतिविधियों में संलग्न हैं. राज्य में लगभग 85 प्रतिशत लघु एवं सीमांत कृषक हैं तथा राज्य के लगभग तीन चौथाई क्षेत्र पिछड़े एवं वन क्षेत्र हैं, जहां पर राज्य के लगभग 80 प्रतिशत अनुसूचित जाति, जनजाति एवं पिछड़ा वर्ग के लोग निवासरत हैं.

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दी ये जानकारी
सीमए बघेल ने लिखा है कि प्रदेश सरकार द्वारा उन्नत तकनीक, गुणवत्तायुक्त बीज तथा कृषकों के हित में संचालित विभिन्न योजनाओं के माध्यम से धान, मक्का, गन्ना तथा सोयाबीन के उत्पादन में उल्लेखनीय प्रगति हुई है. प्रदेश में मुख्य रूप से धान की फसल ली जाती है. कृषकों द्वारा उत्पादित धान का उपार्जन समर्थन मूल्य पर भारतीय खाद्य निगम की ओर से छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ मर्यादित रायपुर द्वारा किया जाता है और प्रदेश से भारतीय खाद्य निगम को देश के लिए उसना चावल की आपूर्ति की जाती है, जिसके फलस्वरूप देश में लोगों को खाद्यान्न की आपूर्ति सुनिश्चित हो सकी है और देश कोविड-19 जैसी महामारी से विश्वास पूर्वक लड़ने में सक्षम हो सका है.

गिनाईं अध्यादेश की खामियां
सीएम बघेल ने पत्र में लिखा है कि भारत सरकार द्वारा 05 जून 2020 को जारी कृषि उत्पाद व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन एवं सुविधा) अध्यादेश 2020 द्वारा कृषक एवं व्यापारी को कृषक उत्पाद के क्रय-विक्रय करने की स्वतंत्रता देते हुए मंडी प्रांगण-उपमंडी प्रांगण के बाहर विक्रय अधिसूचित कृषि उपज के क्रय-विक्रय पर मंडी शुल्क से छूट एवं बगैर लाइसेंस के स्थायी खाता संख्या (PAN) कार्डधारी व्यापारी को कृषि उपज के क्रय-विक्रय करने की अनुमति दी गई है. वैविध्यपूर्ण हमारे देश के भिन्न-भिन्न भू-भागों पर भिन्न-भिन्न किस्म की कृषि उपज उत्पादित की जाती है, जिनके विपणन की रीतियों कृषकों के तत्स्थानी स्वभाव एवं स्थितियों से प्रभावित होती है. यही कारण है कि प्रत्येक राज्य सरकार द्वारा संविधान की सातवीं अनुसूची की राज्य सूची 2 की प्रविष्टि 14, 26, 28 एवं 66 के अनुसार अपने प्रदेश की कृषि उपजों एवं स्थानीय विपणन रीति को दृष्टिगत रखते हुए मंडी अधिनियम बनाकर कृषि उपजों के विपणन को इस प्रकार विनियमित किया गया है कि बाजार की कुरीतियों को समाप्त कर असंगठित कृषकों का हित संरक्षित किया जा सके.

स्टील उद्योग में रियायत की मांग
सीएम भूपेश बघेल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर बस्तर में स्टील उद्योग को एनएमडीसी के माध्यम से 30 प्रतिशत रियायत पर लौह अयस्क उपलब्ध कराने का आग्रह किया है. मुख्यमंत्री ने कहा है कि इससे बस्तर में बड़े पैमाने पर स्टील उद्योगों का संचालन और इसके जरिए बड़े पैमाने पर स्थानीय युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी, जिससे बस्तर के विकास और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा. मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में इस बात का उल्लेख भी किया है कि राज्य शासन की ओर से भारत सरकार के उपक्रम एनएमडीसी को इस आशय का प्रस्ताव भी भेजा जा चुका है.
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